महाराष्‍ट्र: जानिए कौन हैं NCP के 'दादा' अजित पवार, जिन्‍होंने खेल दिया एक बार फिर मास्‍टरस्‍ट्रोक

मुंबई। महाराष्‍ट्र की राजनीति में कोई भी 23 नवंबर की तारीख को नहीं भूला पाएगा। अभी शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे के महाराष्‍ट्र के सीएम बनने की खबर को ठीक से 12 घंटे भी नहीं हुए थे कि बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ले ली। इस पूरे राजनीति घटनाक्रम से राजनीति के पंडित भी हैरान हैं और कोई समझ नहीं पा रहा है कि आखिर यह सब हुआ कैसे। वहीं, इस मास्‍टरस्‍ट्रोक में राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के विधायक अजित पवार को सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। जानिए कौन हैं इस मास्‍टरस्‍ट्रोक को लिखने वाले अजित पवार।

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    करीबी लोग बुलाते हैं दादा

    करीबी लोग बुलाते हैं दादा

    अजित पवार को पूरा नाम अजित अनंतराव पवार है और वह महाराष्‍ट्र के बारामती क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। बारामती हमेशा से पवार फैमिली का गढ़ रहा है। 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली में जन्‍में अजित पवार को उनके समर्थक और करीबी लोग दादा कहकर बुलाते हैं जिसका मलतब होता है बड़ा भाई। अजित पवार के पिता यानी शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार मशहूर फिल्‍म निर्मात वी शांताराम के राजकमल स्‍टूडियो में काम किया करते थे। पवार राज्‍य के उप-मुख्‍यमंत्री बने हैं और वह मुखिया शरद पवार के भतीजे हैं। साफ है राजनीति के गुण अपने चाचा से सीखने वाले भतीजे ने शिवसेना और कांग्रेस को वीकएंड सरप्राइज देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

    साल 1982 से राजनीति में सक्रिय

    साल 1982 से राजनीति में सक्रिय

    अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और वह दो बेटों जय और पार्थ पवार के पिता हैं। अजित ने देवलाली के स्‍कूल से ही प्राथमिक शिक्षा ली और फिर महाराष्‍ट्र बोर्ड से सेकेंडरी स्‍कूल से बाकी की शिक्षा ली। पवार का राजनीति करियर साल 1982 में शुरू हुआ था और उस समय वह अपनी उम्र के 20वें दशक में थे। उस वर्ष पवार ने शुगर को-ऑपरेटिव बॉडी का चुनाव जीतकर राजनीति की तरफ कदम बढ़ा दिए थे। साल 1991 में पवार पुणे जिले के सहकारी बैंक के चेयरमैन बने। 16 लंबे साल तक इस पद को संभालने के बाद पवार ने बारामाती संसदीय क्षेत्र से 1991 में लोकसभा का चुनाव जीता।

    चाचा के लिए छोड़ी सीट

    चाचा के लिए छोड़ी सीट

    देश की राजनीति में 91 में डेब्‍यू करने वाले अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के लिए यह सीट छोड़ दी और उस समय शरद पीवी नरसिम्‍हा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने थे। इसी वर्ष पवार महाराष्‍ट्र की विधानसभा के लिए चुने गए और नवंबर 1992 में वह राज्‍य कृषि और ऊर्जा मंत्री बनाए गऐ। फरवरी 1993 तक वह इस मंत्री पद पर रहे और इसके बाद वह 1995,1999, 2004 और 2014 में चुनाव जीते। अब तक उनके पास कृषि, ऊर्जा, जल संसाधन जैसे विभाग रहे हैं। इसके अलावा 29 सितंबर 2012 से 25 सितंबर 2014 तक राज्‍य के उप-मुख्‍यमंत्री भी रहे।

    राज्‍य का सीएम बनने का सपना

    राज्‍य का सीएम बनने का सपना

    महाराष्‍ट्र की राजनीति को करीबी से जानने वालों की मानें तो अजित पवार हमेशा से एक दिन राज्‍य का सीएम बनने का सपना देखते आए हैं। साल 2009 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद ही उन्‍होंने राज्‍य के डिप्‍टी सीएम बनने की महत्‍वकांक्षा जाहिर की थी। ले‍किन उस समय यह पद छगन भुजबल को दे दिया गया। मगर दिसंबर 2010 में उनकी यह इच्‍छा नाटकीय ढंग से पूरी हुई और उन्‍हें पद सौंप दिया गया। सितंबर 2013 में उनका नाम सिंचाईं घोटाले में आया और उन्‍हें अपना पद छोड़ना पड़ गया। हालांकि सात दिसंबर 2013 को उन्‍हें उनका पद वापस मिल गया।

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