जब "मूक पीएम" कहे जाने पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने दिया था करारा जवाब, मैं किसी से नहीं डरता था!
Manmohan Singh: देश के आर्थिक परिवर्तन में अहम भूमिका निभाने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार रात निधन हो गया। 92 साल की उम्र में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मनमोहन सिंह ने अपनी अंतिम सांस ली। अपने शांत स्वभाव और बौद्धिक कौशल के लिए जाने जाने वाले मनमोहन सिंह ने भारत के ऐतिहासिक आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
देश के भाग्य को आकार देने में उनकी भूमिका खासतौर पर देश के सबसे चुनौतीपूर्ण आर्थिक संकट के समय आई मंदी से देश को उबारने में डॉ मनमोहन सिंह का नाम भारत के इतिहास में दर्ज हो चुका है। डाॅक्टर मनमोहन सिंह को अलोचकों द्वारा "मूक पीएम" की संज्ञा दी जाती थी जिसका करारा जवाब मनमोहन सिंह ने अपनी नेतृत्व शैली में एक बार दिया था।

"मूक पीएम" कहे जाने पर मनमोहन सिंह ने दिया था ये जवाब
"मूक पीएम" पर दिसंबर 2018 में मनमोहन सिंह ने अपनी बुक "द चेजिंग इंडिया" के लॉन्च के मौके पर प्रतिक्रिया दी थी। तब उन्होंने कहा था "जो लोग कहते हैं कि मैं एक मूक प्रधानमंत्री था, मुझे लगता है कि मेरी ये पुस्तकें बोलती हैं। मैं अपने लिए निश्चित रूप से कहना चाहूंगा कि मैं ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था जो प्रेस और मीडिया से बात करने से डरता था। मैं नियमित रूप से प्रेस वालों से मिलता था और मैंने अपने कार्यकाल में जो भी विदेश यात्रा की उसके बाद मैंने विमान में या तुरंत बाद प्रेस कान्फ्रेंस की। उन्होंने बताया था कि मैंने बड़ी संख्या में प्रेस कान्फ्रेंस के नतीजों का भी वर्णन भी अपनी किताब में किया है।"
मनमोहन सिंह ने मनरेगा की पहल की
मनमोहन सिंह एक ऐसा राजनेता थे जिन्हें राजनीतिक सीमाओं से परे सम्मान प्राप्त था। प्रधानमंत्री का पद संभालते हुए उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते जैसी ऐतिहासिक पहल की। आधुनिक भारत के आर्थिक सुधारों के निर्माता के रूप में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहेगा।
मनमोहन सिंह ने देश को 'लाइसेंस राज' से दूर किया
अपने कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह ने सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को गहराई से बदल दिया। वे 1991 में आर्थिक उदारीकरण के अगुआ बने और उन्होंने देश को 'लाइसेंस राज' से दूर किया और इसे वैश्विक बाजारों के लिए खोल दिया। वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में परिवर्तन की यह अवधि भारत के भविष्य के आर्थिक विकास और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकरण के लिए आधार तैयार किया।
दूरदर्शी नेता मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह, अपने मितभाषी स्वभाव के लिए कुछ लोगों द्वारा आलोचना किए जाने के बावजूद, अपनी नीतियों और उपलब्धियों के मुखर समर्थक थे। उन्होंने नेतृत्व के प्रति अपने दृष्टिकोण का बचाव किया, मीडिया और जनता के साथ अपने जुड़ाव पर जोर दिया।
2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में सिंह का कार्यकाल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते जैसी महत्वपूर्ण पहलों से चिह्नित था। ये पहल, अन्य के अलावा, उस विरासत का हिस्सा हैं जिसने भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को आकार दिया।
मनमोहन सिंह ने अपने बारे में बोली थी ये बात
2014 के लोकसभा चुनावों के बाद अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा करने के बावजूद मनमोहन सिंह भारतीय राजनीति में खासकर बाद की सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करने में।एक महत्वपूर्ण आवाज़ बने रहे। वे भारत के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में खुलकर बोलते रहे हैं, जिसमें बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और लोकतंत्र पर उनका प्रभाव शामिल है। सिंह ने एक बार कहा था कि इतिहासकार उनके योगदान को उनके समकालीनों की तुलना में अधिक अनुकूल रूप से देखेंगे।












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