तेलंगाना में हार से खतरे में कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन, विरोध में उतरे कई नेता
नई दिल्ली। तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले टीडीपी के साथ गठबंधन को लेकर अब कांग्रेस के भीतर असंतोष की स्थिति बन गई है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है चुनाव में खराब प्रदर्शन। इसलिए कुछ कांग्रेसी नेता चाहते हैं कि पार्टी टीडीपी के साथ गंठबंधन को खत्म कर दे। इसके साथ-साथ पार्टी के कुछ नेता यह भी तर्क दे रहे हैं कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव में टीडीपी के साथ गठबंधन से पार्टी को नुकसान हुआ है, अन्यथा कांग्रेस को और भी सीटें मिल सकती थी।

119 में से 88 पर टीआरएस ने हासिल की जीत
119 सीटों वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव में तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 88 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि कांग्रेस ने 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन खाते में केवल 19 ही आए। जबकि कांग्रेस गठबंधन वाली टीडीपी मात्र दो सीटों पर चुनाव जीत पाई है। जबकि गठबंधन की अन्य पार्टी जिसमें तेलंगाना जन समिति (TJS) और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई है।

पार्टी के कुछ नेताओं का मानना, गठबंधन से पहुंचा नुकसान
एक कांग्रेस नेता ने नाम न छापने के शर्त पर कहा कि उनकी पार्टी के भीतर कई लोग मानते हैं कि टीडीपी के साथ गठबंधन ने अच्छा से ज्यादा नुकसान किया है। उन्होंने शुरुआत में कहा था कि टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू का अभियान (आंध्र) के निवासियों के वोटों को आकर्षित करने में मदद करेगा। कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद विजय शांति ने कहा कि तेलंगाना में उनकी पार्टी को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अभी भी तेलंगाना के लोगों में नायडू के प्रति विरोधी की भावना है। उन्होंने कहा कि टीडीपी के साथ गठबंधन हाई कमान का फैसला था, अब हमें सावधान रहना चाहिए।

गठबंधन पर फैसला पार्टी हाई कमान करेगी
कांग्रेस के तेलंगाना प्रचार अभियान समिति के चेयरमैन, मल्ली भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि यह गठबंधन केवल विधानसभा चुनावों के लिए किया गया था, इसलिए फिलहाल मैं यह नही कह सकता कि आगे भी यह जारी रहेगा या नहीं। यह हाई कमान ही तय करेगा कि आगे क्या करना है। वहीं टीजेएस के अध्यक्ष एम कोडदरम ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पार्टी इस बारे में फैसला करेगी कि गठबंधन पर आगे जारी रखना है या नहीं।












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