माया पर कब-तक रहेगा बागियों का साया, क्या कहते हैं सितारे?
यूपी विधानसभा चुनाव के बादल सिर पर मंडरा रहें है और राज्य में सत्ता की दावेदार बसपा को अन्दरूनी कलह का सामना करना पड़ रहा है। बसपा जिसको चाहती थी उसे अपने साथ मिला लेती थी एंव जिसे नहीं पसन्द करती थी, उसे दुत्कार कर बाहर का रास्ता दिखा देती थी।
2017 की रणनीति बनाने में जुटी मायावती

मगर इस बार दांव उलटा पड़ गया। बसपा के खास नुमांइदे बसपा को ही बहिष्कार कर रहें है। इसी बात को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती के माथे पर चिन्ता की स्पष्ट लकीरें नजर आने लगी है। माया पर इस समय बागियों का साया छाया हुआ है। आइये जानते है कि बसपा पार्टी में अभी और क्या-क्या उथल-पुथल होनी बाकी है?
मायावती की कुण्डली में इस समय बुध की महादशा
बसपा प्रमुख मायावती का जन्म 15 जनवरी सन् 1950 को रात्रि 7 बजकर 50 मि0 पर दौलतपुर में हुआ था। मायावती की कुण्डली में इस समय बुध की महादशा में केतु का अन्तर चल रहा है। बुध पराक्रमेश व द्वादशेश होकर सप्तम भाव में सूर्य व चन्द्रमा के साथ स्थित है। केतु लाभ भाव में शुक्र की राशि में वृष में बैठा है किन्तु केतु की यह स्थिति नीच की है। कुण्डली का एकादश भाव मित्रों व प्रशंसको का प्रतिनिधित्व करता है। केतु की नीचता के कारण ही बसपा के प्रबल समर्थक व शुभ चिंतक स्वामी प्रसाद मौर्य व आरके चौधरी जैसे लोगों ने पार्टी को छोड़ दिया।
18 अक्टूबर तक बुध में केतु की दशा
अभी 18 अक्टूबर तक बुध में केतु की दशा चलेगी। यह कार्यकाल मायावती के लिए संकटों से घिरा रहेगा। अगर मायावती ने सीधे संवाद का अभाव रखा तो पार्टी में पिछले कई वर्षो से घुटन महसूस कर रहे कुछ और खास लोग पार्टी का बहिष्कार कर सकते है।
अष्टम का शुक्र लाभकारी
20 अक्टूबर से बुध की महादशा में शुक्र का अन्तर प्रारम्भ हो जायेगा। यह समय मायावती व बसपा दोनों के लिए समय अनुकूल रहेगा। शुक्र चतुर्थेश व लाभेश होकर अष्टम भाव में अपने मित्र की राशि कुम्भ में बैठा है। अष्टम का शुक्र लाभकारी होता है। इस भाव का शुक्र साझेदारी व गठबंधन से लाभ करवाता है। सम्भावना है कि दिसम्बर तक बसपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जायेगा। दोनों पार्टियॉ मिलकर उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा का चुनाव लड़ेंगी। इस गठबंधन से दोनों का फायदा होगा लेकिन सबसे अधिक लाभ बसपा को ही प्राप्त होगा।












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