Manipur Violence: 'बेरहमी से पीटा फिर बिजली के झटके दिए गए', पीड़ित बीजेपी MLA वाल्टे से मिलीं स्वाति मालीवाल
Manipur News Update: मणिपुर में 4 मई को हिंसा के बीच इंफाल में बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर जानलेवा हमला हुआ। जिसमें वो पैरालिसिस अटैक से ग्रसित हो गए। हालांकि, दिल्ली में अब उनकी हालत में सुधार है।
Manipur News Update: मणिपुर की जातीय हिंसा के बीच प्रभावित राजधानी इंफाल में भीड़ द्वारा जानलेवा हमले में घायल बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे अब खतरे से बाहर हैं। दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। ऐसे में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल, पीड़ित बीजेपी विधायक का हाल जानने पहुंची। मालवीय को देखकर विधायक की पत्नी की आंखों में आंसू छलक उठे। उन्होंने बताया कि अभी तक बीजेपी का कोई सीनियर नेता नहीं मिला और न किसी ने मदद की।
वहीं, मालीवाल ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर विधायक वुंगजागिन वाल्टे के लिए मदद मांगी है, जिन पर मई की शुरुआत में इंफाल में भीड़ ने बेरहमी से हमला किया था। मालीवाल ने पत्र की एक प्रति और वाल्टे के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए हिंदी में ट्वीट किया। मालीवाल ने ट्वीट में लिखा...

मालीवाल ने लिखा कि मणिपुर के बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर बेरहमी से हमला किया गया। इन्हें भीड़ ने बहुत मारा। बिजली के झटके दिए गए, जिससे वह अधमरी अवस्था तक पहुंच गए। उन्हें पैरालिसिस हो गया। दिल्ली में लाखों रुपये खर्च इलाज चल रहा है। इतने दर्द में भी वो मणिपुर की भलाई के बारे में सोच रहे है। पर इनसे बीजेपी का कोई सीनियर नेता नहीं मिला और न किसी ने मदद की। मैंने जेपी नड्डा को मदद के लिए पत्र लिखा है।
4 मई को विधायक पर हुआ था हमला
गौरतलब है कि 4 मई को वाल्टे मुख्यमंत्री बीरेन सिंह द्वारा बुलाई गई एक बैठक के बाद घर जा रहे थे, तभी इंफाल में भीड़ ने उन पर बेरहमी से हमला किया, क्योंकि राज्य में हिंसा भड़क गई थी। वाल्टे के बारे में कुछ राष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्ट पर सफाई देते हुए सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री सपम रंजन ने कहा कि विधायक के अस्पताल में भर्ती होने के दिन से ही राज्य सरकार उनकी अच्छी देखभाल कर रही है।
क्या है हिंसा की वजह?
आपको बता दें कि मणिपुर में हिंसा 3 मई को भड़की। वजह यह रही कि मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किए जाने के बाद हिंसा भड़की थी। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।












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