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Year Ender 2018: रूस के साथ हुई S-400 की डील तो अमेरिका के साथ साइन हुआ कॉमकासा

नई दिल्‍ली। साल 2018 भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए काफी अहम साबित हुआ है। इस वर्ष न सिर्फ रूस के साथ एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील आखिरकार अपने अंजाम पर पहुंची तो वहीं भारत की पहली परमाणु ताकत से लैस पनडुब्‍बी आईएनएस अरिहंत ने पहली गश्‍त पूरी की। कई और भी बातें रहीं जिनकी वजह से यह साल सेनाओं के लिए कई मायनों में अहम साबित हुआ। एक नजर डालिए साल 2018 में कुछ बड़े रक्षा सौदों पर और रक्षा क्षेत्र के कुछ अहम घटनाक्रमों पर। यह भी पढ़ें-श्रीलंका में पॉलिटिकल ड्रामे की हैप्‍पी एंडिंग, जानिए साल 2018 की बड़ी अंतरराष्‍ट्रीय घटनाएं

एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील हुई डन

एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील हुई डन

अक्‍टूबर माह में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादीमिर पुतिन भारत की यात्रा पर आए थे। उनके इस दौरे पर नई दिल्‍ली और मॉस्‍को के बीच 39,000 करोड़ की एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम ट्राइम्‍फ की डील साइन हो गई। हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात में भारत ने रूस के साथ पांच एस-400 ट्राइम्‍फ मिसाइल शील्‍ड सिस्‍टम की डील को साइन कर ही डाला। सौदे के साथ ही इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) की ताकत में दोगुना इजाफा होगा। पांच बिलियन डॉलर यानी 39,000 करोड़ रुपए की इस डील के बाद भारत को पांच सिस्‍टम मिलेंगे। इस डील पर ही अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों की धमकी आई थी। इसी डील के चलते अमेरिका, चीन पर काटसा कानून के तहत प्रतिबंध लगा चुका है। इस कानून के तहत अमेरिकी ने हर उस देश पर प्रतिबंधों का विकल्‍प खुला रखा है जो रूस के साथ किसी भी तरह के रक्षा संबंध में शामिल होंगे।

3,000 करोड़ की खरीद को मंजूरी

3,000 करोड़ की खरीद को मंजूरी

पिछले दिनों रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने 3000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी दे दी है। इस खरीद में रूस और भारत के ज्‍वॉइन्‍ट वेंचर से तैयार हो रही ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद की मंजूरी भी शामिल है। ब्रह्मोस मिसाइल को दो भारतीय जहाजों के लिए खरीदा जाएगा। ये मिसाइलें रूस में तैयार होंगी। वहीं डीआरडीओ की ओर से डिजाइन और डेवलप्‍ड रिकवरी व्‍हीकल को भी मंजूरी दी गई है। इन व्‍हीकल्‍स का प्रयोग सेना के एमबीटी अर्जुन टैंक्‍स के लिए होगा। रूस के साथ मिसाइलों की डील को ऐसे समय पर अंजाम दिया गया है जब अमेरिका ने इस देश से होने वाली हथियारों की डील पर बैन लगा दिया है। सूत्रों की मानें तो इन ब्रह्मोस मिसाइलों को दो एडमिरल ग्रिगोरोविच क्‍लास की फिग्रेट्स पर फिट किया जाएगा। इन दोनों ही फ्रिगेट्स को गोवा स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में तैयार किया जाएगा। भारत और रूस की ओर से मिलकर विकसित हो रहे ब्रह्मोस रॉकेट सिस्‍टम को दुनिया का सर्वश्रेष्‍ठ मिसाइल सिस्‍टम माना जाता है।ब्रह्मोस की स्‍पीड 2.8 मैक (ध्वनि की रफ्तार के बराबर) है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है। हालांकि अब चीन ब्रह्मोस को टक्‍कर देने के लिए एचडी-1 नामक मिसाइल को डेवलप कर रहा है जो पाकिस्‍तान को बेची जाएगी।

सेना को मिला नया सिस्‍टम

सेना को मिला नया सिस्‍टम

नवंबर माह में इंडियन आर्मी में तीन प्रमुख तोप प्रणालियों को शामिल किया गया जिनमें जिनमें एम777 अमेरिकन अल्ट्रा लाइट होवित्जर और के-9 वज्र शामिल हैं। थलसेना में शामिल की गई तीसरी तोप प्रणाली कॉम्पोजिट गन टोइंग व्हीकल है। इंडियन आर्मी के एक ऑफिसर की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया अगले वर्ष के मध्य तक एम777' और के-9 वज्र की पहली रेजीमेंट बनाने की तैयारी से पहले इन तोपों को सेना में शामिल किया गया है। इस रेजीमेंट में 18 एम777 और 18 के-9 वज्र तोपों को शामिल करने की योजना है।145 एम777 तोपों की खरीद के लिए भारत ने नवंबर 2016 में अमेरिका से 5,070 करोड़ रुपए की लागत का एक कॉन्‍ट्रैक्‍ट किया था। इराक और अफगानिस्तान में इस्तेमाल हुए एम777 तोपों को हेलीकॉप्टरों की मदद से आसानी से ऊंचाई वाले इलाकों में ले जाया जा सकता है। आर्मी पिछले कई समय से अच्‍छी और नई तोपों की कमी को महसूस कर रही थी। अब आर्मी के बेड़े में एक नया हथियार शामिल होगा। भारत ने अमेरिका से जो नई तोपें ली हैं वह 22,000 करोड़ के मॉर्डनाइजेशन प्‍लान के तहत खरीदी गई हैं।

भारत और अमेरिका के बीच साइन हुआ कॉमकासा

भारत और अमेरिका के बीच साइन हुआ कॉमकासा

इस वर्ष ही भारत और अमेरिका के बीच पहली 2+2 वार्ता हुई जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अमेरिकी समकक्षों माइक पोंपेयो और जिम मैटीस से मुलाकात की। इस वार्ता के दौरान कॉमकासा यानी कम्‍यूनिकेशंस कॉम्‍पैटि‍बिलिटी एंड सिक्‍योरिटी एग्रीमेंट भी साइन किया गया। इस एग्रीमेंट के साइन होते ही भारत के लिए अमेरिकी की तरफ से संवेदनशील मिलिट्री टेक्‍नोलॉजी और उपकरणों की खरीद का रास्‍ता साफ हो गया है। पोंपेयो ने कॉमकासा को दोनों देशों के रिश्‍तों में एक मील का पत्‍थर करार दिया। वहीं रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा कि इस एग्रीमेंट के बाद भारत की रक्षा क्षमताओं और तैयारियों में इजाफा होगा। कॉमकासा पर साइन होने का मतलब है कि भारत अब अमेरिका से एडवांस्‍ड मिलिट्री टेक्‍नोलॉजी हासिल कर सकेगा। अब तक भारत को ऐसी कोई टेक्नोलॉजी अमेरिका से नहीं मिलती थी। यह समझौता होने के बाद भारत के रक्षा क्षेत्र में मजबूती आने की संभावना है। साल 2016 में अमेरिका ने भारत को अपना सबसे बड़ा रक्षा साझीदार बताया तो था लेकिन अतिआधुनिक टेक्नोलॉजी तक भारत की पहुंच नहीं थी। इस करार के बाद मुश्किलें दूर हो सकती हैं। अमेरिका से किसी भी देश को एडवांस्ड एनक्रिप्‍टेड मिलिट्री टेक्नोलॉजी तभी मिल सकती है, जब तीन प्रकार के करार हों और कॉमकासा उन्हीं तीन में से एक है।

आईएनएस अरिहंत ने छुआ नया मुकाम

आईएनएस अरिहंत ने छुआ नया मुकाम

परमाणु क्षमता से लैस भारत की पहली परमाणु पनडुब्‍बी ने पांच नवंबर को अपनी पहली गश्‍त को पूरा किया। इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंडियन नेवी को बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा, 'आईएनएस अरिहंत राष्‍ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की तरफ पहला कदम है। देश के दुश्‍मनों के लिए यह एक खुली चुनौती है।' पहली गश्‍त को सफलतापूर्वक करने के साथ ही आईएनएस अरिहंत ने देश के परमाधु चक्र को भी पूरा कर दिया है। देश की पहली स्‍वदेशी पनडुब्‍बी आईएनएस अरिहंत अगस्‍त 2016 में इंडियन नेवी में शामिल हो चुकी है। भारत ने इस पनडुब्‍बी के जितने भी टेस्‍ट्स किए थे वे भी एकदम चुपचाप ही किए गए थे। 3500 किमी की रेंज वाली आईएनएस अरिंहत चार से 12 मिसाइलों को एक साथ ले जा सकती है। भारत अब तक रूस से परमाणु पनडुब्बियों को लीज पर लेता था ऐसे में यह भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी है।आईएनएस अरिहंत पर 700 किमी रेंज से ज्‍यादा वाली 12 कम दूरी की के-15 मिसाइलें और 3,500 किमी की दूरी तक मार कर सकने वाली चार के-4 बैलेस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं।

तेजस के हिस्‍से आई नई उपलब्धि

तेजस के हिस्‍से आई नई उपलब्धि

सितंबर माह में देश के पहले लाइट कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस की पहली बार हवा में रि-फ्यूलिंग की गई है। हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की गई। एचएएल की ओर से कहा गया है कि तेजस ने यह कामयाबी हासिल की जब 1,900 किलोग्राम का ईधन इसमें इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के एयरक्राफ्ट आईएल-76 के टैंकर से ट्रांसफर किया गया। एचएएल की ओर से बताया गया है कि 20,000 फीट की ऊंचाई पर तेजस में ईधन भरा गया था। इस एयरक्राफ्ट का एचएएल की ओर से ही डेवलप किया गया है। तेजस ने मिड एयर रि-फ्यूलिंग के साथ ही एक नया इतिहास रच दिया।तेजस ने सफलतापूर्वक हवा में ड्राइ डॉकिंग को भी चार और छह सिंतबर को अंजाम दिया है। ड्राइ डॉकिंग में कोई भी ईधन ट्रांसफर नहीं किया था। तेजस में मिड एयर रि-फ्यूलिंग को तीन माह पहले मिली उस सफलता के बाद अंजाम दिया गया है जिसके तहत एयरक्राफ्ट से एयर-टू-एयर बियॉन्‍ड विजुअल (बीवीआर) रेंज मिसाइल को फायर किया था।

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