हिम्मत है तो अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये विपक्ष: देवेंद्र फडणवीस
मुंबई| महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की 13 दिन पुरानी सरकार ने बुधवार को विधानसभा में विश्वास मत जीत लिया। जिसके बाद अब अपने विरोधियों को चुनौती देने का काम सीएम का था इसलिए फड़नवीस ने अब ने विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने की चुनौती दी। विश्वास मत का विरोध कर रहे शिवसेना और कांग्रेस को सीधा जवाब देते हुए फड़नवीस ने कहा कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है।
मालूम हो कि राज्य की दो मुख्य विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और शिवसेना ने बुधवार को यहां ध्वनिमत की वैधता पर सवाल उठाए। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के नेता विपक्ष घोषित होने के बाद सरकार ने बहुमत साबित किया। हफ्तों से चल रही अटकलों को खत्म करते हुए शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अपने 25 साल पुराने रिश्तों पर रुख साफ कर दिया।
कांग्रेस ने हालांकि इस विश्वास मत को 'लोकतंत्र की हत्या' बताया वहीं शिवसेना ने विश्वास मत हासिल करने की इस प्रक्रिया को 'लोकतंत्र का गला घोंटना' कहा साथ ही बुधवार के दिन को राज्य के इतिहास में काला दिन बताया।
दोनों ही पार्टियों ने घोषणा की कि वह गवर्नर सी. वी. राव के पास अपना विरोध दर्ज करेंगे। आपको बता दें कि संसदीय प्रथा के अनुसार विश्वास मत साबित करने के लिए ध्वनिमत से पहले मतपत्रों के आधार पर मतदान किया जाता है।
विश्वास मत हासिल नहीं किया बल्कि 'लोकतंत्र का गला घोंट' दिया
अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चव्हाण, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेताओं सहित कांग्रेस और शिवसेना के विधायकों ने विधानभवन की सीढ़ियों पर बैठकर नारे लगाए और विश्वास मत हासिल करने के लिए ध्वनिमत की निंदा की।
ठाकरे ने मांग करते हुए कहा, "यह लोकतंत्र की हत्या है और पूरा राज्य इसका गवाह है। यह सरकार अब भी अल्पमत में है और इसे तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।"
उधर, शिवसेना के रामदास कदम और अन्य नेताओं ने भी यह जानने के लिए कि कितने लोग भाजपा सरकार के पक्ष में हैं, ध्वनिमत की गिनती कराने की मांग की।
ठाकरे ने घोषणा करते हुए कहा, "हम राज्यपाल से नए सिरे से विश्वास मत का निर्देश देने का आग्रह करेंगे। पूर्व में ए.बी. वाजपेयी की सरकार सिर्फ एक वोट की कमी की वजह से गिर गई थी। इस सरकार के पास 25 वोट कम है और इसे आगे बढ़ने का कोई हक नहीं है। हम सरकार को काम नहीं करने देंगे।"
जब राज्यपाल विधान भवन पहुंचे, उनकी गाड़ी को विरोध कर रहे विधायकों ने अवरूद्ध कर दिया, और उनपर सवाल दागने शुरू कर दिए। राज्यपाल से विधायकों ने राज्य की जनता के लिए इंसाफ की मांग की।
शिवसेना ने मतविभजान की मांग की थी। विधानसभा में भाजपा के 121, शिवसेना के 63, कांग्रेस के 42 और राकांपा के 41 विधायक हैं। इसके अलावा कुछ छोटी पार्टियों और निर्दलीयों को मिलाकर 18 विधायक हैं। भाजपा इनका समर्थन हासिल होने का दावा कर रही है।
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