NRC पर ममता का बड़ा बयान, बोलीं- पीएम मोदी कौन कहां रहेगा, तय नहीं कर सकते
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वो किसी को पश्चिम बंगाल में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स(एनआरसी) लागू नहीं करने देंगी। मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मोदी यह तय करने वाले कोई नहीं है कि कौन यहां रहेगा और कौन छोड़ेगा। बंगाल के कूच बिहार में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं।

'देश के नागरिकों को रिफ्यूजी बनाने की कोशिश'
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी देश के नागरिकों को नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिए शरणार्थी बनाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी सुप्रीमो ममता ने एनआरसी बिल की आलोचना करते हुए कहा कि इससे लोगों में घबराहट है। उन्होंने इसे बीजेपी का चुनावी हथकंडा बताया। उन्होंन दावा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने साल 2015 में बांग्लादेश के साथ छह दशकों से चल रहे बस्तियों के मुद्दे का समाधान किया।

'चायवाला चौकीदार बन गया'
पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि 'चायवाला' जो कि अपने किए वादे पूरा करने में विफल हो गया है, वो अब लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए चौकीदार में बदल गया है। उन्होंने कहा कि अगर वो वापस सत्ता में लौटता है तो वो सबकी अवहेलना करेगा। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी के तीन नारे लूट, दंगा और हत्या है। उनके सत्ता में आने पर ये देश का आखिरी चुनाव होगा।

'मोदी को एक्सपायरी बाबू बताया'
नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में दो रैलियों को संबोधित किया। पीएम मोदी की रैली के कुछ घंटो बाद ममता ने कूच बिहार के दिनहाटा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि मैं मोदी बाबू की तरह झूठ नहीं बोलती हूं। अब से मैं उन्हें प्रधानमंत्री नहीं कहूंगी। मैं उन्हें 'एक्सपायरी बाबू' कहूंगी। चुनाव आयोग ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल अपने प्रचार में सेना का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। इसके बावजूद बीजेपी नेता ये कर रहे हैं। पीएम ये कैसे कर सकते हैं। उन्हें शर्म नहीं आती है?

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 क्या है?
ये विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के लिए है. इसके बिल के कानून बन जाने पर इन तीन देशों से भारत आने वाले शरणार्थियों को 12 साल की जगह छह साल बाद ही भारत की नागरिकता मिल सकती है। वहीं अगर असम की बात करें तो सा 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे। लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है।












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