‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ से नाखुश हैं महाराष्ट्र के किसान, राजू शेट्टी बोले- ये किसानों के साथ क्रूर मजाक

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बजट में किसानों के लिए 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि'योजना का ऐलान किया। इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को केंद्र सरकार सालाना 6000 रुपये देगी। इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा जिनकी ज़मीन दो हेक्टेयर से कम होगी। महाराष्ट्र के किसानों और किसान नेताओं ने सरकार के इस ऐलान की आलोचना की है। शुक्रवार को अंतरिम बजट पेश करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि'योजना का ऐलान करते हुए कहा कि जिन किसानों की जोत भूमि 2 हेक्टेयर से कम है। उनके बैंक खाते में सालाना 6000 रुपये डालकर वो उनकी सहायता करेगी।

 'किसानों के साथ क्रूर मजाक'

'किसानों के साथ क्रूर मजाक'

स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि ये किसानों के साथ क्रूर मजाक है। पिछले दो सालों में हर फसल का का थोक मूल्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे रहा है। इसके परिणामस्वरुप वो कर्ज में धंसते चले गए हैं। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि इस धनराशि से उसका क्या फायदा होगा? उन्होंने सरकार की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना की घोषणा इसलिए की गई ताकि वो सत्ता में वापस आ सके। जो भी सरकार सत्ता में आएगी वो बाद में इसे सही कर देगी। सरकार के ये कदम किसानों के गुस्से को कम करने के लिए लिया गया है लेकिन ये ज्यादा असर नहीं डालेगा।

एक साल में प्याज का मूल्य गिरा

एक साल में प्याज का मूल्य गिरा

महाराष्ट्र में किसानों की 45.2 फीसदी भूमि जोत 2 हेक्टेयर तक है।लेकिन इस तरह की अधिंकाश जमीन पश्चिमी महाराष्ट्र में है, जो अपेक्षाकृत अधिक समृद्ध क्षेत्र है। विदर्भ और मराठवाड़ा के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों के पास ज्यादा जमीन हैं और उन्हें योजना से कोई लाभ नहीं मिलेगा।नासिक के निफाड़ तालुका के तिलक गांव के किसान संतोष गोराडे का कहना है कि इससे तो अच्छा था कि सरकार ऐसा कोई ऐलान नहीं करती। पिछले एक साल से प्याज का मूल्य बहुत नीचे गिरा है। हम अपना कर्ज लौटाने की स्थिति मे नहीं है और हमें उम्मीद थी कि सरकार हमें इसे संकट से बाहर लाने के लिए कोई योजना लाएगी। लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं था। गोराडे ने कहा कि उनकी फसलों के कम मूल्य मिलने की वजह से बहुत से किसान इस साल लोन की किस्त नहीं चुका पाए।

'स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों पर चुप्पी'

'स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों पर चुप्पी'

एम स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए इस बजट में कुछ नहीं किया गया।स्वामीनाथन कमेटी ने सिफारिश की है कि कि किसानों को उनकी फसल की डेढ़ गुना अधिक लागत मिले। गौरतलब है कि हाल ही में तीन राज्यों में हुए चुनाव में भाजपा को किसानों की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। राहुल गांधी ने चुनावों में वादा किया था कि वो सरकार बनाते ही किसानों का कर्ज माफ कर देंगे और सरकार बनाने के बाद तुरंत इसका ऐलान भी राज्य सरकारों ने किया।

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