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राष्‍ट्रवाद की राह चली महाराष्‍ट्र उद्वव सरकार पर गहराने लगे संकट के बादल

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बेंगलुरु। महाराष्‍ट्र की महाविकास आघाडी सरकार भारतीय जनता पार्टी को राष्‍ट्रवाद के मुद्दे पर मात देना चाह रही है। शिवसेना प्रमुख और महाराष्‍ट्र के सीएम उद्वव ठाकरे महाराष्‍ट्र की जनता को ये जताना चाहते है कि शिवसेना और उनकी सरकार राष्‍ट्रवादी है इसके लिए ठाकरे ने एक नया दांव चला हैं। लेकिन इस चक्कर में शिवसेना ने महाराष्‍ट्र में अपनी सहयोगी पार्टी कांग्रेस और एनसीपी को नाराज कर दिया हैं। ऐसे में महज डेढ़ महीने पहले महाराष्‍ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन में बनी सरकार में एक बार फिर मतभेद शुरु हो चुका हैं। सीएम उद्वव ठाकरे ने भाजपा और राजठाकरे के भगवाकरण से घबराकर फिर से हिदुत्‍व की राह जो पकड़ी है इससे उनकी सरकार पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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दरअसल, महाराष्‍ट्र शिवसेना सरकार ने राज्य में कांग्रेस और एनसीपी के विरोध के बावजूद बड़ा ऐलान किया हैं। सरकार ने भाजपा के खिलाफ दांव खेलते हुए राज्य के स्‍कूल कालेजों में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम राष्‍ट्रगीत गाना अनिवार्य कर दिया हैं। जबकि एनसीपी और कांग्रेस इसका विरोध अभी भी कर रहे हैं क्योंकि अल्पसंख्‍यकों को राष्‍ट्रगीत गाना रास नहीं आता। जिससे इसका कांग्रेस के नेता जमकर विरोध कर रहे हैं।

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लेकिन शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनायी तब से उस पर आरोप लग रहा कि शिवसेना ने हिदुत्‍व छोड़ कर सेकुलरिजम अपना लिया है। राज्य में हिदुत्व पर कमजोर पड़ती शिवसेना ने ये जताने के लिए कि उसने हिदुत्‍व के मुद्दे को नहीं छोड़ा है इसलिए राष्‍ट्रगीत को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। स्‍वयं को राष्‍ट्रवादी बताकर जनता का शिवसेना पर विश्‍वास जीतना चाहती हैं। लेकिन इस चक्कर में उसको इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती हैं।

शिवसेना के इस कदम से कांग्रेस के पारा हुआ हाई

शिवसेना के इस कदम से कांग्रेस के पारा हुआ हाई

ऐसा आदेश देकर शिवसेना भले ही स्‍वयं को राष्‍ट्वादी घोषित कर ले लेकिन सरकार में सहयोगी पार्टी खासकर कांग्रेस को नाराज कर चुकी हैं। यह सिर्फ एक ही मुद्दा नहीं हैं जो कांग्रेस शिवसेना सरकार से नाराज चल रही हैं। इसके पहले मंत्रीमंडल विस्‍तार के समय मनमाफिक विभाग न मिलने और सरकार में मंत्री बने काग्रेंस के मंत्रियों को सरकार में तबज्जों न मिलने से नाराजगी अभी खत्म नहीं हुआ थी। ऐसे मे यह शिवसेना सरकार का ये राष्‍ट्रवाद जताने को लेकर ये नया फरमान कांग्रेस नेताओं के विरोध को और बढ़ा दिया हैं।

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शिवसेना ऐसा करके तोड़ रही अपना वादा

शिवसेना ऐसा करके तोड़ रही अपना वादा

बता दें महाराष्‍ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने सरकार बनाने को लेकर जब चर्चा शुरू ही हुई थी। तभी ये कह दिया था कि शिवसेना को अब कट्टर हिंदुत्व की राह छोड़ धर्मनिरपेक्षता की ओर आना होगा। शिवसेना अपने 'सामना' में इस तरह के किसी लेख को प्रकाशित भी नहीं करेगी। जिससे गठबंधन में कांग्रेस-एनसीपी को जवाब देना मुश्किल हो और सरकार बनाते वक्त शिवसेना ने इन शर्तों पर हामी भी भरी थी, लेकिन कुछ दिनों पूर्व विधानसभा में उद्धव के हिंदुत्व वाले बयान ने बीजेपी को बैठे-बिठाए कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका दे दिया हैं। इतना ही नहीं शिवसेना के मुखपत्र सामना में कई बार ऐसे लेख प्रकाशित हुए जो कांग्रेस का रास नहीं आए।

पहले ही कांग्रेस गठबंधन तोड़ने की कर चुकी है बात

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जिसके बाद तो अपना बचाव करते हुए विधानसभा में शिवसेना के दिए गए उक्त बयान को कांग्रेस, शिवसेना की निजी लाइन बता दिया था। लेकिन अब जब खुले तौर पर शिवसेना 'हिंदुत्व' और राष्‍ट्रवाद पर बयानबाजी और इसके पक्ष में फैसले ले रही हैं। जिसके कारण शिवसेना और कांग्रेस के बीच की नाराजगी और बढ़ चुकी हैं। जिसका परिणाम आने वाले दिनों में महाराष्‍ट्र सरकार भी पड़ सकता हैं क्योंकि आखिर कब तक शिवसेना की मनमानियां कांग्रेस सहेगी। मालूम हो कि पहले भी कांग्रेस कुछ मुद्दों पर गठबंधन तोड़ने की धमकी शिवसेना सरकार को दे चुकी है।

महाराष्ट्र में भी मेनिफेस्टो क्रियान्वयन समिति बनाने की कांग्रेस कर रही मांग

महाराष्ट्र में भी मेनिफेस्टो क्रियान्वयन समिति बनाने की कांग्रेस कर रही मांग

बता दें कांग्रेस नेता मिलिंद देवडा ने मांग की है कि कांग्रेस शासित अन्य राज्यों की तरह महाराष्ट्र में भी मेनिफेस्टो क्रियान्वयन समिति जैसा कोई तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। यह मांग कांग्रेस नेता मिलिंद देवडा ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखी एक चिट्ठी में की है। 24 जनवरी को लिखी गई इस चिट्ठी में मिलिंद देवडा ने लिखा है कि महाराष्ट्र की महा विकास आघाडी का 50 दिन का कार्यकाल पूरा होने को है और आघाडी सरकार में शामिल शिवसेना और राकांपा अपने-अपने चुनावी वादों को पूरा करने में लगे हैं। देवड़ा ने अपने पत्र में सोनिया गांधी को कांग्रेस के उस चुनावी वादे की याद दिलाई है, जो राहुल गांधी ने पिछली साल मार्च में चुनावी सभा में मुंबई के लोगों से किया था। महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान मुंबई के झोपड़ाधारकों और जर्जर इमारतों में रहने वालों को 500 वर्ग फीट का मकान देने वादा राहुल गांधी ने किया था।

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में भी शामिल है ये मुद्दा

यह मुद्दा महा विकास आघाडी सरकार के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में भी शामिल किया गया है। देवडा ने सोनिया गांधी से मांग की गई है कि जिस तरह एक कांग्रेस शासित राज्य में चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए क्रियान्वयन समिति बनाई गई है, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी कोई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि कांग्रेस पार्टी के सहयोग वाली महाराष्ट्र सरकार तेजी से अपने चुनावी वादों को पूरा कर सके।

ज्यादा दखल दिया तो गिर जाएगी सरकार

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गौरतबल है कि पहले से ही राजनीति विशेषज्ञ मान रहे थे कि निश्चित तौर पर ये अनहोली गठबंधन है, महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार चलेगी या नहीं, इसकी संभावना 50-50 प्रतिशत की है। जब यूपीए-1 की सरकार बनी थी तो उस गठबंधन को भी अनहोली गठबंधन कहा गया था।लेकिन उस गठबंधन की खासियत ये थी कि कांग्रेस उसमें सबसे बड़ी पार्टी थी, जिस कारण कांग्रेस का दबाव सरकार पर दिखता था। लेकिन महाराष्ट्र के गठबंधन में लगभग तीनों ही पार्टियों के विधायक संख्या में एक जैसे ही हैं।

इसलिए किसी एक पार्टी का दबाव नहीं चलेगा और अगर किसी पार्टी ने ज्यादा दखल देने की कोशिश की तो सरकार गिर जाएगी। वर्तमान समय में महाराष्‍ट्र में डिप्‍टी सीएम पद समेत अनेक मलाईदार मंत्रालय पाकर एनसपी प्रमुख शरद पवार खुश हैं लेकिन शिवसेना सरकार की मनमाने रवैये और महाअघाडी मेनिफेस्‍टो पर न चलने से नाराज कांग्रेस कभी भी अपना हाथ खींच सकती हैं। जिसके हालात अब साफ नजर आने लगे हैं।

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भाजपा के खिलाफ चला ये दांव पड़ सकता हैं शिवसेना को मंहगा

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बता दें कुछ दिनों पूर्व शिवसेना ने दावा किया था कि उसने हिदुत्‍व के मुद्दे को नहीं छोड़ा हैं। इतना ही नहीं कुछ दिनों पहले ही शिवसेना ने राज्य से घुसपैठियों को बाहर निकालने का आदेश दिया था और इसके लिए उसने केन्द्र की भाजपा सरकार को समर्थन दिया था। असल में राज्य में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के सक्रिय होने के बाद शिवसेना को लग रहा है कि उसकी महाराष्‍ट्र में हिुदुत्‍व की राजनीति खत्म हो जाएगी।

इस डर से लिया ये फैसला

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क्योंकि मनसे से अपने अधिवेशन में बता दिया है कि वह अब मराठी मानुष के स्थान पर हिंदुत्व की राजनीति करेगी। जो सीधे तौर पर शिवसेना को टक्कर देगी। इसलिए शिवसेना सरकार ने इस आदेश के जरिए बता दिया है कि वह भी हिंदुत्व की ही राजनीति करेगी। वैसे तो शिवसेना देशगीत गाना अनिवार्य किए जाने के लिए कह रही है कि इससे स्‍टूडेन्‍ट्स में देशभक्ती की भावना पैदा होगी और देश के लिए बलिदान देने वालों की जानकारी मिलेगी।

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English summary
Despite opposition from Congress and NCP, Shivsena Sena chief and CM Uddhav Thackeray have made the national song Vande Mataram song mandatory in school colleges.
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