Manipur Crisis: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बरकरार या बनेगी सरकार? केंद्र के पास क्या है चुनौती,समझें पूरा खेल
Manipur Political Crisis: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राज्य में फिर से चुनी हुई सरकार बनाने के लिए लगातार बातचीत चल रही है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी को एक साल पूरा कर लेगा और कानून के मुताबिक इसे एक साल से ज्यादा बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन जरूरी होगा।
इसी वजह से केंद्र सरकार सरकार गठन के सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। फिलहाल मणिपुर विधानसभा निलंबित स्थिति में है। आइए जानते हैं सरकार गठन का केंद्र के सामने क्या चुनौतियां हैं...

अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति शासन को आगे बढ़ाना सरकार की पहली पसंद नहीं है। सरकार चाहती है कि मेइती और कुकी-जो समुदाय के विधायक आपसी सहमति से राज्य में सरकार बनाएं।
विस्थापित लोगों की वापसी का क्या है रास्ता?
पिछले एक हफ्ते में मणिपुर की स्थिति को लेकर दो बड़ी बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में गृह मंत्री अमित शाह और गृह सचिव गोविंद मोहन शामिल रहे। 2 जनवरी को हुई बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला भी मौजूद थे। इनमें यह चर्चा हुई कि राष्ट्रपति शासन जारी रखा जाए या सरकार बहाल की जाए। बैठकों में हिंसा के कारण घर छोड़ने वाले लोगों की वापसी और दोनों समुदायों के लोगों की सुरक्षित आवाजाही पर भी बात हुई।
गौरतलब है कि 3 मई 2023 को मणिपुर में शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक करीब 250 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 60 हजार लोग अपने घरों से विस्थापित हुए थे। सरकारी आंकड़ों की मानें तो, पिछले एक महीने में करीब 9,000 विस्थापित लोग राहत शिविरों से अपने घरों में लौट चुके हैं, जहां वे पिछले दो सालों से रह रहे थे।
BJP विधायकों की बैठक संभव
सूत्रों के अनुसार, 14 जनवरी को मणिपुर के बीजेपी विधायक पार्टी के वरिष्ठ नेता बी. एल. संतोष से गुवाहाटी में मिल सकते हैं। इस बैठक में सरकार गठन को लेकर अहम फैसले हो सकते हैं। अगर राष्ट्रपति शासन बढ़ाना पड़ा तो संसद में संविधान संशोधन लाना होगा। लेकिन फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि राज्य में सरकार बनाई जाए।
अधिकतम कितने साल तक रह जा सकता है राष्ट्रपति शासन
भारत में किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन अधिकतम 3 साल तक रह सकता है, लेकिन यह अपने-आप में आसान प्रक्रिया नहीं होती। संविधान इसके लिए सख्त शर्तें तय करता है। राष्ट्रपति शासन पहली बार 6 महीने के लिए लगाया जाता है। हर 6 महीने में संसद की मंजूरी से इसे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अधिकतम 1 साल तक।
1 साल के बाद राष्ट्रपति शासन तभी बढ़ सकता है जब देश या राज्य में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो या चुनाव आयोग यह प्रमाणित करे कि राज्य में चुनाव कराना संभव नहीं है। इन शर्तों के साथ राष्ट्रपति शासन को हर 6 महीने में मंजूरी लेते हुए अधिकतम 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है। 1 साल के बाद राष्ट्रपति शासन बढ़ाना अपवाद माना जाता है, सामान्य नियम नहीं। सुप्रीम कोर्ट भी लंबे राष्ट्रपति शासन को लोकतंत्र के खिलाफ मानता है।
सरकार गठन में केंद्र के सामने क्या है चुनौती
हालांकि सरकार गठन की कोशिशों के बीच कुकी-जो समुदाय के नागरिक संगठनों ने इसका विरोध किया है। वे अलग प्रशासन की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं मेइती समुदाय के संगठनों ने राज्य की सीमाओं में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध किया है। 6 जनवरी को कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने 30 दिसंबर को पारित अपने प्रस्ताव को दोहराते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कुकी-जो लोग मणिपुर में सरकार गठन की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते।
विधानसभा का गणित समझिए
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं, जिनमें से सात कुकी-जो समुदाय से आते हैं। कुल मिलाकर विधानसभा में कुकी-जो समुदाय के 10 विधायक हैं। ऐसे में सरकार गठन के लिए राजनीतिक सहमति और सामाजिक संतुलन केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों पर है, जिनसे तय होगा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म होगा या नहीं।












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