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Explained: क्यों सनातन धर्म पर मद्रास हाई कोर्ट का विचार 'अमर्यादित बयानबाजी' करने वालों पर जोरदार तमाचा है?

सनातन धर्म को लेकर जारी विवादों के बीच मद्रास हाई कोर्ट ने इसके मूल के बारे में जो बातें बताई हैं, वह इसको लेकर 'अनर्गल और अमर्यादित' बयानबाजी करने वाले नेताओं पर जोरदार तमाचा माना जा सकता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने दो टूक कहा है कि 'सनातन धर्म' 'सनातन या शाश्वत कर्तव्यों का एक पूरा समूह है'। जबकि, इस तरह के विचार उभर रहे हैं कि यह सिर्फ 'जातिवाद फैलाने' और 'अस्पृश्यता या छुआछूत' को लेकर है।

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सनातन धर्म पर 'अमर्यादित बयानबाजी' पर मद्रास हाई कोर्ट की दो टूक
गौरतलब है कि मद्रास हाई कोर्ट ने यह बातें ऐसे समय में कही हैं, जब तमिलनाडु के मंत्री और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन की ओर से सनातन धर्म को मिटा देने जैसे विचार जाहिर करने के बाद पूरे देश में भारी नाराजगी पैदा हुई है। लेकिन, डीएमके नेताओं की ओर से न सिर्फ उनके बयान का समर्थन किया जा रहा है, बल्कि उसे जायज ठहराने की होड़ सी लगी हुई है।

'सनातन धर्म शाश्वत कर्तव्यों का एक समूह है'
दरअसल पिछले हफ्ते मद्रास हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के जज जस्टिस एन शेषशायी ने कहा कि 'सनातन धर्म शाश्वत कर्तव्यों का एक समूह है, जिसे हिंदू जीवन पद्धति मानने वाले लोग अपनाते हैं।' उन्होंने लिखा है कि इन कर्तव्यों में राष्ट्र के प्रति, माता-पिता के प्रति, गुरुओं के प्रति कर्तव्य शामिल हैं। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि ऐसे कर्तव्यों को क्यों मिटा दिया जाना चाहिए?

सनातन धर्म पर बहस को लेकर जज ने जताई चिंता
जस्टिस शेषशायी ने सनातन धर्म को लेकर चल रही बहस पर चिंता जताते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि वे इसके प्रति सचेत हैं और न्यायिक आदेश में इस पर विचार जाहिर करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।

'सनातन धर्म का उद्देश्य जीवन जीने का एक तरीका है'
जज ने यहां तक कहा कि 'सनातन धर्म का उद्देश्य जीवन जीने का एक तरीका है, लेकिन कहीं ना कहीं इस विचार ने जोर पकड़ लिया है कि यह सिर्फ जातिवाद को बढ़ावा देने और छुआछूत फैलाने वाला है।' उन्होंने साफ किया कि अगर सनानत धर्म के सिद्धांतों के तहत भी छुआछूत की अनुमति मिलती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

सनातन को किसी एक विशिष्ट साहित्य से नहीं जोड़ा जा सकता है-मद्रास हाई कोर्ट
जज ने कहा कि 'यह अदालत सनातन धर्म के समर्थक और विरोध पर बहुत मुखर और बीच-बीच में होने वाली हंगामेंदार बहसों के प्रति सचेत है। इसे मोटे तौर पर यह समझा गया है कि सनातन धर्म 'शाश्वत कर्तव्यों' के एक समूह के रूप में है; और इसे किसी एक विशिष्ट साहित्य से नहीं जोड़ा जा सकता है.......बल्कि इसे कई स्रोतों से जुटाना होगा जो या तो हिंदू धर्म से संबंधित है.... या जिसे हिंदू जीवन शैली का पालन करने वाले लोग स्वीकार करते आए हैं....'

क्या ये सभी कर्तव्य नष्ट होने योग्य हैं?- मद्रास हाई कोर्ट
हाई कोर्ट के जज ने आगे बताया, 'इसमें राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, राजा के प्रति कर्तव्य, राजा का अपनी प्रजा के प्रति कर्तव्य, माता-पिता और गुरुओं के प्रति कर्तव्य, गरीबों की सेवा और अनेकों अन्य तरह के कर्तव्य भी शामिल हैं।' हाई कोर्ट ने बहुत ही गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि 'क्या ये सभी कर्तव्य नष्ट होने योग्य हैं?'

'सनातन धर्म के अंदर या बाहर अस्पृश्यता अब संवैधानिक नहीं हो सकती'
इसके साथ ही जज ने यह भी साफ किया कि 'सनातन धर्म के अंदर या बाहर अस्पृश्यता अब संवैधानिक नहीं हो सकती, हालांकि, यह दुखद है कि यह मौजूद है। एक समान नागरिकों वाले देश में छुआछूत को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और भले ही इसे 'सनातन धर्म' के सिद्धांतों के तहत किसी न किसी अनुमति के रूप में देखा जाता हो,इसके लिए जगह नहीं हो सकती। क्योंकि संविधान के अनुच्छेद-17 में अस्पृश्यता को समाप्त कर दिए जाने की घोषणा की गई है।'

'बोलने की आजादी पर औचित्यपूर्ण पाबंदियां भी लगी हैं'
दरअसल, मद्रास हाई कोर्ट ने इस तरह के विचार एक कॉलेज के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जाहिर किए हैं, जिसने छात्र-छात्राओं से 'सनातन के विरोध' विषय पर उनके विचार मांगे थे। अदालत ने साफ किया संविधान निर्माताओं ने बोलने की आजादी को बहुत ही सावधानी से पूर्ण अधिकार के तौर पर नहीं रखा है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के तहत इसपर कुछ औचित्यपूर्ण पाबंदियां भी लगाई हैं।

'फ्री स्पीच हेट स्पीच नहीं हो सकता'
अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया के जमाने में बोलने की आजादी को आजकल किस तरह से देखा जाता है कि कोई भी विज्ञान और रॉकेट साइंस तक पर भी लेक्चर देता नजर आता है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि 'फ्री स्पीच हेट स्पीच नहीं हो सकता' या बोलने की आजादी का मतलब ये नहीं है कि नफरत भरी बातें की जाएं। हालांकि, इस दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि संबंधित कॉलेज ने सनातन पर छात्रों से विचार मांगने वाला अपना सर्कुलर वापस ले लिया है।

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