Manipur Violence: CM बीरेन सिंह की सरकार से सहयोगी दल ने वापस लिया समर्थन, मंत्री बोले- कोई फर्क नहीं पड़ेगा

Manipur Violence: पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को तगड़ा झटका लगा है। भाजपा नीत एनडीए की सहयोगी पार्टी ने CM बीरेन सिंह की सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है।

मणिपुर में एनडीए की सहयोगी कुकी पीपुल्स एलायंस (केपीए) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक केपीए अध्यक्ष टोंगमांग हाओकिप ने मणिपुर के राज्यपाल अनुसुइया उइके को पत्र लिखा है।

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मणिपुर सरकार से कूकी पीपुल्स अलायंस ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। मणिपुर सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सपन रंजन ने कहा कि हमे बताया गया है कि उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया है। मुझे लगता है कि केपीए के पास विधानसभा में दो विधायक हैं। मुझे नहीं लगता है कि इससे सरकार पर कोई असर पड़ेगा क्योंकि हमारे पास पूर्ण बहुमत है।

संवेदनशील हालात के बीच KPA अध्यक्ष टोंगमांग हाओकिप ने गवर्नर को लेटर लिखकर भाजपा के साथ संबंध तोड़ने के पार्टी के फैसले से अवगत कराया।उनका यह कदम मणिपुर में जातीय हिंसा के बीच सामने आया है।

बता दें कि जिसने पिछले तीन महीनों से पूर्वोत्तर भारतीय राज्य मणिपुर हिंसा की खबरों के कारण चर्चा में है। 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इंडिया टुडे ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बताया, मणिपुर सरकार को केपीए का समर्थन नहीं है। इसे शून्य माना जा सकता है।

हाओकिप ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा, "मौजूदा टकराव पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, KPA ने फैसला लिया है कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली मणिपुर की मौजूदा सरकार के लिए निरंतर समर्थन अब निरर्थक है।"

गवर्नर को ई-मेल, समर्थन वापसी की पुष्टि

समाचार एजेंसी ANI ने भी KPA के फैसले की पुष्टि करते हुए लेटर जारी किया। इसमें बताया गया कि कुकी पीपुल्स अलायंस (KPA) के महासचिव डब्ल्यूएल हैंगशिंग ने मणिपुर के राज्यपाल को समर्थन वापस लेने वाला पत्र ईमेल करने की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि दो विधायकों, सैकुल से किम्नेओ हाओकिप हैंगशिंग और सिंघाट से चिनलुनथांग के साथ, केपीए की 60 सदस्यीय मणिपुर सदन में मामूली उपस्थिति है।

मणिपुर में 32 विधायकों वाली पार्टी- भाजपा के पास सबसे अधिक सीटें हैं। इसके अतिरिक्त, पार्टी को पांच एनपीएफ विधायकों और तीन स्वतंत्र विधायकों का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, विपक्ष में कई दलों के प्रतिनिधि हैं। एनपीपी के पास सात सीटें हैं। कांग्रेस के पास पांच और जेडीयू के पास छह सीटें हैं।

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