महाकुंभ स्नान को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे का भाजपा तंज, कहा-'क्या गंगा में डुबकी लगाने पर गरीबी खत्म होगी'
Maha Kumbh 2025: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा नेताओं की धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक मुद्दों से निपटने की उनकी कथित विफलताओं पर तीखी आलोचना की है। महू में आयोजित एक सभा के दौरान खड़गे ने भाजपा नेताओं द्वारा गंगा में स्नान के प्रति जुनून पर व्यंग्य करते हुए कहा कि यह गरीबी और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता।
खड़गे ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि गंगा स्नान करने से गरीबी नहीं मिटती। भाजपा नेताओं को यह समझना चाहिए कि देश को असली बदलाव की जरूरत है और इसके लिए संविधान को बनाए रखना और सामाजिक मुद्दों पर ठोस कार्रवाई करना आवश्यक है।

भाजपा और आरएसएस पर विश्वासघात का आरोप
खड़गे ने अपने भाषण में भाजपा और आरएसएस को भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कथित विश्वासघात के लिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों का साथ दिया और आजादी के प्रयासों में उनका कोई योगदान नहीं था।
उन्होंने कहा कि आज ये लोग कांग्रेस को गाली देते हैं। लेकिन देश की आजादी के लिए उन्होंने कुछ नहीं किया। स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस-भाजपा के लोग अंग्रेजों के साथ खड़े थे। खड़गे ने जनता से आग्रह किया कि वे इन ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें।
मस्जिदों के नीचे हिंदू प्रतीकों की खोज पर की निंदा
खड़गे ने भाजपा नेताओं की धार्मिक भक्ति और उनकी कथित दोहरी नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने मस्जिदों के नीचे हिंदू प्रतीकों की खोज और इस मुद्दे पर पार्टी के विरोधाभासी रुख की आलोचना की। खड़गे ने भाजपा के भीतर के पाखंड की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह उनकी विश्वसनीयता को कम करता है।
उन्होंने कहा कि कुछ भाजपा नेता ऐसी हरकतों का समर्थन करते हैं। जबकि अन्य सार्वजनिक रूप से इसे खारिज करते हैं। यह भाजपा की राजनीति के दोहरे मापदंड को उजागर करता है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता के बयानों की निंदा की। पात्रा ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए कांग्रेस से इस पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि खड़गे का बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। बल्कि यह उनकी पार्टी की सोच को भी दर्शाता है।
अंबेडकर, गांधी और नेहरू का हवाला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में बाबा साहेब अंबेडकर, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे महान नेताओं का आह्वान किया। उन्होंने इन नेताओं की उपलब्धियों को जनता की सामूहिक शक्ति के साथ जोड़ा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया।
गंगा स्नान से गरीबी उन्मूलन की आलोचना
खड़गे ने भाजपा नेताओं की धार्मिक प्रथाओं की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि गंगा में स्नान करने जैसे अनुष्ठान देश के गरीब और वंचित लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुष्ठान सार्वजनिक प्रशंसा या व्यक्तिगत मोक्ष के लिए हो सकते हैं। लेकिन यह देश के वास्तविक सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को हल नहीं कर सकते।
धर्म और राजनीति पर नई बहस
खड़गे की टिप्पणियों ने धर्म और राजनीति के रिश्ते पर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने शासन और सामाजिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। जो आस्था के औपचारिक प्रदर्शन से अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत में गरीबी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों के बीच, धर्म, राजनीति और समाज के इर्द-गिर्द यह चर्चा देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।












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