Colonel Santosh Babu ने जानें कैसे गलवान घाटी में चीनी सेना की साजिश को किया था नाकाम

महावीर चक्र से सम्‍मानित हुए शहीद कर्नल संतोष बाबू, जानें उन्‍होंने गलवान घाटी में कैसे चीनी सेना की साजिश को किया था विफल

Colonel Santosh Babu honored with Mahavir Chakra: पिछले साल मई में गलवान घाटी( Galwan Valley) में चीनी सैनिकों( Chinese Army) के साथ हुए झड़प में शहीद हुए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू( Colonel Santosh Babu ) को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गैलवान घाटी में "शातिर" चीनी हमले के खिलाफ अपने सैनिकों का नेतृत्व करने वाले कर्नल बिकुमला संतोष बाबू को मरणोपरांत वीरता के दूसरे सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार, महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया है। ये वहीं हमारे देश के वीर शहीद हैं जिन्‍होंने गालवान घाटी में 15 जून 2020 को चीनी सेना के साथ हुए युद्ध में 20 भारतीय सेना के जवानों के साथ अपनी जान की बाजी लगा दी, ये एक ऐसी घटना जिसने दशकों में दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्षों में से एक था।

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    इस युद्ध में संतोष बाबू के साथ चार अन्य सैनिक - नायब सूबेदार न्यूदुराम सोरेन, हवलदार (गनर) के पलानी, नाइक दीपक सिंह और सिपाही गुरतेज सिंह-- जिन्होंने भी गैल्वान घाटी संघर्ष में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए अपनी जान की बाजी लगा दी, उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र पुरस्कारों के लिए सम्‍मानित किया गया। । 3 मीडियम रेजिमेंट से हवलदार तेजिंदर सिंह और गालवान घाटी संघर्ष में भारतीय सेना टीम के सदस्य थे, उन्हें वीर चक्र पुरस्कार दिया गया है।

    गलवान घाटी में हुई 15 जून 2020 को चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए कर्नल बी. संतोष बाबू चीनी पक्ष से हुई बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन देर रात हुई हिंसा में वह शहीद हो गए। मूलत: तेलंगाना के सूर्यपत जिले के निवासी कर्नल संतोष बाबू 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अफसर भी थे। इससे पहले संतोष बाबू भारत और चीन के बीच तनाव कम करने को लेकर हुई कई बैठकों का नेतृत्व कर चुके थे।
    कर्नल बाबू, 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर, "हिंसक और आक्रामक" कार्रवाई से और दुश्मन सैनिकों की भारी ताकत से अप्रभावित थे, और उन्होंने भारतीय सैनिकों को धकेलने के बजाए स्‍वयं विरोध करना जारी रखा और देश सेवा की सच्ची भावना प्रदर्शित की। "गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कर्नल बाबू ने अपने पद पर शातिर दुश्मन के हमले को रोकने के लिए शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पूर्ण कमान और नियंत्रण के साथ मोर्चे का नेतृत्व किया।"

    सूत्रों ने बताया था कि 15 जून की रात्रि जब चीनी सेना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पीछे नहीं हटी तो कर्नल बाबू स्वयं उनसे बात करने गए थे। इसी दौरान चीनी पक्ष की तरफ से उनके साथ हाथापाई की गई, जिसके बाद भारतीय सैनिकों ने भी जवाब दिया था। इससे दोनों तरफ से हिंसा शुरू हो गई थी। पत्थर और लाठी-डंडे चले थे। दोनों पक्षों में कई लोग सैनिक भी हो गए थे। उस "झड़प में, जो दुश्मन सैनिकों के साथ अपनी अंतिम सांस तक हमले का प्रतिरोध किया, अपने सैनिकों को जमीन पर डटे रहने के लिए प्रेरित किया। वहीं, नायब सूबेदार नूडूराम सोरेन, हवलदार के पिलानी, हवलदार तेजेंद्र सिंह, नायक दीपक सिंह और सिपाही गुरतेज सिंह को गलवान घाटी के लिए वीरता मेडल दिया गया है। बता दें चीन ने संघर्ष में हताहत हुए अपने जवानों की संख्या का खुलासा आज तक नहीं किया है, लेकिन उसने आधिकारिक रूप से सैनिकों के मरने और घायल होने की बात स्वीकार की थी।

    कर्नल बाबू के सम्‍मान में इससे पूर्व भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में पोस्ट 120 पर 'गैल्वों के गैलन' के लिए एक स्मारक का निर्माण किया है। स्मारक ने ऑपरेशन 'स्नो लेपर्ड' के तहत उनकी वीरता का उल्लेख है। उन्‍होंने इस युद्ध में अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अवहेलना की और दुश्मनों से बहादुरी से लड़ना जारी रखा, साथ ही खुद के घायल सैनिकों को भी निकाला।

    https://www.oneindia.com/photos/full-dress-rehearsals-for-republic-day-2021-parade-in-kolkata-59350.html?src=hi-oi
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