'जब बेटा शहीद हो, मां-बाप को भी मार दिया जाए', शहीद मेजर मोहित शर्मा की मां का दर्द, बहू लेकर चली गई सारा पैसा
Major Mohit Sharma: भारतीय सेना के शहीद जवान मेजर मोहित शर्मा की मां ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि 'जिस दिन बेटा शहीद हो, उस दिन मां-बाप को भी मार दिया जाए।' मेजर मोहित शर्मा 21 मार्च 2009 को नॉर्थ कश्मीर के कुपवाड़ा में शहीद हो गए थे। उनके माता-पिता आज भी इस गम से निकल नहीं पाए हैं।
शहीद मेजर मोहित की मां सुशीला शर्मा ने भी NOK (Next of kin) पर सवाल उठाए हैं। सुशीला शर्मा का दावा है कि उनकी बहू ने उनसे रिश्ता तोड़ दिया और मुआवजे की सारी रकम भी ले ली है। उन्होंने यह भी कहा है कि उनके शहीद बेटे को मिलने वाली सारी पेंशन भी बहू ही लेती है। शहीद मेजर मोहित शर्म की पत्नी रिशिमा शर्मा भी भारतीय सेना में कर्नल हैं।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में शहीद मेजर मोहित शर्मा की मां सुशीला शर्मा अपने बेटे के जाने के बाद की जिंदगी के बारे में बात कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के निकटतम परिजन (NoK) मानदंडों में बदलाव की भी मांग की है।
सुशीला शर्मा ने अपनी बहू और कर्नल रिशिमा शर्मा पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल ही में भारतीय सेना के शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के पिता रवि प्रताप सिंह और माता मंजू देवी ने भी अपनी विधवा बहू स्मृति सिंह के खिलाफ कुछ ऐसे ही आरोप लगाए थे और NoK में बदलाव की मांग की थी।
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शहीद मेजर मोहित शर्मा की मां बोलीं- हमें भी बेटे के साथ ही मार देना चाहिए था
सुशीला शर्मा कहती हैं, ''इतना दुख है कि...मैं तो साफ कहती हूं कि जिस दिन बेटा शहीद हो, उस दिन मां-बाप को भी मार दिया जाए। क्यों हम कष्ट भोगे सारी जिंदगी, हमारे लिए क्या है, सिवाय आंसुओं के...। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता, हमें कोई मेडिकल सुविधा नहीं मिलती है सरकार से, जबकि मेरा बेटा अशोक चक्र विजेता है।''
सुशीला शर्मा बोलीं- बहू रिश्ता तोड़कर गई, सारा पैसा और सैलरी भी लेती है
सुशीला शर्मा ने आगे कहा, ''27 जनवरी को मेरे घर में पुलिस आई और कहा कि, आप अपनी बहू को तंग कर रही हैं। जबकि वह वहां दिल्ली में अशोक च्रक ले रही थी? होटल में रुकी हुई थी तो मैं कैसे उसको तंग कर सकती थी।''

सुशीला शर्मा ने रोते हुए कहा, ''मेरा बेटा इतना अच्छा था कि मुझे एक मिनट के लिए भी अकेला नहीं छोड़ता था। घर पर आता था तो हमेशा, यहां चलो, वहां चलो करता रहता था। आज की तारीख में मेरे बेटे की पूरी सैलरी बहू लेती है। आज उसको मेरे बेटे की वजह प्रमोशन मिल गए हैं, आज वो खुद कर्नल है। अपनी सैलरी, मेरे बेटे की सैलरी, जब तक वह रिटायर होगी, उसे मिलती रहेगी। और जो पैसा यूपी सरकार या जिस भी राज्य सरकार ने दिया है, वो सारा पैसा उसके पास है।''

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सुशीला शर्मा ने Nok पर कहा- सम्मान माता-पिता को मिलना चाहिए?
सुशीला शर्मा ने आगे कहा, ''जब हम लोगों को अशोक चक्र के लिए नहीं बुलाया गया तो हमने बहुत फाइट किया। तब जाकर अब सम्मान लेने के लिए दो लोग जाने शुरू हुए हैं। लेकिन इससे पहले तो कोई मतलब नहीं था।''
सुशीला शर्मा ने कहा, ''NOK (Next of kin) क्या है? माता-पिता का ओहदा कहां हैं? जो पेरेंट्स 26-27 साल अपने बच्चों को पालते हैं, एक मां तो 9 महीने और ज्यादा पालती है, कष्ट उठाती है, ये सारी चीजें शादी के बाद खत्म हो जाती है। ऐसा क्यों है? ये जो अधिकार है, वो मां को मिलने चाहिए। अशोक चक्र जो है, वो मां को मिलना चाहिए। कोई भी सम्मान है, वो माता-पिता को मिलना चाहिए। मोहित के नाम पर हैरिटेज होम बनाया है, वहां भी मां-बाप का नाम नहीं लिखा है।''
सुशीला शर्मा ने वीडियो के आखिर में अपने शहीद बेटे के बहादुरी को याद करते हुए कहा, ''मेरा बेटा बहुत सारे ऑपरेशन करता था। ये भेष बदलकर आतंकवादियों के साथ रहा था। उनके ठिकाने में रहकर उनको वहीं मारा था। 2009 में हमें रात को डेढ़ बजे मैसेज आया कि वो शहीद हो गया है।''

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who was Major Mohit Sharma: कौन थे शहीद मेजर मोहित शर्मा
🔴 मेजर मोहित शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1978 को हरियाणा के रोहतक जिले में हुआ था। मेजर मोहित शर्मा ने डीपीएस गाजियाबाद से स्कूलिंग की थी। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए महाराष्ट्र के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में गए। यहां उन्होंने SSB क्लियर किया और NDA में भर्ती हो गए।
🔴 मेजर मोहित शर्मा दिसंबर 1999 में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग हैदराबाद में थी। यहां 3 सालों तक बटालियन को अपनी सेवाएं देने के बाद मोहित ने स्पेशल फोर्सेस की ट्रेनिंग ली। जिसके बाद वो जून 2003 में 1 पैरा स्पेशल फोर्सेस में कमांडो के तौर पर नियुक्त किए गए।
🔴 2001 में मेजर मोहित शर्मा 'इफ्तिखार भट्ट' बनकर आतंकियों को झूठी कहानी बताकर हिजबुल मुजाहिदीन के कैम्प में रहते थे। ना सिर्फ वो नाम और चेहरा बदलकर हिजबुल मुजाहिदीन के कैम्प रहते थे बल्कि उन्होंने वहां दो कुख्यात कमांडर्स को भी मार डाला था। मेजर मोहित की ये कहानी आपको 'इंडिया मोस्ट फीयरलेस 2' किताब में भी पढ़ने को मिल जाएगी।
🔴 21 मार्च 2009 को मेजर मोहित शर्मा कुपवाड़ा में गश्त पर निकले थे। इसी दौरान उनकी टीम पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। जिसमें मेजर शर्मा खुद वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर मोहित शर्मा को उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।












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