Manipur Unrest से आहत ओलंपियन मीराबाई चानू समेत कई एथलीट, शांति बहाली न होने पर मेडल लौटाने की चेतावनी
Manipur Unrest से आहत ओलंपियन मीराबाई चानू, अन्य स्टार एथलीटों ने चेतावनी दी है कि अगर मणिपुर में शांति बहाल नहीं हुई तो वे पदक लौटा देंगे।

Manipur Unrest पूर्वोत्तर में रहने वाले खिलाड़ियों के साथ आम नागरिकों को भी चिंतित कर रहा है। हालात की गंभीरता को भांपते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। शाह ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
शाह के तीन दिवसीय मणिपुर दौरे के दौरान रिपोर्ट्स के अनुसार ओलंपियन मीराबाई चानू समेत कई स्टार एथलीटों ने कहा, शांति बहाली न होने पर वे मेडल लौटा देंगे। बता दें कि पूर्वोत्तर के कई एथलीट हालात पर चिंता जता चुके हैं।
मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन में चेतावनी दी कि अगर संकटग्रस्त राज्य में शांति और सामान्य स्थिति तुरंत बहाल नहीं की गई तो वे अपने पदक वापस कर देंगे।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में मुक्केबाज एल सरिता देवी, पद्म पुरस्कार विजेता भारोत्तोलक कुंजारानी देवी और पूर्व भारतीय महिला फुटबॉल कप्तान ओइनम बेमबेम देवी शामिल हैं। अधिकांश एथलीट मेइती समुदाय के हैं।
एथलीटों ने NH-2 (इम्फाल-दीमापुर) पर नाकाबंदी को हटाने के लिए कदम उठाने की मांग की, जिसने मणिपुर को वस्तुओं के परिवहन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि राजमार्ग पर नाकाबंदी के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं।
गौरतलब है कि पिछले 27 दिनों से Manipur Unrest के कारण सुर्खियों में है। गृह मंत्री ने शांति बहाल करने के केंद्र के प्रयासों के तहत मेइती और कुकी दोनों समुदायों के नेताओं, राजनीतिक दलों और अन्य लोगों के साथ बैठकें कीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 मई के बाद अब तक कम से कम 74 लोगों की मौत हो गई है। 35,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर दंगा भड़क गया था।
मणिपुर के कई हिस्सों में कर्फ्यू लागू है, जबकि मोबाइल और ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं को राज्य सरकार ने 3 मई से निलंबित रखा है। उसके बाद से कुकी प्रदर्शनकारियों ने एनएच-2 (इम्फाल-दीमापुर) को अवरुद्ध कर दिया है।
सेना और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों ने दंगों को नियंत्रित किया। हालांकि, तब से छिटपुट हिंसा के कारण हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। मेडल वापसी की चेतावनी के बीच पूर्वोत्तर की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।












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