महाराष्ट्र में दूध के दाम बढ़ाने को लेकर आंदोलन जारी, विपक्ष ने बीजेपी सरकार को बताया 'किसान विरोधी'
मुंबई: महाराष्ट्र में दूध के दाम बढ़ाने को लेकर किसानों का आंदोलन सोमवार से जारी है जिसके बाद अब दूध की सप्लाई को लेकर बड़ा संकट पैदा हो गया है। महाराष्ट्र के कई शहरों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आंदोलन के दौरान मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और अन्य प्रमुख शहरों के लिए जाने वाले दूध के टैंकरों को बीच में ही रोक लिया गया। दूध की कीमत बढ़ाने को लेकर उग्र आंदोलन कर रहे स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने पूरे महाराष्ट्र में दूध की सप्लाई ठप करने की धमकी दे दी है। जबकि मुंबई में दूध की किल्लत के डर से लोग दूध खरीदकर स्टोर करने लगे हैं।

दूध की कीमत प्रति लीटर 5 रु बढ़ाने की मांग
स्वाभिमानी शेतकारी संगठन की मांग है कि दूध की कीमत प्रति लीटर 5 रु बढ़ाई जाए। उनकी मांग है कि बटर और मिल्क पाउडर के ऊपर से जीएसटी भी हटाए जाए। वहीं, सरकार इस कीमत को 3 रु तक बढ़ाने के लिए तैयार थी। सरकार का ये भी कहना है कि किसानों की सारी मांगें मान ली गई हैं लेकिन शेतकारी संगठन प्रमुख राजू शेट्टी किसानों को भड़का रहे हैं और वो सरकार से बातचीत करने को तैयार नहीं हैं।

सरकार पर शिवसेना का बड़ा हमला
इस बीच किसानों के आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला। विधानसभा में विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया और सरकार को किसान विरोधी बताया। विपक्ष के सदस्यों ने सदन से वॉक आउट भी किया। वहीं, शिवसेना ने भी हमला बोलते हुए कहा कि क्या सरकार दूध किसानों को सब्सिडी नहीं दे सकती? क्या वह उनसे बात भी नहीं कर सकते? आप (सरकार) किसानों की नहीं सुन रहे हैं लेकिन आप बुलेट ट्रेन और मेट्रो रेल जैसी परियोजनाओं पर 300-400 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए तैयार हैं। क्या किसानों ने बुलेट ट्रेन की मांग की ?

सरकार का दावा, सारी मांगें मानी गईं
जबकि सरकार ने दावा किया कि उन संघों का प्रतिनिधित्व करने वालों ने दूध आपूर्ति को रोक दिया है जो किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है। सदन में कांग्रेस और एनसीपी नेताओं की नारेबाजी जारी रही और वो सरकार के खिलाफ हमला बोलते रहे। जबकि हंगामे को देखकर सदन में स्पीकर ने आश्वासन दिया कि वो सीएम फणडवीस से इस मामले पर बैठक बुलाकर इसे हल करने को कहेंगे। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वाकई अगर शिवसेना किसानों के मुद्दे पर गंभीर है तो वो सरकार से अलग क्यों नहीं हो जाते हैं।












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