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महागठबंधन में दरार: कांग्रेस को डर, क्या सपा-बपसा मिलकर हाथ का साथ छोड़ने की तैयारी में तो नहीं?

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए बने महागठबंधन में दरार पड़ने की खबर है। खबर है कि मायावती की बीएसपी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में अब पीछे हटने लगी है। इसका असर 10 सितंबर को देखने को मिला जब कांग्रेस के नेतृत्व में 15 से अधिक विपक्षी दलों ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर भारत बंद का ऐलान किया था। बंद का कोई बहुत खास तो नहीं लेकिन मिला-जुला असर जरूर रहा। कांग्रेस के इस भारत बंद में बाकी पार्टियों ने हिस्सा जरूर लिया लेकिन उत्तर प्रदेश की सपा और बसपा ने दूरी बनाए रखी। जिसके बाद महागठबंधन में दरार की खबर को और बल मिल गया है।

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के साथ कांग्रेस को भी कोसा

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के साथ कांग्रेस को भी कोसा

महागठबंधन में दरार को उस समय और बल मिल गया जब बसपा सुप्रीमों मायावती ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस की पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। मायावती ने कहा कि पट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी और महंगाई के लिए हम बीजेपी और कांग्रेस दोनों को जिम्मेदार मानते हैं। क्योंकि कांग्रेस ने यूपीए-2 के दौरान पेट्रोल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का फैसला किया था। इसके बाद सत्ता में आई मोदी सरकार ने भी कांग्रेस की आर्थिक नीति को आगे बढ़ा रही है। मयावती ने कहा कि बीजेपी तो कांग्रेस से भी एक कदम आगे निलक गई है। क्योंकि उसने डीजल को भी सरकारी नियंत्रण से बाहर कर दिया है। जिसका असर देस के किसानों पर पड़ रहा है।

सुनियोजित तरीके से मिलकर कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं?

सुनियोजित तरीके से मिलकर कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं?

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में भारत बंद में सपा-बसपा का शामिल न होना और मायावती की ओर से निशाना साधे जाने के बाद कांग्रेस में बेचैनी बढ़ गई है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस ये सोच रही है कि कही सपा-बसपा सुनियोजित तरीके से कांग्रेस से दूरी तो नहीं बना रहे हैं? जबकि राहुल गांधी गठबंधन पर खुलकर समर्थन करने की बात कही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए महिला उम्मीदवार की बात भी की। लेकिन सपा-बसपा की नियत पर कांग्रेस पार्टी को शक होने लगा है। इधर मायावती सीटों के बटवारे पर पहले ही अपनी बात रख चुकी हैं।

बीजेपी-कांग्रेस एक ही थैली के चट्टे-बट्टे

बीजेपी-कांग्रेस एक ही थैली के चट्टे-बट्टे

मायावती ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक थैली के चट्टे-बट्टे जैसे मुहावरे का इस्तेमाल किया। मायावती ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही बड़े आर्थिक सुधार के नाम पूंजीपतियों के समर्थन के साथ-साथ गरीब किसान व जनविरोधी नीतियों और फैसलों को वापस लेने के मामले में एक जैसे हैं। अब मायावती के इस बयान के बाद महागठबंधन के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा होने लगी है।

यह भी पढ़ें-पीएम मोदी पर प्रवीण तोगड़िया का हमला, 'हिंदू नेता के तौर पर सत्ता में आए और बन गए मुसलमानों के वकील

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