"कहीं नया चुनावी छलावा......?" 10 लाख सरकारी नौकरी पर मायावती ने पूछे ये सवाल
नई दिल्ली, 14 जून: बीएसपी चीफ मायावती ने डेढ़ साल में 10 लाख लोगों को रोजगार देने के पीएम मोदी के निर्देश पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने सवाल किया है कि यह चुनावी छलावा तो नहीं है। उन्होंने देश की विभिन्न समस्याओं का जिक्र कर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया है कि जितने पदों पर भर्तियों का ऐलान किया गया है, उससे कहीं ज्यादा पद तो आरक्षित वर्गों के खाली पड़े हुए हैं। उनका यह भी दावा है कि बेरोजगारी की समस्या से भी सबसे ज्यादा यही वर्ग पीड़ित हैं।

10 लाख नौकरियों की घोषणा पर भड़कीं मायावती
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की भर्ती की केंद्र सरकार की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किया है कि क्या यह चुनावी छलावा तो नहीं है? बसपा चीफ ने कहा है कि केंद्र सरकार ने जितनी रिक्तियों पर भर्ती की घोषणा की है, उससे कहीं ज्यादा पद तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्षों से खाली पड़े हैं। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने दो ट्वीट करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मंगलवार को की गई घोषणा पर हमला किया है।
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कहीं नया चुनावी छलावा तो नहीं है? -मायावती
बसपा चीफ ने इस मामले को लेकर जो पहला ट्वीट किया है, वह इस तरह से है- 'केंद्र की गलत नीतियों और कार्यशैली के कारण गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और रुपए का अवमूल्यन आदि अपने चरम पर है, जिससे सभी त्रस्त और बेचेन हैं। तब केंद्र ने अब अगले डेढ़ वर्ष में अर्थात लोकसभा आम चुनाव से पहले 10 लाख भर्ती की घोषणा की है, जो कहीं नया चुनावी छलावा तो नहीं है?
आरक्षित पदों पर भर्तियों का मुद्दा उठाया
मायावती की ये प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री मोदी की ओर से केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को डेढ़ साल के अंदर 'मिशन मोड' में 10 लाख भर्तियों के निर्देश दिए जाने के बाद आई है। लेकिन, मायावती को लगता है कि मोदी सरकार यह सब चुनावों को देखते हुए कर रही है। उन्होंने कहा, ' एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के इससे कई गुणा ज्यादा सरकारी पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिनको विशेष अभियान चलाकर भरने की मांग बीएसपी संसद के अंदर और बाहर भी लगातार करती रही है। उनके बारे में सरकार चुप है। जबकि, यह समाज गरीबी और बेरोजगारी आदि से सर्वाधिक दुखी और पीड़ित है।'
बेरोजगारी के मुद्दे पर निशाने पर रही है मोदी सरकार
सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और मंत्रालयों से कहा गया था कि रिक्तियों की पूरी डिटेल तैयार करें, जिसके आधार पर पीएम मोदी ने निर्देश जारी किए हैं। पिछले लोकसभा चुनावों के वक्त से ही विपक्षी पार्टियां बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करती रही है। लेकिन, अब तक भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष को इस मोर्चे पर बुरी तरह से पराजित किया है। उसने राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं और विकास के मोर्चे पर चुनावों में जीत हासिल की है। यही नहीं, बेरोजगारी के आरोपों को भी इस सरकार ने हमेशा खारिज किया है और अपने विभिन्न कार्यक्रमों को रोजगार सृजन करने वाली स्कीम के तौर पर पेश किया है। लेकिन, मंगलवार को पीएम मोदी का इस संबंध में निर्देश काफी चौकाने वाला है।
2. साथ ही, एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के इससे कई गुणा अधिक सरकारी पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं जिनको विशेष अभियान चलाकर भरने की माँग बीएसपी संसद के अन्दर व बाहर भी लगातार करती रही है। उनके बारे में सरकार चुप है जबकि यह समाज गरीबी व बेरोजगारी आदि से सर्वाधिक दुःखी व पीड़ित है। 2/2
— Mayawati (@Mayawati) June 14, 2022












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