Manipur: म्यांमार के साथ 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' रोकने में क्या दिक्कत है?
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने केंद्र सरकार से म्यांमार के साथ 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' (free movement regime) स्थाई तौर पर रद्द करने की मांग की है। इस साल 3 मई से जब से मणिपुर अशांत हुआ है, म्यांमार के साथ 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते रहे हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने राजधानी इंफाल में कहा है कि 'हमारी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से (म्यांमार के साथ) मुक्त आवाजाही व्यवस्था रद्द करने का अनुरोध किया है। सुरक्षा बलों ने सीमा की सुरक्षा ठीक से नहीं की है, उन्हें जीरो पॉइंट पर तैनात किया जाना चाहिए, वे भारतीय क्षेत्र में 14-15 किलोमीटर अंदर सीमा की रखवाली करते पाए गए......'

मणिपुर हिंसा में बार-बार बाहरी ताकतों पर जा रहा है शक
दरअसल, जब से मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की है, यह आशंका जताई जाती रही है कि इसमें विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। यह चिंता और तब बढ़ जाती है, जब अभी म्यांमार में चीन की पिछलग्गू सैन्य सरकार है। क्योंकि, राज्य में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के पास जो अत्याधनुक हथियार मौजूद हैं, उसके बारे में कहा जाता है कि वे सिर्फ सुरक्षा बलों से लूटे हुए ही नहीं हैं। यही वजह है कि अवैध घुसपैठियों को लेकर वहां की आम जनता भी बहुत चिंतित नजर आती है।
देश के दुश्मनों ने 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' को बनाया हथियार
जहां तक 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' की बात है तो यह भारत और म्यांमार सीमा की दोनों ओर के 16-16 किलोमीटर के इलाके के लिए है। इसके लिए 2018 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था। इस व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोग एक-दूसरे के इस क्षेत्र तक बिना किसी दस्तावेज के आ-जा सकते हैं। यह व्यवस्था दोनों ओर के आम नागरिकों के हितों के लिए शुरू की गई थी,क्योंकि इनके नाते-रिश्तेदार दोनों ओर हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की बातों से लग रहा है कि देश के दुश्मनों ने इसे ही अपना हथियार बना लिया है।
'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' बनी नासूर?
सीएम बीरेन सिंह का कहना है कि उनकी सरकार 'अवैध घुसपैठियों' से निपटना जारी रखेगी और साथ ही उन्होंने भारत-म्यांमार सीमा पर पूर्ण रूप से बाड़बंदी किए जाने की भी वकालत की है। राज्य सरकार का कहना है कि 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' की वजह से अवैध घुसपैठ नहीं रुक पा रही है। अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण और निगरानी के लिए असम राइफल्स की तैनाती की गई है।
60 किलोमीटर की सीमा पर फेंसिंग की तैयारी!
मुख्यमंत्री के अनुसार, 'हमारी प्राथमिकता म्यांमार से होने वाली अवैध घुसपैठ रोकना है। इसके लिए हमें सीमा पर तत्काल बाड़बंदी की आवश्यकता है। मुझे बताया गया है कि गृह मंत्रालय ने बीआरओ को भारत-म्यांमार के बीच 60 किलोमीटर तक की सीमा पर बाड़ लगाने के लिए वर्क ऑर्डर भी जारी किए हैं।' म्यांमार में घरेलू अशांति को देखते हुए भारत ने पिछले साल सितंबर में अस्थायी तौर पर एफएमआर समझौते को निलंबित किया था, लेकिन फेंसिंग नहीं होने की वजह से घुसपैठिए चोर दरवाजे (porosity-संरंध्रता) का इस्तेमाल करते हैं।
मणिपुर विवाद में घुसपैठ का रोल!
मणिपुर में मौजूदा जातीय विवाद मूल रूप से मैतेई और कुकी समुदायों की वजह से है और इसमें म्यांमार के रास्ते अवैध कुकी चिन लोगों की घुसपैठ बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। मैतेई समुदाय का आरोप रहा है कि अवैध घुसपैठियों की वजह से राज्य में समस्या पैदा हुई है, जबकि कुकी समुदाय का आरोप है कि राज्य सरकार इसके नाम पर 'जातीय संहार' को बढ़ावा दे रही है।
भारत-म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा
तथ्य ये है कि बाड़ की गैरमौजूदगी और दुर्गम क्षेत्र होने की वजह से म्यांमार स्थित भारतीय उग्रवादी संगठनों ने अपने भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए हमेशा इसका फायदा उठाया है। भारत-म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है।
इसमें अकेले मणिपुर में यह 390 किलोीटर के करीब लंबी है। इनमें से राज्य के टेंग्नौपाल जिले में मात्र 5.6 किलोमीटर में ही अभी तक बाड़ लगाई जा सकी है। इससे लगता है कि 'मुक्त आवाजाही व्यवस्था' स्थायी तौर पर रोकना तात्कालिक उपाय हो सकता है। घुसपैठ पूरी तरह से रोकने के लिए मजबूत फेंसिंग की आवश्यकता है।












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