Maharashtra: महाराष्ट्र में कैसे सुधर रही किसानों की आय? नमो किसान मेगा सम्मान निधि ने दी मजबूती
Namo Kisan Mega Samman Nidhi Scheme: भारत में एक बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। ऐसे में केंद्र सरकार की नमो किसान मेगा सम्मान निधि योजना किसान और देश की अर्थव्यवस्था में अहम रोल अदा कर रही है। बात महाराष्ट्र की करें तो यहां शिंदे सरकार के सहयोग से केंद्र की इस योजना का किसानों को भरपूर लाभ मिल रहा है।
सरकार की नमो किसान मेगा सम्मान निधि योजना के तहबत किसानों को 500 रुपये की मासिक सहायता दी जाती है। इसके माराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भी इसी तरह की योजना शुरू की है, जिसमें 500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। ऐसे में किसानों को प्रतिवर्ष केंद्र और प्रदेश सरकार की स्कीम के जरिए 12000 रुपए उनके खाते में दिए जाते हैं।

महाराष्ट्र कृषि उपज के मामले में अग्रणी राज्य है। जहां जहां प्याज, गन्ना, चावल, फल और सब्जियों जैसी फसलें प्रमुखता से उगाई जाती हैं। इस क्षेत्र में सोयाबीन, ज्वार, बाजरा और दालों का भी पर्याप्त उत्पादन होता है। हालांकि, हाल ही में बारिश के पैटर्न में आए व्यवधानों ने मौसम की अनियमित स्थितियों को जन्म दिया है, जिससे किसानों के लिए तूफान और ओलावृष्टि जैसी चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। इसके अलावा, कृषि कार्य करने वालों के लिए असंगत बिजली आपूर्ति एक महत्वपूर्ण समस्या बनी हुई है।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमो किसान मेगा सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है, जो किसानों को 500 रुपये की मासिक सहायता प्रदान करती है। इसके अलावा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भी इसी तरह की योजना शुरू की है, जिसमें 500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। कुल मिलाकर महाराष्ट्र में किसानों को वर्ष में 12,000 रुपए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से प्राप्त होते हैं।
बात महाराष्ट्र की करें तो ये स्कीम राज्य के लगभग 9.243 मिलियन किसानों को लाभ पहुंचाती है, जिससे उनके खातों में हर दो महीने में नियमित मासिक भुगतान जमा होता है।
महाराष्ट्र में बिजली की संकट समाधान
कुछ वर्ष पहले महाराष्ट्र में किसानों के लिए बिजली की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बन गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक शिंदे सरकार से पहले कृषि क्षेत्रों में दिन के बारह-बारह घंटे बिजली गायब रहती थी। ऐसे में बिजली की समस्या के कारण कृषि मुश्किल हो गई थी।
बहुत प्रयासों के बाद बिजली आपूर्ति को सुचारू किया गया है। पानी तो है लेकिन बिजली की समस्या के कारण फसलों को देने के लिए पानी नहीं होता था, ऐसी स्थिति में हजारों किसानों की फसलें सूख जाती थीं। लेकिन अब ऐसी स्थिति में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बिजली की समस्या पर नियंत्रण पाने में कामयाब हुई है। जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।
किसानों को फ्री बिजली
राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री अजित पवार ने हाल ही में राज्य का बजट पेश किया। इसमें किसानों को मुफ्त कृषि बिजली देने का निर्णय सरकार की ओर से घोषित किया गया। लगभग 24 लाख किसानों को इस घोषणा का लाभ मिलेगा जिसके लिए 14761 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कई किसानों को शून्य बिल आने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा सरकार ने कृषि उपज के लिए एक बेहतर बाजार भी तैयार की है। जिसके तहत प्याज और सोयाबीन उत्पादक किसानों की यह भरपाई करने के लिए भावांतर स्कीम लागू की गई है। इस योजना के तहत हाल ही में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पांच हजार रुपये की भरपाई रकम किसानों के खातों ट्रांसफर की गई है।
सौर ऊर्जा स्कीम
राज्य के उपमुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में ऊर्जा उत्पादन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके अंतर्गत कंपनियां महाराष्ट्र में निवेश करेंगी और उनका ध्यान सौर ऊर्जा पर होगा। इस माध्यम से किसानों को दिन में मुफ्त बिजली देने की योजना की दूरदर्शी नींव राज्य सरकार ने रखी है। एक रुपये में फसल बीमा योजना भी किसानों के लिए आदर्श साबित हुई है।
दुग्ध उत्पादकों को अनुदान
राज्य के सहकारी और निजी दूध परियोजनाओं को दूध आपूर्ति करने वाले दूध उत्पादकों को गाय के दूध के लिए प्रति लीटर सात रुपये का अनुदान देने का निर्णय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मंत्रिमंडल ने हाल ही में लिया। इससे पहले दूध उत्पादकों को पाँच रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा था, जिसमें दो रुपये की वृद्धि की गई है। इस अनुदान के लिए राज्य सरकार ने 965 करोड़ 24 लाख रुपये का खर्च किया है। इसी प्रकार चावल की मिलिंग के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रति क्विंटल चालीस रुपये अतिरिक्त दर मंजूर किया गया है, जिसके लिए कुल 46 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
नदी जोड़ने के प्रोजेक्ट्स
मराठवाड़ा और पश्चिम विदर्भ महाराष्ट्र के वर्षा छाया वाले क्षेत्र हैं। बारिश की कमी और सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण यहां के किसान परेशान हैं। उत्तर महाराष्ट्र के किसानों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं है। इन तीनों क्षेत्रों में पानी की बड़ी मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नदी जोड़ परियोजनाएं स्थापित करने को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने मंजूरी दी है। इसके अलावा विदर्भ में नलगंगा-वैनगंगा नदी जोड़ परियोजना और उत्तर महाराष्ट्र में नारपार योजना को राज्य सरकार की स्वीकृति मिली है। नलगंगा-वैनगंगा नदी जोड़ से पश्चिम विदर्भ और पूर्व विदर्भ के छह जिलों के किसानों को लाभ होगा, जबकि नारपार नदी जोड़ परियोजना का उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव, धुले जिलों के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी इसका लाभ होगा।












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