16 साल बाद अब जीएसटी बिल पास होने की उम्मीद, जानें क्या होंगे फायदे
कई सालों की खींचतान और कांग्रेस पार्टी का विरोध खत्म होने के बाद अब जीएसटी बिल राज्यसभा में जाने को तैयार है। बुधवार को जीएसटी बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां पर इसे मंजूरी दिए जाने वाले मुद्दों पर बहस होगी। काफी समय से जीएसटी का विरोध कर रही विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है। संसदीय कार्यकारी मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि जीएसटी बिल को राज्यसभा में भेजे जाने की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि जीएसटी बिल को राज्यसभा में भी मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।

जहां एक ओर सरकारी सूत्रों का कहना है कि जीएसटी से जुड़े मुद्दे सुलझ चुके हैं, वहीं कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो कुछ खास मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की मांग है कि जीएसटी रेट पर लगने वाली सीमा को बिल में भी दिखाया जाना चाहिए। सरकार ने जीएसटी के लिए काफी बातचीत के बाद ज्यादातर पार्टियों का समर्थन हासिल कर लिया है। अब सरकार को राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से जरूरत है। आइए जानते हैं क्या है जीएसटी और इससे क्या होंगे फायदे।
1- क्या है जीएसटी?
जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग लगने वाले सारे टैक्स एक ही टैक्स में शामिल होंगे। इससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें पूरे देश में लगभग एक हो जाएंगी। मैन्युफैक्चरिंग की लागत घटेगी, जिससे सामान सस्ते हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को होगा।
जीएसटी को दो स्तरों पर लागू किया जाएगा। पहला तो केन्द्रीय स्तर पर और दूसरा राज्य स्तर पर। जब वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाला टैक्स जीएसटी लागू हो जाएगा, तो बाजार एकीकृत हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अधिकतर अप्रत्यक्ष कर जीएसटी में ही शामिल हो जाएंगे।
2- जीएसटी लागू होने से क्या होंगे फायदे?
जीएसटी दो स्तरों पर काम करेगा। केन्द्र के स्तर पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और अन्य तरह के सीमा शुल्क जीएसटी में शामिल होंगे। वहीं राज्य स्तर पर वैट, मनोरंजन, लॉटरी पर लगने वाला टैक्स आदि जीएसटी में शामिल होगा। केन्द्र के स्तर पर लगने वाला केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) जीएसटी के आने से खत्म हो जाएगा। साथ ही साथ प्रवेश शुल्क और चुंगी भी खत्म हो जाएगी। जब टैक्स अलग-अलग ना लगकर एक ही टैक्स लगेगा तो चीजों को दाम घटेंगे और उपभोक्ताओं को इसका फायदा होगा।
3- अभी तक क्या आ रही थीं समस्याएं?
लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि आखिर जब जीएसटी आम जनता के फायदे की चीज है तो फिर इसे मंजूरी मिलने में इतना समय क्यों लग रहा है और इस पर चर्चा पहले क्यों नहीं शुरू हुई। दरअसल जीएसटी से भले ही आम जनता को फायदा हो लेकिन सरकारी खजाने में जीएसटी के आने से कमी होने का डर था।
राज्यों को राजस्व के नुकसान का डर था। इसमें भी सबसे अधिक विरोध पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैक्स को लेकर हो रहा था, क्योंकि राज्यों का 50 फीसदी राजस्व इसी से आता है।
इसके अलावा केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) भी जीएसटी की राह में रोड़ा बना हुआ था। आपको बता दें कि सीएसटी राज्यों के बीच होने वाले कारोबार पर लगने वाला टैक्स है। इसके खत्म हो जाने से भी राज्यों को उनके राजस्व में कमी आ जाने का डर था।
4- कैसे बनी चर्चा के लिए सहमति?
राज्यों के राजस्व का 50 फीसदी हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले टैक्स से आता है। इसलिए सरकार का यह फैसला है कि जीएसटी में शामिल करने के बाद भी केन्द्र तीन साल तक इस पर कोई टैक्स वसूली नहीं करेगा। इन तीन सालों तक राज्य खुद इस पर टैक्स वसूल कर सकते हैं, जिससे उन्हें राजस्व की हानि भी नहीं होगी।
इतना ही नहीं, केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) बंद होने की वजह से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए केन्द्र ने इस वित्त वर्ष में राज्यों को 11000 करोड़ रुपए देने का वादा किया है। साथ ही एल्कोहल और तंबाकू पर लगने वाले टैक्स की वसूली राज्य ही करेंगे। सीएसटी को लेकर राज्यों का करीब 34 हजार करोड़ रुपए बकाया था, जिसके चलते राज्य सरकारें नाराज थीं और जीएसटी के इस अहम सुधार का विरोध कर रही थीं। इन विभिन्न मुद्दों पर आपसी सहमति बनने के बाद ही जीएसटी बिल पर चर्चा शुरू हो सकी है।
5- कब शुरू हुई जीएसटी की बात?
करीब 16 साल पहले 2000 में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने जीएसटी की नींव रखी थी। तभी से बहुमत न मिल पाने के कारण यह लगातार टलता रहा है। इसके बाद 2009 में दोबारा इसे लागू करने की कोशिशें की गईं, लेकिन उस समय अधिकतर राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें थीं, जिसके चलते जीएसटी का विरोध होता रहा। सभी गैर कांग्रेसी सरकारें नुकसान की भरपाई की मांग कर रही थीं।
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