आतंकियों के सामने 'रॉक' की तरह खड़े थे रॉकी
उधमपुर। बुधवार को जम्मू कश्मीर के उधमपुर में बीएसएफ की टुकड़ी पर हुए आतंकी हमले में बीएसएफ के दो जवानों की बहादुरी की कहानी हर किसी की जुबान पर है। रॉकी और शुभेंदु राय, इन दोनों ने बस में सवार अपने 30 साथियों की जान बचाने का महान काम किया था।

हालांकि दुख की बात है कि हमले के दौरान ही रॉकी और शुभेंदु शहीद हो गए। ये इनकी बहादुरी का ही नतीजा था कि एक आतंकी को मार गिराया गया और एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया।
बीएसफ के डीजी डीके पाठक ने गुरुवार को जानकारी दी कि जिस बस में आतंकियों ने गोलीबारी की उसमें सिर्फ रॉकी के पास ही हथियार थे। ऐसे में रॉकी ने ही बाकी जवानों की जान बचाने का काम किया। जैसे ही रॉकी को पता लगा कि
बस पर फायरिंग हो रही है उन्होंने अपने हथियार तैयार कर लिए। इस बस को कांस्टेबल शुभेंदु चला रहे थे। वह आतंकियों की गोली से घायल हो गए थे लेकिन इसके बाद भी उन्होंने बस नहीं रोकी।
रॉकी ने कासिम खान के साथ शामिल दूसरे आतंकी नोमान को अपनी राइफल के जरिए रोककर रखा था। जैसे ही आतंकियों ने बस के अंदर दाखिल होने की कोशिश उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दी। रॉकी रामगढ़ के गांव माजरी के रहने वाले हैं।
उनकी शहादत पर उनके परिवार वालों को दुख तो है लेकिन गर्व भी है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है।
बीएसएफ डीजी डीके पाठक ने इस बात से भी इंकार कर दिया कि आतंकी नोमान को सीआरपीएफ ने मारा है। पाठक ने कहा कि सीआरपीएफ का दावा गलत है और नोमान को बीएसएफ ने ही मौत के घाट उतारा है।












Click it and Unblock the Notifications