L&T चेयरमैन के 90 घंटे काम करने के बयान पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कसा तंज, कहा-'कुछ बकाया बाकी है'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली के कोटला रोड पर कांग्रेस पार्टी के नए मुख्यालय इंदिरा भवन का उद्घाटन किया। एलएंडटी द्वारा बनाए गए इस अत्याधुनिक भवन के लिए खड़गे ने कंपनी और इसके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।
हालांकि अपने भाषण के दौरान खड़गे ने एलएंडटी के चेयरमैन एएम नाइक सुब्रह्मण्यन के हाल ही में दिए गए विवादास्पद बयान को भी संबोधित किया। सुब्रह्मण्यन ने 90 घंटे के कार्य सप्ताह का सुझाव दिया था। जिसे खड़गे ने व्यंग्यात्मक अंदाज में खारिज करते हुए कहा कि हमारी तरफ से भी कुछ बकाया है। उनकी यह टिप्पणी कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी का कारण बनी और साथ ही श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर कांग्रेस का रुख भी स्पष्ट किया।

खड़गे का 90 घंटे के कार्य सप्ताह पर विरोध
खड़गे ने 90 घंटे के कार्य सप्ताह के प्रस्ताव को सख्ती से खारिज करते हुए इसे जवाहरलाल नेहरू और बीआर अंबेडकर जैसे भारतीय नेताओं की श्रमिकों के अधिकारों की दृष्टि के खिलाफ बताया। उन्होंने याद दिलाया कि इन नेताओं ने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए लड़ाई लड़ी थी। जिसे भारत के कारखाना अधिनियम में लागू किया गया।
खड़गे ने कहा कि किसी ने 9 घंटे का कार्य दिवस कहा। लेकिन अब वे 12-14 घंटे की बात कर रहे हैं। यह विचार छोड़ देना चाहिए। साथ ही उन्होंने एलएंडटी के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि पार्टी मुख्यालय का निर्माण शानदार तरीके से किया गया है।
सुब्रह्मण्यन की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया
एलएंडटी चेयरमैन ने हाल ही में 90 घंटे के कार्य सप्ताह की वकालत करते हुए कहा था कि आप घर पर बैठकर क्या करते हैं। आप अपनी पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं। पत्नियां अपने पतियों को कितनी देर तक निहार सकती हैं। चलो कार्यालय जाओ और काम करना शुरू करो। इस विवादित बयान ने न केवल सुब्रह्मण्यन को आलोचनाओं का सामना कराया बल्कि भारत में कार्य-जीवन संतुलन पर एक व्यापक बहस छेड़ दी।
खड़गे ने इस संदर्भ में कहा कि कार्य दिवस बढ़ाने के ऐसे प्रस्ताव भारत में श्रमिकों की भलाई के खिलाफ हैं। उन्होंने श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया।
कार्य-जीवन संतुलन पर बढ़ती बहस
सुब्रह्मण्यन के बयान ने भारतीय कार्यबल और कंपनियों के बीच कार्य नैतिकता और श्रम अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया। काम करने की वकालत और लंबे कार्य सप्ताह के विचार ने रविवार को कर्मचारियों और श्रम संगठनों के बीच आक्रोश पैदा किया।
खड़गे ने इस संदर्भ में कहा कि 90 घंटे के कार्य सप्ताह का प्रस्ताव न केवल अव्यावहारिक है। बल्कि श्रमिकों की गरिमा और उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। उन्होंने अतीत में आए ऐसे अन्य प्रस्तावों का जिक्र करते हुए इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायण मूर्ति के बयान का भी उल्लेख किया। जिन्होंने कार्य घंटों में वृद्धि का सुझाव दिया था।
इंदिरा भवन का महत्व
नए AICC मुख्यालय इंदिरा भवन का उद्घाटन कांग्रेस पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था। खड़गे ने इसे पार्टी की नई यात्रा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह भवन कांग्रेस के मूल्यों और सिद्धांतों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह भवन न केवल हमारे संगठन की ताकत है। बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और श्रमिकों के अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।
कर्मचारियों के अधिकारों पर कांग्रेस का रुख
खड़गे के भाषण ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी की श्रमिकों के अधिकारों और गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नेहरू और अंबेडकर की विचारधारा पर चलती है। जिन्होंने श्रमिकों के कल्याण और संतुलित कार्य संस्कृति को बढ़ावा दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंदिरा भवन के उद्घाटन के अवसर को न केवल पार्टी की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए इस्तेमाल किया। बल्कि श्रम अधिकारों और कार्य-जीवन संतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया। 90 घंटे के कार्य सप्ताह के प्रस्ताव पर उनकी असहमति ने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस श्रमिकों के अधिकारों और उनकी गरिमा के लिए प्रतिबद्ध है। यह उद्घाटन समारोह न केवल एक भौतिक संरचना का अनावरण था। बल्कि श्रमिकों और कर्मचारियों के प्रति कांग्रेस के दृष्टिकोण को उजागर करने का भी एक अवसर था।
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