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'कोयला घोटाले का पैसा शाह को भेजते है',आरोप पर ममता को सुवेंदु अधिकारी का कानूनी नोटिस, 72 घंटे में मांगा सबूत

Mamata Banerjee Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। इस बार मुद्दा है कोयला घोटाला, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गंभीर आरोप। राज्य के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजकर सीधा चुनौती दे दी है कि वे 72 घंटे के भीतर अपने दावों के सबूत पेश करें, वरना उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

यह पूरा विवाद उस बयान से भड़का है जिसमें ममता ने दावा किया था कि कोयला घोटाले का पैसा सुवेंदु अधिकारी के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाया जाता है। 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के विरोध में ममता बनर्जी एक रैली को संबोधित कर रही थीं। उसी दौरान उन्होंने सीधे अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए कहा कि दोनों कोयला तस्करी से जुड़े हैं और इस घोटाले की रकम ऊपर तक जाती है।

Mamata Banerjee Suvendu Adhikari

सीएम ममता ने यह भी कहा कि उनके पास शाह के खिलाफ पेन ड्राइव मौजूद हैं। ममता ने ईडी पर दो एफआईआर भी दर्ज कराई और मार्च निकालकर एजेंसी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना बताया।

सुवेंदु का पलटवार और कानूनी कदम

ममता के इन आरोपों पर सुवेंदु अधिकारी बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा,

"आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई से ध्यान हटाने के लिए मेरे ऊपर पूरी तरह बेबुनियाद और अपमानजनक आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुझे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ कोयला घोटाले से जोड़ने की कोशिश की, जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है। ऐसे गैरजिम्मेदाराना और दुर्भावनापूर्ण बयान न सिर्फ मेरी छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सार्वजनिक बहस की मर्यादा भी गिराते हैं। इसी कारण मैंने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है और 72 घंटे के भीतर सभी प्रमाण पेश करने को कहा है। यदि तय समय में जवाब नहीं दिया गया, तो उनके खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की जाएगी।"

ED बनाम TMC और हाई कोर्ट का ड्रामा

इस सियासी टकराव के बीच मामला कलकत्ता हाईकोर्ट भी पहुंच गया। तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की तलाशी के खिलाफ याचिका दायर की थी, वहीं ईडी ने भी ममता पर संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर अहम दस्तावेज जबरन ले जाने का आरोप लगाते हुए 28 पन्नों की याचिका दाखिल की।

9 जनवरी को जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच में सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट रूम में भारी भीड़ जमा हो गई। जज ने गैर जरूरी लोगों को बाहर जाने को कहा, मगर वकीलों के बीच ही बहस और धक्का मुक्की शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़े कि जज को सुनवाई टालकर कोर्ट से बाहर जाना पड़ा। अब इस मामले पर 14 जनवरी को सुनवाई होगी।

ममता का आक्रामक रुख

ममता बनर्जी ने अपनी रैली में सिर्फ कोयला घोटाले की बात ही नहीं की बल्कि चुनाव आयोग से लेकर केंद्र सरकार तक पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में बैठे एक वरिष्ठ अधिकारी अमित शाह के सहकारिता मंत्रालय से जुड़े रह चुके हैं और वोटरों के अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि टीएमसी सांसदों को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान घसीटा गया, एजेंसियों पर कब्जा कर लिया गया है और हरियाणा, बिहार समेत कई राज्यों में जबरदस्ती सत्ता हासिल की गई। ममता का कहना था कि अब बंगाल में भी यही कोशिश हो रही है।

सियासी जंग और कानूनी लड़ाई

कोयला घोटाले से जुड़े इन आरोपों ने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। एक तरफ मुख्यमंत्री सीधे केंद्र के गृह मंत्री पर उंगली उठा रही हैं, तो दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष कानूनी रास्ता अपनाकर जवाब मांग रहे हैं।

आने वाले 72 घंटे तय करेंगे कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक रहेगा या अदालत की लंबी लड़ाई में बदल जाएगा। फिलहाल बंगाल की राजनीति में आरोप, नोटिस और अदालती ड्रामे ने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है।

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