'मोदी सरकार में LAC पर अपनी जमीन खो रहा भारत', क्या है खड़गे के इन दावों का सच? यहां जानें
Mallikarjun Kharge on Ladakh LAC: लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन सीमा विवाद में मुख्य भूमिका निभाने वाला कॉन्टेंट-सिरिजाप एक बार फिर सुर्खियों में छाया हुआ है। इस बार, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मसले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सवालिया अंदाज में आरोप लगाया कि चीन पैंगोंग त्सो के पास एक सैन्य अड्डा कैसे बना सकता है, जो मई 2020 तक भारत के कब्जे में था? चीन हमारे क्षेत्र पर कब्जा करने और सिरिजाप में सैन्य अड्डा बनाने के लिए आक्रामक बना हुआ है, कथित तौर पर वह भूमि जो भारतीय नियंत्रण में थी? LAC पर यथास्थिति बनाए न रखने के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है। हमने डेपसांग मैदान, डेमचोक और गोगरा हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र सहित 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट (PP) खो दिए हैं।

यही नहीं, अपनी पोस्ट में, खड़गे ने बयानों की एक टाइमलाइन भी जारी की। जिसमें मोदी सरकार के दावों को झूठा ठहराया है। आइए जानते हैं क्या है टाइमलाइन ?
- 10 अप्रैल 2024 - प्रधानमंत्री मोदी विदेशी प्रेस को दिए गए एक इंटरव्यू में वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने में विफल रहे।
- 13 अप्रैल 2024 - विदेश मंत्री का यह बयान कि "चीन ने हमारी किसी भी भूमि पर कब्जा नहीं किया है" ने मोदी सरकार की चीन के प्रति दयनीय नीति को उजागर कर दिया।
- 4 जुलाई 2024 - भले ही विदेश मंत्री अपने चीनी समकक्ष से मिलते हैं और कहते हैं कि "LAC का सम्मान करना और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना आवश्यक है..."
आखिर क्या है खड़गे के दावों का सच?
मशहूर रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा ने डोनी नामक एक एक्स हैंडल की मदद से खड़गे के दावों की सच्चाई बयां की है। मित्रा ने 'द इकोनॉमिक्स टाइम्स' की 2013 की एक रिपोर्ट साझा की। इसमें कांग्रेस सरकार स्वीकार कर रही है कि चीनी सेना ने भारत को सिरिजाप तक पहुंचने से रोक दिया था। रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा ( एलएसी ) पार कर 5 किलोमीटर सड़क बना ली। साथ ही भारतीय सेना के गश्ती दल को एलएसी पर जाने से रोक दिया। साफ है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने से एक साल पहले ही कॉन्टेंट-सिरिजाप क्षेत्र भारत के नियंत्रण में नहीं था।
इतना ही नहीं, मित्रा ने जनरल थपलियाल की लिखी हुई जर्नल भी पेश की। जिसमें 1962 के भारत-चीन युद्ध के बारे में विस्तार से लिखा था। कैसे 1962 में पूरे सिरिजाप पर कब्जा कर लिया गया था? चीनियों ने भारतीय युद्धबंदियों को गोली मार दी और सभी भारतीय ठिकानों पर कब्जा जमाया। यहां तक कि गूगल मैप्स भी इसे चीन के नगारी प्रान्त में बताता है। इसके अलावा आज दिखाई देने वाली सभी सड़कें 2009 में दिखाई देती थीं।
आइए जानते हैं कैसे हुआ चीन का कब्जा?
सिरिजाप क्षेत्र पर चीन का कब्जा 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान हुआ था, जब भारत में जवाहरलाल नेहरू की सरकार थी। यह क्षेत्र पूर्वी लद्दाख में पांगोंग त्सो झील के पास स्थित है। 1950 के दशक में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था और उसके बाद उसने भारतीय सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ाई। इससे भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा। 1959 में तिब्बत में असंतोष और विद्रोह के बाद, दलाई लामा भारत में शरण लिए। इस घटना ने चीन और भारत के बीच तनाव को और बढ़ा दिया।
1962 का भारत-चीन युद्ध:
- सितंबर-अक्टूबर 1962: सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच कई छोटे-छोटे झड़पें हुईं, जो बाद में बड़े पैमाने पर युद्ध में बदल गईं।
- 21 अक्टूबर 1962: चीनी सेना ने सिरिजाप क्षेत्र पर हमला किया। सिरिजाप पोस्ट पर तैनात भारतीय सैनिकों ने वीरता से मुकाबला किया, लेकिन चीनी सेना की संख्या और रणनीति के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा।
- अक्टूबर-नवंबर 1962: चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया, जिसमें सिरिजाप क्षेत्र भी शामिल था। युद्ध के दौरान चीनी सेना ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ की।
- नवंबर 1962: चीन ने युद्धविराम की घोषणा की और अपनी सेना को कुछ क्षेत्रों से वापस बुला लिया, लेकिन सिरिजाप जैसे क्षेत्रों पर उसने अपना कब्जा बनाए रखा।
आज तक चीन का सिरिजाप पर कब्जा
- 2000 के दशक के अंत में, लद्दाख क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच अक्सर गश्त के दौरान आमना-सामना होता था। दोनों देशों की सेनाओं की गतिविधियां और झड़पें बढ़ने लगीं।
- अगस्त 2009: रिपोर्टों के अनुसार, चीनी सैनिकों ने अगस्त 2009 में पांगोंग त्सो झील के पास स्थित सिरिजाप क्षेत्र में भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ की। यह घुसपैठ विवादित क्षेत्र में भारतीय सेना की गश्त और चौकियों के पास हुई थी। चीन ने इस क्षेत्र में एक पूर्ण विकसित खुफिया बेस बना लिया था। इस वक्त, भारत में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार सत्ता में थी। सिरिजाप क्षेत्र चीन के नियंत्रण में रहा और इस पर भारत-चीन सीमा विवाद आज भी जारी है।












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