भारत-मालदीव के बीच रिश्तों में चीन की दीवार, तीन अधिकारियों को किया गया सस्पेंड

नई दिल्ली। भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में सबकुछ ठीक नहीं है, भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा से मिलने की वजह से मालदीव सरकार ने स्थानीय निकाय के तीन सदस्यों को सस्पेंड कर दिया है, तीनों सदस्यों को मालदीव सरकार की अनुमित लिए बिना भारतीय राजनयिक से मिलना महंगा पड़ा है। मालदीव सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब अब्दुल्ला यमीन सरकार ने चीन के साथ फ्री ट्रेड अग्रीमेंट का प्रस्ताव संसद में पास किया है, इस अग्रीमेंट को उस वक्त साइन किया गया था जब यामीन चीन के दौरे पर पिछले हफ्ते गए थे।

मालदीव का सख्त रुख

मालदीव का सख्त रुख

मालदीव सरकार के इस फैसले की पांच राजनियकों ने आलोचना की है, जिसमे यूके, यूएस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और कोलंबो के राजनयिक शामिल हैं, इनका कहना है कि एक चुने हुए नेता को राजनयिक से मिलने से रोकना गलत है। आपको बता दें कि 11 दिसंबर को लोकल गर्वनमेंट अथॉरिटी जोकि मालदीव में लोकल बॉडी को संभालने वाली मुख्य पार्टी है ने बयान जारी करके कहा कि विदेश नीति से संबंधित सभी अधिकार राष्टपति के पास है, लिहाजा विदेशी राजनयकि से मुलाकात से पहले गृह मंत्रालय की अनुमति अनिवार्य है।

मुलाकात के दिन ही सर्कुलर जारी

मुलाकात के दिन ही सर्कुलर जारी

जिस वक्त यह सर्कुलर जारी किया गया उस वक्त अखिलेश मिश्रा गाफू अलिफू अटोल आइसलैंड के दौरे पर थे। एक दिन बाद गाफू अलिफू अटोल काउंसिल के अध्यक्ष अहमद फुआद ने स्थानीय नेता को दी गई नोटिस को ट्वीट किया, जिसमे तीनों नेताओं को सस्पेंड कर दिया गया था। सभी तीनों नेता जिन्हें सस्पेंड किया गया है वह विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रैटिक पार्टी के हैं, जिसके अध्यक्ष मोहम्मद नशीद हैं। 11 दिसंबर को फुआद ने मिश्रा के स्वागत समारोह की तस्वीर ट्विटर पर साझा की थी, उसी शाम को एलजीए का सर्कुलर भी जारी किया गया।

मालदीव के राजनयिक ने की आलोचना

मालदीव के राजनयिक ने की आलोचना

एलजीए ने कहा कि गाफू अलिफू अटोल काउंसिल के अधिकारियों ने विदेशी राजनयिक से बावजूद इसके मुलाकात की कि उन्हे इस बात की चेतावनी दी गई थी कि वह बिना सरकार की अनुमति के उनसे नहीं मिले। हालांकि इसमे भारतीय राजदूत मिश्रा का नाम नहीं लिखा था। सरकार के इस फैसले के चलते उसे काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, मालदीव व श्रीलंका के यूएस अंबेसडर अतुल कश्यप ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि अब स्थानीय चुने हुए लोग एनजीओ, राजनयिकों से बिना सरकार की इजाजत के नहीं मिल सकते हैं।

भारत ने जाहिर किया था अपना रुख

चीन और मालदीव के बीच फ्री ट्रेड अग्रीमेंट साइन होने के बाद भारत ने कहा था कि ऐसी अपेक्षा की जाती है कि भारतीय समुद्र समूह राष्ट्र दिल्ली की चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं, दोनों देशों के लोगों का आपस में बेहतर संबंध है। रवीश कुमार ने कहा कि हम मालदीव के लोकतंत्र और विकास के मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं, हमे ऐसी अपेक्षा है कि मालदीव हमारा करीबी पड़ोसी और मित्र है, लिहाजा वह हमारी चिंताओं के प्रति भी संवेदनशील रहेगा और इंडिया फर्स्ट की नीति को समझेगा।

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