मणिपुर के सबसे पुराने विद्रोही संगठन UNLF ने क्यों डाले हथियार, क्या म्यांमार ने की मदद?
मणिपुर जातीय हिंसा की वजह से पिछले सात महीनों से अशांत है। लेकिन, बुधवार को राहत की एक ऐसी खबर आई, जिसने इस अशांत राज्य को लेकर देश में खुशहाली की एक नई उम्मीद पैदा की है।
मणिपुर के सबसे पुराने विद्रोही संगठन मैतई विद्रोहियों के गुट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) ने केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

मणिपुर के सबसे पुराने विद्रोही संगठन का दिल कैसे पिघला?
सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ है कि 24 नवंबर, 1964 से सक्रिय यूएनएलएफ का इस तरह से हृदय परिवर्तन हुआ है। इस विद्रोही गुट ने 1990 में हथियार उठा लिए थे। यह संगठन मणिपुर को अलग करने की मांग को लेकर बनाया गया था।
म्यांमार में टूट चुकी है उग्रवादी संगठनों की कमर-रिपोर्ट
तथ्य यह है कि दशकों से मणिपुर में सक्रिय विद्रोही संगठनों को पड़ोसी देश म्यांमार में फलने-फूलने का मौका मिलता रहा है। लेकिन, टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत में सक्रिय इन उग्रवादी संगठनों की म्यांमार में कमर टूट चुकी है।
एक उग्रवादी नेता को निपटनाने से साफ हुआ समझौते का रास्ता-रिपोर्ट
यूएनएलएफ और सरकार के बीच जो समझौता हुआ है और इसके उग्रवादियों ने जिस तरह से हथियार डाले हैं, उसके पीछे भी यही बताया जा रहा है। इसके मुताबिक हाल ही में एक वांटेड विद्रोही नेता मोइरांगथेम उत्तम उर्फ तम्बा को निपटाने की वजह से ही इस शांति समझौते की राह निकली है।
म्यांमार में निपट चुके हैं उग्रवादियों के कैंप!
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े एक सूत्र का कहना है, 'भारतीय विद्रोही गुटों की अब म्यांमार में रीढ़ टूट चुकी है। इंफाल घाटी स्थित गुटों ने दशकों पहले म्यांमार सेना की लॉजिस्टिक सपोर्ट से इन कैंपों की स्थापना की थी....लेकिन, अब वे खत्म किए जा चुके हैं।'
डोगरा रेजिमेंट पर घातक हमले का मास्टरमाइंड था मोइरांगथेम उत्तम
1994 में यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट का एक नेता अलग हो गया था और उसने कांगलेई यावोल कन्ना लुप (KYKL) नाम का उग्रवादी संगठन बना लिया था। मोइरांगथेम उत्तम इसी गुट का नेता था, जो डोगरा रेजिमेंट पर घातक हमले का मास्टरमाइंड था और एनआईए की वांटेड लिस्ट में था। 2015 में हुए उस उग्रवादी हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे।
23 नवंबर को ही ड्रोन हमले में हुआ उत्तम का खात्मा-रिपोर्ट
जानकारी के मुताबिक उत्तम बीते 23 नवंबर को ही एक ड्रोन हमले में मारा गया है। हालांकि, उसकी मौत किन हालातों में हुई, यह तो साफ नहीं है। लेकिन, इसको लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। संभावना है कि उसके मारे जाने में म्यांमार सेना की भागीदारी हो सकती है और शायद उसके लिए भारतीय सुरक्षा बलों ने भी वांछित सहायता उपलब्ध करवाई हो।
सुरक्षा एजेंसियों को घाटी को लेकर बढ़ी नई उम्मीद
यूएनएलएफ में करीब 400-500 सशस्त्र विद्रोही शामिल रहे हैं, जिनमें से कई ने म्यांमार को अपना आधार बनाया रहा है। अच्छी बात यह है कि इंफाल घाटी के सबसे पुराने उग्रवादी संगठन ही सरकार के साथ बातचीत की मेज पर आने वाला पहला संगठन बना है।
सुरक्षा एजेंसियों का भरोसा बढ़ा है कि यूएनएलएफ के कदम से घाटी में मौजूद अन्य मैतई विद्रोही गुटों को भी वास्तविकता का अंदाजा लगेगा और वह हथियार छोड़कर धीरे-धीरे शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
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