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Manipur president rule: पिछले ढ़ाई सालों में कैसे बदले मणिपुर के हालात? अब तक क्या-क्या हुआ विस्तार से पढ़िए

Manipur president rule: शुक्रवार, 4 अप्रैल को सुबह करीब चार बजे राज्यसभा (Rajya Sabha) में जब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा की गई तब एक बार फिर से ये राज्य देश के लिए चर्चा का विषय बन गया। यूं तो मणिपुर प्रकृति की बेशुमार खूबसूरती समेटे हुए है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों में यहां के हालात ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खिंचा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने राज्यसभा में मणिपुर से संबंधित प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन में पेश किया था। इसके बाद उच्च सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।

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राज्य सीएम बीरेन सिंह ने क्यों दिया इस्तिफा? मणिपुर पर देश की सियासत ने कैसे अपना खेल खेला? इस लेख में मणिपुर में अब तक क्या-क्या हुआ पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझिए।

Manipur president rule: प्रमुख घटनाओं पर एक नजर...

पिछले डेढ़ सालों से भारत का ये खुबसूरत राज्य जातिय संघर्ष की भेंट चढ़ा हुआ है। राज्य में कुकी और मैतैई दो समुदायों के बीच हिंसा चली आ रही है।

  • 7 नवंबर 2022: मणिपुर सरकार ने चुराचांदपुर-खौपुम संरक्षित वन क्षेत्र में 38 गांवों को अतिक्रमणकारी घोषित किया, जिससे आदिवासी समुदायों में असंतोष बढ़ा। ​
  • फरवरी 2023: सरकार ने चुराचांदपुर, कांगपोकपी और टेंग्नौपाल जिलों में आदिवासियों को अतिक्रमणकारी बताते हुए बेदखली अभियान शुरू किया। ​
  • मार्च 2023: मणिपुर सरकार ने कुकी उग्रवादी समूहों के साथ शांति समझौता समाप्त करने का निर्णय लिया। ​
  • 20 अप्रैल 2023: मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया। ​
  • 28 अप्रैल 2023: चुराचांदपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की, जिसके परिणामस्वरूप धारा 144 लागू की गई और इंटरनेट सेवाएँ पांच दिनों के लिए निलंबित रहीं। ​
  • 3 मई 2023: अखिल आदिवासी छात्र संघ मणिपुर (ATSUM) द्वारा "आदिवासी एकजुटता मार्च" आयोजित किया गया, जिसमें मैतेई समुदाय को ST दर्जा देने के विरोध में प्रदर्शन हुआ। इस दौरान मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी, जिससे कई मौतें और हजारों लोग विस्थापित हुए। ​
  • 4 मई 2023: सरकार ने हिंसा पर काबू पाने के लिए देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया। ​
  • जून 2023: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर का दौरा किया और विभिन्न समुदायों के नेताओं से मुलाकात की, शांति बहाल करने के प्रयास किए। ​
  • जुलाई 2023: कुकी महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो सामने आए जिससे देशभर में आक्रोश और प्रदर्शन हुए। ​
  • 18 जुलाई 2023: स्थानीय लोगों और रैपिड एक्शन फोर्स के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें 19 महिलाएँ घायल हुईं और एक पुलिस वाहन को आग लगा दी गई। ​
  • नवंबर 2023: हथियारबंद लोगों ने राहत शिविर पर हमला किया, जिसके बाद 8 मैतेई निवासियों के शव मिले। ​
  • नवंबर 2024: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मणिपुर में हुई हत्याओं के संबंध में तीन नए मामले दर्ज किए। ​
  • 5 दिसंबर 2024: केंद्र सरकार ने मणिपुर हिंसा की जांच कर रही आयोग की समय सीमा बढ़ाकर मई 2025 तक कर दी। ​
  • 31 दिसंबर 2024: मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में हुई जातीय हिंसा के लिए माफी मांगी और शांति की अपील की। ​
  • 9 फरवरी 2025: मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया। ​
  • 13 फरवरी 2025: भारत सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया, जिससे राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र के नियंत्रण में आ गया। ​

Manipur president rule: मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता क्यों?

मणिपुर जब कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा भड़की तो सरकार इसे रोकने में असफल रही। यहां पर भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन की सरकार है। गौर करने वाली बात ये है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार होने के बाद भी राज्य में हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका। इसे लेकर सरकार के नेतृत्व पर सवाल खड़े होने लगे।

इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर का दौरा किया और दोनों पक्षों से राज्य में शांति बनाए रखने की अपील की बावजूद इसके राज्य में हालात खराब होते रहे। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसा को रोकने और समझौता कराने के लिए सरकार की ओर कोई प्रयास नहीं किया गया। केंद्र भी इस स्थिति पर लंबे समय तक मौन साधे रही जिसने परिस्थितियों को बढ़ाने में मदद की।

मणिपुर के गंभीर हालात पर दुनिया की नजरें अभी भी टिकी हुई हैं लेकिन देश के भीतर इस पर जिस तरह से राजनीति हुई उससे कई सवाल खड़े हुए। केंद्र सरकार राज्य में फैली अशांति पर मौन साधे हुए था और विपक्ष इस पुरे मामले में अपनी राजनीतिक रोटी सेंकता रहा।

Manipur president rule: राज्य में बीरेन सिंह पर अविश्वास

राजनीतिक विश्लेषणों का कहना है कि राज्य में पार्टी में ही बीरेन सिंह को लेकर काफी मतभेद है और विधायक इनको लेकर बंटे हुए हैं। कई बार दिल्ली हाईकमान के साथ उनकी बातचीत भी हुई, हालांकि इसका कोई हल नहीं निकल सका।

स्थानीय विशेषज्ञ कहते हैं कि मुख्यमंत्री के तौर पर बीरेने सिंह ने राज्य में फैली अशांति को लेकर कुछ नहीं किया। उन्होंने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया इससे स्थानीय लोगों के मन में उनके प्रति बेहद अविश्वास व्याप्त हो गया। मैतेई लोगों में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को लेकर बहुत नाराजगी है उनको इस बात का गुस्सा है कि विधानसभा 60 में से 40 विधायक मैतेई समुदाय के हैं लेकिन इन्होंने यहां के हालात और समस्या प्रधानमंत्री तक ठीक से नहीं पहुंचाई।

दरअसल, कुकी लोग बीरेन सिंह को लेकर आसक्त हैं और मैतई समाज राज्य की कमान किसी कुकी के हाथों में नहीं देना चाहतें हैं। अभी तक राज्य में ऐसा कोई चेहरा नहीं है जिस पर दोनों गुटों की सहमति बनती नजर आई हो। अमित शाह का दौरा भी इस मसले का हल नहीं निकाल सका।

इस्तीफे से सवालों के घेरे में BJP...

ऐसा लगता है कि राज्य में बीजेपी ने अपनी साख बचाने के लिए बीरेन सिंह का इस्तीफा लिया। देखिए..अगर राज्य में विधानसभा का सत्र शुरू होता तो सबसे पहले विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव रखता और ऐसे में सरकार गिर जाती। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीरेन सिंह के इस्तिफे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने (BJP) स्थिति को भांप लिया था वो जानते थे कि उनकी सरकार गिर जाएगी इसलिए इस्तीफे का खेल खेला।

Manipur president rule: हिमंत बिस्वा की मौजूदगी पर सवाल

राज्य में दोनों समुदायों के बीच सुलह कराने और राज्य शांति बहाल की जिम्मेदारी हिमंत बिस्वा सरमा को दी गई है। हालांकि, मणिपुर में दोनों समुदाय उनकी उपस्थिति से खुश नहीं है और इस पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो यहां का नहीं है उसे इस हालात के बारे में क्या पता होगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अगर सरकार वाकई शांति चाहती है तो उसे किसी स्थानिय चेहरे को तवज्जो देनी चाहिए

वहीं इस पर केंद्रीय नेतृत्व का कहना है कि हिमंत बिस्वा नार्थ-ईस्ट के बड़े नेता हैं और पूर्वोत्तर के नेता उनकी बात सुनते हैं।

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