माया ने राहुल-सोनिया के लिए मांगे वोट

नई दिल्ली- राजनीति का मिजाज ही कुछ ऐसा होता है कि नेता कब किस पर निशाना साधने लगता है और कब किसी के साथ गलबहियां करने लगता है पता ही नहीं चलता। पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और बीजेपी पर बराबर हमलावर रहीं बीएसपी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) पांचवें चरण के मतदान से एक दिन पहले अचानक कांग्रेस पर नरम पड़ गईं। अब उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवारों को जिताने के लिए बयान भी जारी किए हैं।

माया का पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील

माया का पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील

बसपा (BSP)सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने रविवार को समाजवादी पार्टी (SP) और बसपा (BSP) महागठबंधन के कार्यकर्ताओं से सोमवार को अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में वोटिंग की अपील की है। गौरतलब है कि अब तक मायावती, भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस पर भी खूब हमलावर दिखती थीं। कार्यकर्ताओं को जारी बयाने में माया ने कहा है, "भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस एक जैसे हैं। हमने कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है, लेकिन बीजेपी को हराने के लिए, हमारा गठबंधन अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस को वोट देगा।" शायद माया को लगा कि उनका बार-बार चुनावी रैलियों में कांग्रेस-विरोधी स्टैंड कहीं कार्यकर्ताओं को कंफ्यूजन में न डाल दे। इसलिए उन्हें चुनाव से एक दिन पहले ये अपील की है।

मोदी और बीजेपी पर निशाना

मोदी और बीजेपी पर निशाना

उन्होंने अपने बयान में आगे कहा है, "चार चरणों के चुनाव में, जनता ने एसपी-बीएसपी गठबंधन का समर्थन किया है, जिससे बीजेपी परेशान है। यह गठबंधन न सिर्फ केंद्र में एक नया प्रधानमंत्री बनाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक नई सरकार भी बनाएगा।" उन्होंने यह भी तंज कसा है कि 23 मई को भारत 'निरंकुश एवं अहंकारी' शासन से मुक्त हो जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले लगातार अपने भाषणों में माया बीजेपी और कांग्रेस को एक ही थैली के चट्टे-बट्टे बताती रही हैं।

मायावती को क्यों पड़नी पड़ी ऐसी अपील?

मायावती को क्यों पड़नी पड़ी ऐसी अपील?

सोमवार को रायबरेली के साथ-साथ अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भी मतदान होना है। अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव मैदान में हैं। उनके खिलाफ केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इस बार भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं, जिन्होंने 2014 में राहुल गांधी की जीत को कठिन बना दिया था। इस चुनाव में भी बीजेपी और स्मृति ईरानी वहां बहुत जोर लगा रही हैं। भाजपा उम्मीदवार पिछले पांच साल से लगातार अमेठी के लोगों से संपर्क में हैं और वहां पर जाती रही हैं। यही नहीं मोदी सरकार ने अमेठी के लिए कई विकास योजनाओं की भी शुरुआत की है। इस बीच राहुल के केरल के वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ने के फैसले को भी बीजेपी ने राहुल को हार का डर सताने की तरह पेश किया है। ऊपर से चुनाव प्रचार के अंतिम दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बड़े रोड शो ने भी राहुल के इलेक्शन मैनेजरों का टेंशन बढ़ा रखा है। इसी के चलते पहले राहुल की बहन और पूर्वी यूपी की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अमेठी के लोगों को खत लिखकर राहुल के लिए अपील कर चुकी हैं। उनके बाद राहुल गांधी ने खुद भी अंतिम समय में एक ऑडियो मैसेज से अमेठी के मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया है और अब बसपा सुप्रीमो को भी इसी तरह का एक बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इन हालातों के मद्देनजर निश्चित ही अमेठी का मुकाबला बहुत ही दिलचस्प हो गया है और देखने वाली बात होगी कि वहां के वोटर बदलाव के पक्ष में जाते हैं या 2014 का ही वोटिंग पैटर्न अपनाते हैं।

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