कांशीराम ने कहा था कि मायावती को केवल पैसा चाहिए: आरके चौधरी
लखनऊ। कांशीराम के करीबी और बसपा में वरिष्ठ नेता रहे आरके चौधरी से जब आज वन इंडिया ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिकट बेचने के आरोप, गुलाबी पत्थरों में पैसे का दुरूपयोग आदि विषयों पर बात की तो आरके चौधरी ने मायावती पर कई तरह के आरोप लगाए, साथ ही कई विषयों पर गंभीरता से बातचीत की। पेश है ये रिपोर्ट-
मायावती को पैसे की हवस
मान्यवर कांशीराम जी ने 1994 में कहा था कि मायावती को पैसा बटोरने की हवस है। दरअसल मायावती ने अपने गांव में मीटिंग की, वहां मैं हाजिर था। वहां पर मायावती ने थैली ले लिया और अपने पिता को दे दिया। जिसके बाद मान्यवर कांशीराम को ये खबर मिली तो उन्होंने कहा कि मायावती को पैसा बटोरने की हवस है।
पत्थरों में भी होगा 'कमीशन'
प्रत्येक विधानसभा में 30-40 हजार वोटबैंक है, तो टिकट लेने वाले पैसा देंगे। उनका हमेशा ध्यान पैसों पर रहता है। निश्चित तौर पर वे पत्थरों में कमीशन लेती होंगी....इसके पीछे की वजह है कलेक्शन ऑफ मनी।
हरिजन एक्ट में माना जाता है कि बसपा के सत्तारूढ़ होने पर दलित अन्य वर्गों पर हावी हो जाते हैं, क्या कहना है आपका ?
जो दलित उत्पीड़न की घटनाएं घटती हैं, वे रोज घटती हैं। ऊना में जो घटना घटी वहां तो व्यवस्था थी नहीं। एक्ट एक है उसका नाम है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातीय अत्याचार निवारण अधिनियम..पुलिस वाले अपना काम कर रहे हैं। मैं इसमें दोषी नहीं मानता हूं। हां जहां पर दलितों को न्याय के लिए एक एक्ट है वहां हो सकता है कि कभी कभी कुछ गलत मामले भी आते हों।
बेस में वर्ण है और वर्ण के आधार पर जातियां
आरके चौधरी ने जातिवाद पर वन इंडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यदि बेस ऑफ कास्ट उत्पीड़न है। क्योंकि बेस में वर्ण है और वर्ण के आधार पर जातियां है। इसे भगवान श्रीकृष्ण ने बनाया है। अब अगर भगवान ने ही इस देश में चार वर्ण बना दिया है तो हमें भोगना तो है ही। भगवान की बात कौन काटेगा। यही कारण है कि देश में जो लोग जातिवाद खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन खत्म नहीं हो रही क्योकि भगवान ने बनाया है। हालांकि मुझे पता है कि आप इसे छापेंगे नहीं।
जल्द शुरू करेंगे आंदोलन
भारत में जो गरीबी का ग्रामर है वर्णभेद और जातिभेद पर आधारित है। भगवान श्रीकृष्ण का कहना है कि ये उन्होंने बनाया है। गुण, कर्म के अनुसार। अगर कोई घटिया काम करता है तो क्या वह शूद्र होगा, और अगर शूद्र कोई अच्छा काम करता है तो क्या वह ब्राह्मण हो गया। इस पर हम एक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। सामाजिक परिवर्तन एवं अार्थिक मुक्ति आंदोलन। वर्णव्यवस्था के इस देश में वाकई गैरबराबरी है।
'न खाता न बही बहन जी जो कह दें वही सही'
एक कहावत है कि वृंदावन में कहना है तो राधे राधे कहना है और अगर बहुजन समाज पार्टी में रहना है तो बहन जी बहन जी कहना है। इस देश में सुश्री मायावती एक ऐसी नेता है कि न खाता न बही बहन जी जो कह दें वही सही...जिन नौ नेताओं पर सीबीआई लगी हुई है उन्हीं में से एक ने एक फाइल पर साइन करने से मना कर दिया, उन्हें मायावती ने बुलाया और पूछा कि साइन क्यों नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि बहन जी इससे जो पैसा मिलेगा उससे ज्यादा पैसा मैं अलग से दिला दूंगा।
तो मैं और आप दोनों लोग फंस जाएंगे
अगर इसमें हस्ताक्षर करता हूं तो मैं और आप दोनों लोग फंस जाएंगे। ये बहुजन समाज पार्टी के ही नौरत्नों में से एक हैं। जो पैसा इन्होंने बनाया उसमें से अपने लिए इन नौरत्नों ने थोड़ा लिया होगा न...बाकी ऊपर पहुंचाया होगा।
बसपा के नौ-रत्न
इन नौ रत्नों में पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र, अवध पाल सिंह यादव, बादशाह सिंह, चंद्रदेव राम यादव, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, राकेशधर त्रिपाठी, रामवीर उपाध्याय और बाबूसिंह कुशवाहा के नाम शामिल हैं।
'मायावती ने कहा था कि आरके चौधरी हरिश्चंद्र बनने से काम नहीं चलेगा'
1995 में जब मैं स्वास्थ्य मंत्री था तो मायावती ने मुझे बुलाया। बीएस लाली उस समय एक्साइज के सचिव थे। एक्साइज एक्ट में संशोधन करना था। उस समय मैं नेता सदन भी था विधानपरिषद् और मंत्री भी था। उन्होंने मुझसे कहा कि आरके चौधरी जो बीएस लाली कहें वैसे करो क्योंकि इसे हाउस में सबसे पहले पास कराना है। मायावती ने कहा कि बहुत हरिश्चंद्र बनने से काम नहीं चलेगा।
सीबीआई जांच में नौ लोग फंसे
एक्ट में संशोधन हुआ, उस समय यही सोचा कि ये मुझको हटा देंगी। कुछ वक्त के बाद सीबीआई में नौ लोग फंसे। मान लीजिए जिसने 10 करोड़ बीस करोड़ लिया वो अपने लिये दो-चार लाख तो ले ही लेगा। मायावती के अंदर पैसों की हवस है जिसे माननीय कांशीराम जी भी जानते थे।













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