सुप्रीम कोर्ट के 6 जज जाएंगे मणिपुर, दौरे से हिंसा पीड़ितों को राहत की उम्मीद, रिलीफ कैंपों का लेंगे जायजा
Manipur News: सुप्रीम कोर्ट के 6 जज 22 मार्च को मणिपुर का दौरा करेंगे। इस दौरे से हिंसा पीड़ितों को राहत की उम्मीद जगी है। मैतई और कुकी समाज के बीच बीते 2 सालों में हुई हिंसा में दोनों तरफ से सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। कई लोग ऐसे हैं जो राहत शिविरों में रह रहे हैं। इन रिलीफ कैंपों का भी जायजा लिया जाएगा और उनकी सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के इन 6 जजों में न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह शामिल है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य हिंसा पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान करना और उनकी मानवीय आवश्यकताओं का आकलन करना है। इस दौरान वो आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) को आवश्यक राहत सामग्री भी वितरित करेंगे। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति गवई राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। जबकि न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह मणिपुर से हैं।

बता दे कि यात्रा के दौरान न्यायमूर्ति गवई मणिपुर के सभी जिलों में कानूनी सेवा शिविरों और चिकित्सा शिविरों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन करेंगे, इसके अलावा पूर्वी इम्फाल, पश्चिमी इम्फाल और उखरूल जिलों में नए कानूनी सहायता क्लीनिकों का भी उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि मणिपुर हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और 50,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए। कई लोग ऐसे भी है जो राहत शिविरों में शरण लेने के लिए अभी भी मजबूर हैं।
NALSA और MASLSA ने मणिपुर हिंसा में हुए जातीय संकट के दौरान कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए हाथ मिलाया है। MASLSA ने राहत शिविरों में 273 विशेष कानूनी सहायता क्लीनिक भी स्थापित किए है। जिससे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को सरकारी लाभ, खोए हुए दस्तावेज और चिकित्सा सहायता प्राप्त करने में सहायता मिली। अब यह हिंसा पीड़ितों के लिए कानूनी सहायता अभियान चलाएगा। NALSA ने कहा है कि वह अपने घरों से विस्थापित लोगों की वापसी और बेहतर ज़िंदगी के लिए प्रयास करता रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह दल दंगा पीड़ितों की नष्ट या खोई हुई संपत्तियों और निजी दस्तावेजों के समाधान के लिए भी उपाय करेगा.
NALSA क्या है?
NALSA (National Legal Services Authority) भारत की एक न्यायिक संस्था है। इसका गठन 1995 में "Legal Services Authorities Act, 1987" के तहत किया गया था। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसका मुख्य उद्देश्य रीबों, पिछड़े वर्गों, महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को न्याय दिलाने में सहायता करना है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) NALSA के पदेन (ex-officio) कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।
MASLSA क्या है?
MASLSA का पूरा नाम Manipur State Legal Services Authority (मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) है। यह National Legal Services Authority (NALSA) के अधीन कार्य करता है और मणिपुर राज्य में कानूनी सहायता और सेवाएँ प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।












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