महाराष्ट्र में किसी की नहीं बन रही बात, अब लागू हो सकता है राष्ट्रपति शासन

मुंबई। महाराष्ट्र में अभी तक सरकार नहीं बन पाई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना दोनों ही सरकार बनाने के लिए बहुमत साबित नहीं कर पाए हैं। ऐसे में संविधान विशेषज्ञों को लग रहा है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। भाजपा को हाल ही में विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 105 सीटों मिली थीं।

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रविवार को अचानक भाजपा ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद 56 सीटें हासिल करने वाली शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता दिया गया। इसके बाद शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस का समर्थन हासिल करने के लिए राज्यपाल से सम्यसीमा बढ़ाने को कहा। लेकिन राज्यपाल ने समयसीमा बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया और एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया।

भाजपा को 17 से अधिक दिन का समय मिला

भाजपा को 17 से अधिक दिन का समय मिला

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल ने सभी पार्टियों को सरकार बनाने का मौका दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत जज का कहना है, 'चुनाव परिणामों के आने के बाद भाजपा को 17 से अधिक दिन का समय मिला, जबकि शिवसेना को 24 घंटे के भीतर बहुमत साबित करने के लिए कहा गया। सभी राजनीतिक दलों को समान समय दिया जाना चाहिए। एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बारे में बहुत स्पष्ट था।'

'शिवसेना को भी मिला है पर्याप्त समय'

'शिवसेना को भी मिला है पर्याप्त समय'

बता दें महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित हुए थे और राज्यपाल भगत सिंह कोशयारी ने भाजपा को 9 नवंबर को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है, 'परिणामों के 16 दिनों तक इंतजार करने के बाद, शिवसेना को केवल 24 घंटे देने का कोई कारण नहीं था। एनसीपी और कांग्रेस को भी दावे के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए।'

जबकि एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है, 'पिछले दो-तीन दिनों में हुए घटनाक्रमों से निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि शिवसेना को अन्य दो दलों का समर्थन नहीं मिल रहा है। यह कहना उचित नहीं होगा कि सेना को केवल एक दिन मिला। उनका समय भी, परिणामों की घोषणा के दिन से ही शुरू हो गया था और किसी ने भी उन्हें समर्थन जुटाने से नहीं रोका था।'

राष्ट्रपति शासन लागू होने पर क्या होता है?

राष्ट्रपति शासन लागू होने पर क्या होता है?

अगर महाराष्ट्र में आपातकाल लगता है तो राज्य की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति के हाथों में आ जाएगी। राज्य विधानसभा के सभी कार्य संसद देखेगी। राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने या फिर एक साल की होती है। अगर राष्ट्रपति शासन को एक साल पूरा होने पर भी आगे बढ़ाना होता है तो इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होती है। चुनाव आयोग अगर सहमति दे देता है तो राष्ट्रपति शासन तीन साल की अवधि से ज्यादा नहीं लगाया जा सकता। हालांकि इस दौरान भी राज्यपाल राजनीतिक पार्टियों को बहुमत साबित करने के लिए न्योता दे सकता है।

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