अजित पवार का समर्थन लेने पर BJP के भीतर से उठी पहली आवाज
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में तमाम सियासी उठापटक देखने को मिली उसके बाद आखिरकार एनसीपी-शिवसेना और कांग्रेस सरकार बनाने को तैयार हैं। लेकिन जिस तरह से अचानक देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के साथ मिलकर सरकार का गठन किया उसने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां तक कि खुद पार्टी के दिग्गज नेता पार्टी के इस फैसले पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से ने भी अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बनाने पर सवाल खड़ा किया है।

अजित पवार का समर्थन नहीं लेना चाहिए था
अजित पवार के साथ मिलकर देवेंद्र फणडवीस सरकार के गठन पर सवाल खड़ा करते हुए खड़से ने कहा कि मेरा व्यक्तिगत तौर पर यह मानना है कि भाजपा को अजित दादा पवार का समर्थन नहीं लेना चाहिए था। वह सिंचाई घोटाले के आरोपी हैं और उनपर कई तरह के आरोप हैं। एकनाथ खड़से ने कहा कि जिस तरह इस महाघोटाले में अजित पवार आरोपी हैं और उनपर कई आरोप हैं, लिहाजा पार्टी को उनका समर्थन नहीं लेना चाहिए था।

खड़े हुए सवाल
बता दें कि सिंचाई घोटाले में अजित पवार का भी नाम है, लेकिन महाराष्ट्र में सरकार गठन के बाद इससे जुड़े 9 मामलों की जांच को बंद कर दिया गया था। जिसके बाद सवाल खड़े हो रहे थे कि क्या अजित पवार के भाजपा को समर्थन देने की वजह से उन्होंने भाजपा से हाथ मिलाया। लेकिन इन तमाम सवालों के बीच भाजपा की ओर से सफाई दी गई कि अजित पवार के खिलाफ चल रही जांच को नहीं बंद किया गया है।
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पार्टी की किरकिरी
दरअसल अजित पवार का समर्थन लेने पर भाजपा हर तरफ से घिरी हुई है। सवाल यह उठाए जा रहे हैं कि जब अजित पवार के साथ विधायक नहीं थे और उनके खिलाफ उनकी ही पार्टी ने मोर्चा खोल दिया था तो आखिर क्यों भाजपा ने उनका समर्थन लिया। हालत यहां तक पहुंच गई कि जब एनसीपी- शिवसेना-कांग्रेस के विधायकों की परेड के बाद भी भाजपा ने अजित पवार से अपना किनारा नहीं किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।












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