बीजेपी ने 'जय श्री राम' को बनाया राजनीतिक नारा लेकिन राम केवल उनसे संबधित नहीं -ममता बनर्जी
कोलकाता: लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी इस चुनाव में एक दूसरे पर काफी हमले बोल रहे हैं। बीजपी की नजर इस राज्य में है वहीं ममता बंगाल में 2014 का प्रदर्शन दोहराना चाहती है। ममता को बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस की जगह भारतीय जनता पार्टी से कड़ी चुनौती मिल रही है। मोदी और शाह ने बंगाल में धुंआधार रैलियां की है। वहीं ममता भी पीएम मोदी को सीधे निशाना बना रही है। ममता ने एक इंटरव्यू में कहा कि बीजेपी बंगाल में त्रिपुरा की तरह नहीं जीत पाएगी।

'BJP की बढ़त के पीछे लेफ्ट और कांग्रेस की विफलता'
ममता बनर्जी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में ममता ने माना कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने बढ़त बनाई है। लेकिन इसके पीछे की वजह लेफ्ट और कांग्रेस की विफलता है। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि बीजेपी बंगाल में त्रिपुरा की तरह प्रदर्शन दोहरा सकती है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि पिछले आठ सालों में आपकी सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनाई है और इसी वजह से बंगाल में कमल खिल रहा है। इस सवाल के जवाब में ममता ने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता। बंगाल में कमल नहीं खिल सकता। कांग्रेस और सीपीआई(एम) बुरी हालत में हैं। कांग्रेस और सीपीएम के लोग अलग होकर बीजेपी में चले गए हैं और वो टीएमसी के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। बीजेपी के साथ कांग्रेस और लेफ्ट के अच्छे समीकरण हैं। ये राज्य स्तर पर समझ है। मैं ऐसा नहीं मानती। ये एक राजनीतिक रणनीति है। ये किसी विचारधारा पर आधारित नहीं है।

'त्रिपुरा की तरह बंगाल नहीं जीत पाएगी बीजेपी'
ममता ने कहा कि बीजेपी हमेशा पिछले साल त्रिपुरा विधानसभा में जीत का उल्लेख करती है। लेकिन वो बंगाल की तुलना में छोटा राज्य है। बंगाल की एक नगरपालिका है। बंगाल में बीजेपी की कोई जड़े नहीं हैं। त्रिपुरा में एक सीपीएम के खिलाफ जबरदस्त एंटी-इंकंबेंसी थी। त्रिपुरा में जीतने के लिए बीजेपी ने भारी मात्रा में धन खर्च किया। वहां कांग्रेस भी टूटी और उसके कई नेता और कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए। यदि बीजेपी ने त्रिपुरा जीत लिया तो इसका मतलब ये नहीं कि आप बंगाल में भी जीत पाओगे। ये एक मिथक है, जिस पर बीजेपी विश्वास करती है। 23 मई को रिजल्ट आने के बाद बीजेपी को एहसास होगा।
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' बीजेपी ने जय श्री राम को राजनीतिक नारा बनाया '
ममता ने कहा कि हिंदुत्व हिंदू धर्म के समान नहीं है। मैं इसे बहुत स्पष्ट तौर पर समझाना चाहती हूं। हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है लेकिन हिंदू धर्म जीवन जीने का एक तरीका है। मैं भी जन्म से हिंदू हूं। मैं भगवान की पूजा करती हूं। हिंदू धर्म स्वाभाविक रूप से बहुत उदार है। यदि आप हर दिन प्रार्थना नहीं करते तब भी आप हिंदू है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि जय श्री राम को एक राजनीतिक नारा बना दिया है। लेकिन राम केवल भाजपा से संबंधित नहीं है। ठाकुर श्री रामकृष्णन ने केवल काली के भक्त थे। बल्कि राम के भी भक्त थे। बल सड़को पर गदा दिखाकर(जो कि हनुमान का हथियार ) है, आप हिंदू हैं। ये बंगाल का अपमान है। बंगाली हिंदू एक अच्छी आत्मा के साथ अच्छे हिंदू है। ये इस पर निर्भर नहीं करता कि आप कितने धार्मिक रिवाजों का पालन करते हैं।

'पीएम बनने की जगह मोदी को बाहर करना प्राथमिकता'
आपने खुद का नाम प्रधानमंत्री के लिए नहीं लिया है। लेकिन कई टीएमसी कार्यकर्ता पीएम के लिए आपका नाम ले रहे हैं। ममता ने इस सवाल के जवाब पर कहा कि नहीं, ये मुद्दा अभी प्राथमिकता में नहीं है। मुख्य मुद्दा मोदी को बाहर करना है। मैं विपक्षी एकता चाहती हूं। किसी को बिल्ली के गले में घंटी बांधनी होगी। इसलिए मैंने कोलकाता में एक विपक्षी रैली करने की कोशिश की। सभी विपक्षी नेता इसमें शामिल हुए। हमारे पास कई वरिष्ठ नेता हैं, शरद पवार, शरद यादव, देवेगौड़ा... हमारे पास प्रधानमंत्री पद के 10 उम्मीदवार हैं। चुनावों के बाद हम सब एक साथ बैठ सकते हैं और एक नाम को अंतिम रूप दे सकते हैं। लेकिन, केवल एक ही व्यक्ति प्रधानमंत्री हो सकता है इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हां लेकिन वह समस्या नहीं होगी, कोई अस्थिरता नहीं होगी, जैसे भाजपा अपने अभियान में दावा कर रही है। अगर मोदी दोबारा आए तो देश नष्ट हो जाएगा। वो संस्थानों को खत्म कर रह हैं।












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