'मायावती को डराकर रखते हैं सतीश चंद्र मिश्रा'
लखनऊ। दरअसल बात पुरानी थी लेकिन सवाल नए-नए उकर कर अस्तित्व में आ रहे थे। बीएसपी महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने अमेरिकी दूतावास के अफसरों को बताया था कि यूपी की मुख्यमंत्री मायावती का भ्रष्टाचार की तरफ खास झुकाव है। वो एक मजबूत सामंती सोच रखती हैं। ये खुलासा किया था विकिलीक्स ने अपने केबल में।
'भतीजे ने बुआ मायावती को खुश करने के लिए किया सत्ता का दुरूपयोग'

मीडिया रिपोर्ट में 29 मई 2007 की एक केबल के हवाले से कहा गया है कि मिश्रा भ्रष्टाचार को लेकर मायावती के झुकाव को जानते और मानते हैं। ये केबल 13 मई 2007 को मायावती के शपथ ग्रहण के बाद की है। इसमें ये भी जिक्र है कि चूंकि माया की अंग्रेजी कमजोर है और विदेशियों से उनका संबंध न के बराबर है इसलिए वो मिश्रा को बीच में रखती हैं।
पर, ये हकीकत जरा समझ से परे थी इसीलिए पूरी पड़ताल के लिए वन इंडिया से हिमांशु तिवारी आत्मीय ने पूर्व मंत्री एवं विधायक आरके चौधरी से खास बातचीत की। और जो सच सामने आया वो वाकई चौंकाने वाला है।
अमेरिकी दूतावास के अफसरों के सामने सतीश चंद्र मिश्रा ने बसपा सुप्रीमों मायावती की जमकर फजीहत की थी, लेकिन वो मायावती के खास क्यों बने हुए है ? मायावती की क्या मजबूरी है?
अब उनके आपस में क्या संबंध हैं, ये मैं नहीं जानता। लेकिन सतीश चंद्र मिश्रा कहीं से भी बहुजन समाज पार्टी के काबिल नहीं हैं या कहें हित में नहीं हैं। कभी कांशीराम जी मायावती जी को गाइड करते थे लेकिन आज सतीश मिश्रा मायावती जी को गाइड करते हैं। क्या मजबूरी है, थिंकिंग पावर मायावती के अंदर नहीं है, थिंकिंग पावर कांशीराम जी के अंदर थी।
बहुजन समाज पार्टी के लिए उपयोगी नहीं सतीश
एक उदाहरण बता दूं आपको, डिसीजन के मामले में मामला ऐसा है कि एक जज साहब थे, कभी कभी बेल एप्लीकेशन सुनते थे और पचास-साठ बेल एप्लीकेशन एकत्र कर लेते थे। आधी फाइल लेफ्ट और आधी राइट में रख लेते थे। आंखें बंद करके दाहिनी वाला मंजूर और बायें वाला खारिज। बिना किसी पुख्ता वजह के। इसी तरह से मायावती जी हैं, जिसको कल पार्टी से निकाला आज ले लिया। आज सतीश चंद्र मिश्रा पॉलिसी मेकर की हैसियत से हैं, सतीश चंद्र मिश्रा बहुजन समाज पार्टी के लिए उपयोगी नहीं है।
NRHM घोटाले में सतीश मिश्रा के करीबी बताए जाने वाले व स्वास्थ्य मंत्री रहे अनंत मिश्रा भी फंसे हुए हैं, इस पर आपका क्या कहना है?
अंटू मिश्रा की जो लॉबी है उसकी वर्किंग रफ है, करप्ट है, निश्चित तौर पर। जब अगुआ ही गड़बड़ है तो टीम भी गड़बड़ ही हो जाएगी। बहुजन समाज पार्टी की जो इस समय टीम है निश्चित तौर पर जो पांच करोड़, दो करोड़, चार करोड़ का इंतजाम करती है तो अपने लिए भी एक-दो लाख रूपये भी लेता होगा न।
आरके चौधरी ने बताया कि लोगों के बीच भी खबर है 'सतीश मिश्रा की ही मानती हैं मायावती'
एक मामला है सतीश चंद्र मिश्रा इतना हावी हैं कि मैं एकबार अपने ऑफिस से बाहर निकलकर सीतापुर जा रहा था। तब तक विधानभवन के सामने लाठी चार्ज हो गया। टीईटी को स्टूडेंट का धरना प्रदर्शन था। मैं फंस गया। टीईटी वाले जो बौखलाये थे, उन्होंने मुझे घेर लिया। मुझे कई लोगों ने पहचान लिया, मैंने अपनी गाड़ी का शीशा नीचे करके उनकी बातों को सुना।
तब तक कुछ लोग कहने लगे कि आप सुनकर बहन जी से बात करेंगे। मैंने कहा बिलकुल, वो हमारी मुखिया हैं। तब तक एक जाटव विरादरी...(जिससे मायावती आती हैं) के व्यक्ति ने कहा कि बहन जी आपकी सुनेंगी भी या सारा सतीश मिश्रा की ही सुनेंगी। ये कॉन्सेप्ट है... लोगों के बीच ये मैसेज है कि बहन जी आपकी सुनेंगी भी या सतीश मिश्रा की ही सुनेंगी। ये दो साल पहले की बात है।
....तो क्या यह कहा जा सकता है कि मायावती की कमजोर नस सतीश मिश्रा के हाथ में है?
मायावती जी सतीश मिश्रा पर आश्रित हैं। दरअसल सतीश मिश्रा वकील हैं। आय से अधिक मामला, एक दो करप्शन के केस सब सतीश मिश्रा डील कर रहे हैं और इतना डराकर रखा है तो कहां से मायावती जी सतीश मिश्रा को छोड़ पाएंगी।
हाल ही में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि नसीमुद्दीन को लेकर भाजपा सांप्रदायिकरण कराने का प्रयास कर रही है, क्या कहेंगे आप?
मायावती को अपने कार्यकर्ताओं को संभालना चाहिए और मेहनत से काम करना चाहिए। उनके पीछे पॉलिटिकल लोग पड़ेंगे, पड़ते हैं लेकिन उनको चाहिए कि अपनी आदत और अपनी भाषा शैली में सुधार लावें। सुधार करके अभी चल सकता है। लेकिन पूरे प्रदेश का बहुजन समाज या कहें जमीनी वर्कर है वो मायावती की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है, असंतुष्ट है। मायावती को किसी पार्टी पर दोष देने से पहले अपनी टीम को सुधारना चाहिए।












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