Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मणिपुर का मोइरंग : भारत का पहला आजाद भूभाग, आजाद हिंद फौज के सिपाही बने थे पहले CM

आजादी की लड़ाई में आजाद हिंद फौज का सहयोगी रहा मणिपुर आज हिंसा की आग में जल रहा है। ओलंपिक में भारत को पदक दिलाने वाला मणिपुर आज लहुलुहान हो कर कराह रहा है। इस राज्य की मीरा बाई चानू ने ही टोकियो ओलंपिक में भारत को भारोत्तोलन में रजत पदक दिलाया था। एमसी मैरीकॉम ने 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत को मुक्केबाजी का कांस्य पदक दिलाया था। इस राज्य ने अकेले 13 ओलंपियन पैदा किये। लेकिन आज यह राज्य हिंसा, आगजनी और मौत के कारण चर्चा में है।

मणिपुर लहूलुहान क्यों ?

भारत के नक्शे का यह मुकुटमणि पिछले 56 दिनों से हिंसा की आग में धधक रहा है। 120 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। करीब 50 हजार लोग जान बचाने की गरज से राहत शिविर में शरण लिये हुए हैं। करीब 30 लाख की आबादी वाले इस राज्य के लोगों का जीवन अशांत और असुरक्षित हो गया है। हिंसा पर काबू पाने के लिए राजनीतिक समाधान की कोशिश हो रही है। पहले गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर का दौरा किया और अब राहुल गांधी वहां दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। सुरक्षा के नाम पर जिस विष्णुपुर में राहुल गांधी के काफिले को रोका गया उसका ऐतिहासिक महत्व है। इसी विष्णुपुर जिले में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजी सेना को हराया था।

Manipur Moirang Indias first independent territory soldier of Azad Hind Fauj became the first CM

विष्णुपुर का ऐतिहासिक मोइरंग

मणिपुर की राजधानी इंफाल से करीब 35 किलोमीटर दूर है विष्णुपुर शहर। यह विष्णुपुर जिले का मुख्यालय है। विष्णुपुर जिल में एक गांव है मोइरांग जो अब एक प्रमुख पर्यटक स्थल बन चुका है। यहां की लोकटक ढील विश्व प्रसिद्ध है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय मोइरांग पूर्वोत्तर में आजाद हिंद फौज का मुख्यालय था। मोइरांग के आजाद हिंद फौज मेमोरियल परिसर में आज भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा इतिहास के उस स्वर्णिम काल खंड को जीवंत बना रही है।

मणिपुर- आजाद हिंद फौज से हार गयी थी ब्रिटिश सेना

जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज ने मार्च 1944 में यहां ब्रिटिश सेना पर आक्रमण किया था। मोइरंग में ब्रिटिश सेना और आजाद हिंद फौज के बीच 26 दिनों तक युद्ध हुआ। इस लड़ाई आजाद हिंद फौज की जीत हुई और मोइरंग अंग्रेजी राज से आजाद हो गया। मोइरंग भारत का पहला भूभाग था जो 1944 में ब्रिटेन की दासता से मुक्त हो गया था। आजाद हिंद फौज के कर्नल शौकत मलिक ने 14 अप्रेल 1944 को मोइरांग में भारतीय ध्वज को फहराया था। आजादी की यह लड़ाई मणिपुर के स्थानीय लोगों की मदद से लड़ी गयी था जिसकी वजह से अंग्रेज कमजोर पड़ गये थे। यहां के रहने वाले मोयेरंबम कोइरेंग सिंह आजाद हिंद फौज में सिपाही थे। उनकी वजह से यहां के लोगों ने सुभाष चंद्र बोस के सशस्त्र संघर्ष को समर्थन दिया था।

मणिपुर के मोइरंग में मिली थी भारत को पहली आजादी

आजाद हिंद फौज की मोइरंग विजय एक बहुत बड़ी घटना थी। आजाद हिंद फौज ने मोइरंग के आसपास करीब 3 हजार 800 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र को अंग्रेजों से आजाद करा लिया था। ब्रिटिश सेना हार के बाद पीछे हटती चली गयी थी। इस विजय से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नयी दिशा मिल सकती थी। लेकिन समय दिल्ली में बैठे नेता अहिंसा के रास्ते पर चल कर देश को आजाद करना चाहते थे। सोच में अंतर और वक्त की नाइंसाफी के कारण मोइरंग विजय को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिल सका। आजादी की इस कहानी को बयां करने के लिए मोइरंग में एक म्यूजियम भी है।

बर्मा के रास्ते मणिपुर में घुसी थी नेताजी की सेना

नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी थी। जापान ने दो दिन बाद ही उनकी सरकार को मान्यता दे दी थी। उस समय दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था। फिर नेताजी ने ब्रिटेन और उसके मित्र देशों के खिलाफ युद्ध का एलान कर दिया। मार्च 1944 में आजाद हिद फौज और जापान की सेना बर्मा (म्यांमार) के रास्ते भारत (मणिपुर) में घुसी। आजाद हिंद फौज की मदद के लिए करीब तीन हजार जापानी सैनिक साथ थे। उस समय मोइरंग के आसपास तरीब तीन हजार ब्रिटिश सैनिक मोर्चा संभाले हुए थे। मोइरांग म्यूजियम में मौजूद साक्ष्यों के मुताबिक इस युद्ध में मणिपुर के 54 गांव शामिल थे। मोइरंग और उसके आसपास का 3 हजार 800 वर्ग किलोमीटर का भूभाग भारत का पहला आजाद इलाका था। लेकिन इतिहास में मोइरंग को यह ऐतिहासिक गौरव नहीं मिल सका।

आजाद हिंद फौज के सिपाही बने थे मणिपुर के पहले CM

मणिपुर के रहने वाले मोयेरंबम कोइरेंग सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। वे भारत की पहली आजादी के गवाह थे। मणिपुर के लिए वे शूरवीर थे और उनके प्रति लोगों के मन में सम्मान था। यही मोयेरंबम कोईरेंग सिंह 1963 में मणिपुर के पहले मुख्यमंत्री बने थे। यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि जिस मणिपुर ने भारत की आजादी में इतना बड़ा योगदान दिया आज उसकी पहचान एक अशांत क्षेत्र के रूप में बन गयी है। लेकिन मोइरंग आज भी वह कड़ी है जो मणिपुर के पुराने गौरव को लौटा सकता है। लेकिन इसके लिए सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पहल करनी होगी।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+