वो कारण जिनसे प्रियंका भी नहीं कांग्रेस के लिए अब संजीवनी
मुंबई.चंडीगढ़। पहले राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा से पछाड़, फिर लोकसभा में पटखनी औऱ उसके बाद महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा में भाजपा के ही हाथों चित हुई कांग्रेस अपनी साख अब नहीं बचा पाई है। 44 साल के युवा राहुल बाबा भी कांग्रेस को ऑक्सिजन नहीं दे पाए।
बीच में प्रियंका गांधी को पार्टी में लाकर कांग्रेस को फिर से जीवत करने पर खुद पार्टी में भी मंथन हुआ। तमाम छोटी-बड़ी पार्टियों के नेताओं के अलावा कांग्रेस के भीतर बैठे वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रियंका गांधी को सक्रिय कांग्रेसी राजनीति में लाने के लिए पहल की थी। जिस पर खुद सोनिया गांधी ने साफ तौर पर हर बार इनकार किया। लेकिन अब के समीकरण बता रहे हैं कि अब तो प्रियंका गंधी भी आ जाएं तो इतना मंथन हो पाएगा कि अमृत झट से निकल जाए। इस अमृत मंथन में दशकों का समय लग सकता है।
जानिए वो कारण जिनसे वापसी करना कांग्रेस के लिए भारी
- दशकों तक केंद्र में सत्ता में रहने पर कांग्रेस की छवि एक भ्रष्टाचारी पार्टी के तौर पर उभरी है। बोफोर्स घोटाले से लेकर टूजी और कॉमनवेल्थ घोटाले तक का ठीकरा कांग्रेस के ही माथे है।
- कांग्रेस के प्रति नकारात्मक सोच का निर्माण उस समय से तेजी से हुआ जब अन्ना हजारे ने यूपीए सरकार रहते हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन किया। उस समय बने माहौल में कांग्रेस की छवि एक भ्रष्ट छवि के रूप में बनकर रह गई। जबकि भाजपा की राज्य सरकारों में भी कई घोटाले हुए हैं।
- कांग्रेस की इतनी बुरी हार का कारण राहुल गांधी का पूरी तरह से सक्रिय नहीं रहने से भी है। 2010 से पहले तक राहुल गांधी एक युवा नेता के तौर पर उभर रहे थे। लेकिन 2010 के बाद राहुल गांधी की विपरीत गिनती शरू हुई। राहुल गांधी इतने सक्रिय नहीं हो पाए।
- कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान कई बार स्पष्ट रूप से यह संकेत मिले हैं कि सोनिया के कोई भी निर्णय या कोई चर्चा समझो व्यर्थ थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री भी कुछ निर्णय लेने से पहले सोनिया गांधी से ही परामर्श करते। इसी एक छत्र निर्णय शक्ति के कारण पूरी स्वतंत्रता राहुल गांधी को नहीं मिल पाई। यही कारण है कि राहुल गांधी खुलकर सामने जब आए तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
- कांग्रेस वापसी कर सकती थी। अगर इस महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव और अन्य चुनावों से पहले ही प्रियंका गांधी को व्यक्तिगत रैलियां संबोधित करने की छूट होती।
- कांग्रेस पार्टी की शायद सबसे बड़ी कमी यह भी रही कि वह नकारात्मकता का शिकार हो गई। इसी के चलते अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार तबके तक नहीं कर पाई। जबकि इसके उलट नरेंद्र मोदी ने भाजपा की जिस तरह से मार्केटिंग की है उससे नरेंद्र मोदी ही नहीं भाजपा भी एक ब्रांड की तरह उभरी है।













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