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छत्तीसगढ़: गांव में नहीं बना एक भी टॉ़यलेट, सरकार ने घोषित कर दिया ODF

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के आंकड़ो का खेल देखिए कि बिना टॉयलेट बनवाए राज्य के नक्सल प्रभावित दो जिलों पर खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) का तमगा लगा दिया, लेकिन सच्चाई यह है कि यहां गांवों में टॉयलेट का उपयोग करना तो दूर की बात है, लोगों ने टॉयलेट बनते तक नहीं देखे हैं। लोग हमेशा की तरह खुले में या जंगल में जाते हैं। एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, सरकार ने दिसंबर 2017 में राज्य के बुरी तरह से प्रभावित जिलों बीजापुर, कोंडागांव और दंतेवाड़ा को खुले में शौच मुक्त घोषित(ओडीएफ) किया था। यह राज्य का वह हिस्सा है जहां पर सरकार की मौजूदगी न के बराबर है।

पेयजल और स्वच्छता सचिव परम अय्यर ट्वीट कर दी थी बधाई

पेयजल और स्वच्छता सचिव परम अय्यर ट्वीट कर दी थी बधाई

सचिव पेयजल और स्वच्छता भारत सरकार परम अय्यर ने 4 जनवरी को ट्विटर पर इस उपलब्धि के लिए बीजापुर और सुकमा जिलों को बधाई दी थी। यही नहीं उन्होंने 22 दिसंबर को दंतेवाड़ा और कोंडागाँव को भी बधाई दी थी। लेकिन जब इसकी सच्चाई वहां के रहने वाले एक स्थानीय निवासी मंगल राम से पूछी गई तो उसने कहा कि, उसने कभी भी किसी अधिकारी को यहां पर टॉयलेट का निर्माण करवाते हुए नहीं देखा है। वह आज भी शौच के लिए जंगल में जाता है।

 दो जिलों के आधे से अधिक गांवों तक सरकार की पहुंच नहीं

दो जिलों के आधे से अधिक गांवों तक सरकार की पहुंच नहीं

इंडियन एक्सप्रेस के हाथ लगे दस्तावेजों से पता चला कि दो जिलों के आधे से अधिक गांवों तक सरकार की पहुंच नहीं है। बीजापुर जिले के 2018 के स्वच्छ भारत मिशन डाटा के मुताबिक 169 ग्राम पंचायतों में 82 ग्राम पंचायत बहुत ही दुर्गम इलाके में हैं। जहां पर पहुंचना बहुत ही मुश्किल है। जिन्हें सरकार ने ओडीएफ का टैग दे दिया। इसी तरह सुकमा जिले की बात करें तो, अक्टूबर, 2017 में सरकार द्वारा एकत्र आंकड़ों के अनुसार सुकमा में 146 में से 46 ग्राम पंचायतों को "दुर्गम" इलाकों के रूप में पंजीकृत किया गया है।

जिला कलेक्टर ने स्वीकार कई गांव में शौचालय का काम संभव नहीं

जिला कलेक्टर ने स्वीकार कई गांव में शौचालय का काम संभव नहीं

दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिलों में क्रमश: 83 में से 30 और 99 में से 15 पंचायतें दुर्गम इलाकों में शुमार है। बीजापुर जिला कलेक्टर अयाज तंबोली ने स्वीकार किया कि जिले को ओडीएफ घोषित किया गया है, वहीं कई गांव में शौचालय का काम संभव नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि, हम 85 ग्राम पंचायतों तक पहुंचने में सफल रहे हैं और उनको ओडीएफ बनाया गया है। भारी माओवादी उपस्थिति वाले इलाकों में इस काम को अंजाम देना मुश्किल है। बीजापुर जिले की पुलोड ग्राम पंचायत के रहने वाले मंगलराम बताते हैं कि उनके गांव में 60 घर हैं। उनका गांव घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। वह अपने पांच बच्चों के साथ इस गांव में रहते हैं। उनका गांव लिंक रोड़ से 15 किमी की दूरी पर स्थित है। जिसे माओवादियों कई बार खोद चुके हैं।

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English summary
Maoist hit villages don’t have toilets, but govt were declared open defecation free in Chhattisgarh
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