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Maharashtra Election Result: मुसलमानों ने कैसे MVA से छीनकर महायुति के हाथों में थमा दी ऐतिहासिक जीत?

Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र में महायुति या एनडीए की ऐतिहासिक जीत के पीछे मुसलमानों और मुस्लिम नेताओं की रणनीति का बहुत बड़ा योगदान माना जा सकता है। लोकसभा चुनावों के समय से ही इनकी ऐसी रणनीति रही है, जिससे बीजेपी को अपने जनाधार को फिर से संभालने-संवारने का मौका मिला और उसमें वह पूरी तरह से कामयाब साबित हुई।

महाराष्ट्र के मुस्लिमों ने पहले लोकसभा चुनावों में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के उम्मीदवारों के खिलाफ रणनीतिक वोटिंग की। फिर इस बार विधानसभा चुनावों से पहले मौलानाओं और उलेमाओं ने इसके लिए वाकायदा फरमान तक जारी किए। नतीजे से पता चलता है कि इसका असर ये हुआ कि भाजपा और महायुति को बहुसंख्यक वोटों को एकजुट करने का मौका मिल गया।

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मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का निकाल लिया काट!
6 महीने पहले लोकसभा चुनावों में अपने गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ मुस्लिम वोट के ध्रुवीकरण की वजह से बीजेपी धुले और मुंबई उत्तर-पूर्व सीट समेत कम से कम सात सीटें हार गई। भाजपा ने इसके लिए बार-बार धुले लोकसभा सीट के अंदर आने वाली मुस्लिम-बहुल मालेगांव सेंट्रल सीट पर मुस्लिमों के वोटिंग पैटर्न का हवाला दिया। ये ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा का पहले से मजबूत जनाधार रहा है।

बीजेपी को नए नारे गढ़ने का मौका मिला, जो असरदार साबित हुआ
बीजेपी ने अपने गठबंधन के खिलाफ मुस्लिम वोट के ध्रुवीकरण से निपटने के लिए अपने जनाधार को फिर से गोलबंद करने का अभियान शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक हैं तो सेफ हैं का नारा' दिया।'यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो 'बटेंगे तो कटेंगे' वाले नारे का हरियाणा में सफल प्रयोग कर चुके थे, उसे महाराष्ट्र में भी जोरदार तरीके से दोहराने लगे। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ बर्बरता की घटनाओं ने इन नारों को और ताकत दी।

उधर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और भाजपा के दिग्गज नेता देवेंद्र फडणवीस ने कथित 'वोट जिहाद'के बदले 'धर्मयुद्ध' जैसे नारे को संवारना शुरू किया। कुल मिलाकर बहुसंख्यक वोटों के बिखराव को रोकने की पहल की गई और खासकर पीएम मोदी ने इसे सकारात्मक रूप से राष्ट्रीय भावना से भी जोड़ने का सफल प्रयास किया।

हिंदुओं की शांतिपूर्ण एकजुटता ने काम कर दिखाया
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उससे पूरी तरह से लगता है कि मुसलमानों के ध्रुवीकरण की कोशिशों के खिलाफ हिंदुओं की शांतिपूर्ण एकजुटता ने आराम से बीजेपी और महायुति का काम कर दिया।

मुस्लिम मौलानाओं और उलेमाओं ने भी की बीजेपी की मदद!
भाजपा का काम आसान करने में लगता है कि मुस्लिम मौलानाओं और उलेमाओं ने भी भरपूर मदद की है। चुनाव से पहले ऐसे माहौल बना जैसे लग रहा था कि महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेता उनकी उंगलियों पर नाचने को तैयार रहें, नहीं तो फिर अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में सोच लें!

मुस्लिम नेताओं ने डुबो दी एमवीए की लुटिया!
महाराष्ट्र के नेशनल उलेमा काउंसिल और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सज्जाद नोमानी ने एमवीए को अपनी मांगों की लिस्ट थमा दी। उन्हें सरकारी ठेकों में मुसलमानों के लिए कोटा भी चाहिए था और पुलिस भर्ती में उनके लिए प्राथमिकता भी। ऐसी मांगों के साथ ही उन्होंने मुसलमानों को इशारा कर दिया कि महा विकास अघाड़ी के उम्मीदवारों को वोट दे आएं। इन्हें जरा भी अंदाजा नहीं लगा कि यह बीजेपी को हराने के लिए नहीं, बल्कि एमवीए की लुटिया डुबोने की तैयारियों में जुटे हैं।

मुसलमानों की एमवीए से उम्मीद इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि मुस्लिम युवाओं ने वक्फ बिल पर अपनी स्थिति पर फिर से विचार करने के लिए दबाव बनाने के मकसद से शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री'के घर के आगे प्रदर्शन तक कर दिया।

बीजेपी ने राष्ट्र की एकजुटता के साथ हिंदुओं को किया गोलबंद!
एक तरफ मुसलमान और उनके नेता अपने वोट बैंक की ताकत की नुमाइश करने में लगे थे, दूसरी तरफ बीजेपी को अपना खिसका हुआ जनाधार एकजुट करने का अवसर तैयार हो रहा था। भाजपा नेताओं ने बहुत ही सूझबूझ के साथ यह संदेश दिया कि देश के बदलते माहौल में राष्ट्र की एकजुटता कितनी आवश्यक है।

देश की एकजुटता का यह संदेश दशहरे के मौके पर आरएसएस के सर संधचालक मोहन भागवत के वार्षिक संबोधन में भी नजर आया। संघ के एक और वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबले ने भी बांग्लादेश का हवाला देकर 'बटेंगे तो कटेंगे' जैसे नारे का इस्तेमाल किया और इस तरह से बीजेपी और महायुति को अपने पक्ष में माहौल तैयार करने का मौका मिलता रहा।

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