लिव-इन में रह रही लड़की को परिजनों ने भेजा पुनर्वास केंद्र, प्रेमी पहुंचा हाईकोर्ट, मिली बड़ी जीत

नई दिल्ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गर्लफ्रेंड से मिलाने को लेकर गुहार लागने वाले एक युवक के हक में फैसला देते हुए कहा है कि अगर दोनों लोग बालिग हैं और मर्जी से साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें रोका नहीं जा सकता है। युवक ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया था कि वो प्रेमिका के साथ लिव-इन में रह रहा था लेकिन कुछ दिन पहले लड़की के परिजनों ने उसे पुनर्वास केंद्र भेज दिया है। ऐसे में उसे गर्लफ्रेंड के साथ रहने की इजाजत दी जाए।

कोर्ट ने माना युवक का पक्ष सही

कोर्ट ने माना युवक का पक्ष सही

युवक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि उसे प्रेमिका से मिलने, शादी करने और साथ रहने की इजाजत दी। कोर्ट ने उस पुनर्वास केंद्र को इसमें युवक की सहायता करने को कहा, जहां अभी 26 साल की युवती रह रही है। कोर्ट ने कहा कि दोनों बालिग हैं और जिंदगी के फैसले ले सकते हैं। अगर दोनों को साथ रहना हो तो उन्हें साथ रहने दिया जाए।

डेढ़ साल पहले हुई मुलाकात

डेढ़ साल पहले हुई मुलाकात

युवक ने कोर्ट को बताया था कि करीब डेढ़ साल पहले वो लड़की से मिला था। दोनों में मुहब्बत हो गई और वो अहमदाबाद में साथ में रहने लगे। दिवाली पर लड़की कानपुर में अपनी बीमार दादी को देखने पहुंची, जहां उसकी अपनी मां से कहासुनी हुई और वो मुंबई आ गई। लड़के ने उसकी खोज की तो पता चला कि वो पुनर्वास केंद्र में है।

प्रेमी को नहीं करने दी गई लड़की से बात

प्रेमी को नहीं करने दी गई लड़की से बात

लड़के ने बताया कि उसने लड़की से संपर्क की कोशिश की तो उसे रोक दिया गया, यहां तक कि उसे फोन पर भी बात नहीं करने दी गई। जिस पर युवक कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट से युवक ने कहाकि वो प्रेमिका से शादी करना चाहता है। इसके बाद कोर्ट ने उसे लड़की से मिलने की इजाजत दी और पुनर्वास केंद्र को इसमें मदद करने को कहा।

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