आधार ही क्यों? ममता बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग को घेरा, कहा- SIR में वोटर आईडी को भी पहचान पत्र बनाया जाए
Mamata Banerjee SIR: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में प्रेस से बातचीत के दौरान स्टेटवाइड इलेक्टोरल रजिस्टर (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल आधार कार्ड को पहचान पत्र मानना सही नहीं है, क्योंकि वोटर आईडी कार्ड (EPIC) भी एक वैध पहचान पत्र है जिसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।
ममता ने स्पष्ट कहा कि SIR को जल्दबाजी में लागू करना लोगों के अधिकारों पर संकट ला सकता है।

SIR Aadhaar Debate: आधार कार्ड शामिल, वोटर कार्ड को क्यों नज़रअंदाज?
ममता ने कहा कि आधार कार्ड को पहले ही SIR में शामिल किया जा चुका है और जिन नागरिकों के पास आधार कार्ड नहीं है, वे इसे बनवा सकते हैं। लेकिन केवल आधार कार्ड को ही पहचान पत्र मानना गलत होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "वोटर कार्ड भी एक वैध पहचान पत्र है और इसे शामिल करना ज़रूरी है।"
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार SIR लागू करने की मौजूदा प्रक्रिया के खिलाफ है। ममता ने कहा, "हम SIR के खिलाफ हैं। तीन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) भी यह कह चुके हैं कि SIR को पूरा करने में कम से कम 2 से 3 साल का समय लगता है। इसे जल्दबाजी में लागू करना संभव नहीं है।"
लोकतांत्रिक ढांचे पर संकट की आशंका
ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया को बिना पूरी तैयारी और व्यापक विचार-विमर्श के लागू किया गया तो लाखों लोगों की पहचान और मतदाता अधिकारों पर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वोटर कार्ड जैसी अहम पहचान को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
बिहार समेत कई राज्यों में SIR लागू करने पर चर्चा तेज है। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे 'जल्दबाजी का फैसला' बताते हुए लोगों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है। ममता के इस बयान से विपक्ष की आवाज़ और तेज होने की संभावना है।












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