वर्दीधारी पुलिसकर्मियों को अफसरों के घर अरदली बनाने पर मद्रास HC सख्त, दिया ये निर्देश
चेन्नई, 21 जून: मद्रास हाई कोर्ट ने वर्दीधारी पुलिस वालों का उनकी सही ड्यूटी की जगह गलत इस्तेमाल करने को लेकर काफी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जो भी पुलिस अधिकारी पुलिसकर्मियों से घर पर चपरासी का काम लेते पकड़े जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने पूछा है कि क्या इन पुलिसकर्मियों को घरेलू काम करने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि, इस मामले में तमिलनाडु सरकार के अबतक के ऐक्शन से कोर्ट खुश है और मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

'किस चीज की ट्रेनिंग दी जाती है, घरेलू काम करने के लिए ?'
वर्दीधारी पुलिसकर्मियों से चपरासी वाला काम लेने के मामलों पर मद्रास हाई कोर्ट ने काफी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि वर्दीधारी पुलिस वालों से अधिकारियों की ओर से घरेलू काम करवाना ना सिर्फ गैर-कानूनी है, बल्कि ये दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है। मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है, 'उन्हें (पुलिसकर्मियों को) किस चीज के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। घरेलू काम करने के लिए ?' अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश किया कि वह ये सुनिश्चित करे कि ऐसे सभी अरदलियों को तत्काल इस तरह के काम से हटाया जाए, इनमें रिटायर्ड पुलिस अफसरों के घर पर ड्यूटी देने वाले पुलिसकर्मी भी शामिल होंगे।
आधिकारिक वाहनों के निजी इस्तेमाल पर भी फटकार
अदालत ने कहा कि घर पर नौकर रखने के लिए मासिक भत्ता लेने के बावजूद पुलिस अधिकारी फोर्स का दुरुपयोग कर रहे थे। यही नहीं अदालत ने आधिकारिक वाहनों के निजी इस्तेमाल पर भी फटकार लगाया है। कोर्ट ने कहा, 'सरकारी वाहन का इस्तेमाल सिर्फ आधिकारिक कार्यों के लिए किया जा सकता है, दूसरे कार्य के लिए नहीं। कानून सिर्फ संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को आधिकारिक वाहन का निजी उपयोग करने की भी इजाजत देता है, जैसे कि मुख्यमंत्री।'
सरकार ने कहा कि डीजीपी से 4 हफ्तों में मांगी है रिपोर्ट
अदालत से सहमति जताते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल पी कुमारेसन ने कोर्ट को बताया कि गृह सचिव ने डीजीपी को पुलिस के आधिकारिक वाहनों में ब्लैक फिल्म इस्तेमाल, निजी वाहनों में विभाग के नाम का इस्तेमाल और अरदली के नाम पर पुलिस फोर्स के अपने घर या दूसरी जगह शोषण करने के मुद्दे को देखने का निर्देश दिया है और चार हफ्तों में रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री ने बड़े अधिकारियों की एक बैठक बुलाई है और इन मामलों को देखने का उन्हें निर्देश दिया है।'
सरकार की ओर से फौरी कार्रवाई की सराहना करते हुए कोर्ट ने सुनवाई को 25 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है, ताकि आगे की रिपोर्ट दाखिल की जा सके। दरअसल, इस मामले में एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने याचिका डाली थी, जो रिटायरमेंट के वर्षों बाद भी उस आधिकारिक आवास में रह रहा था।












Click it and Unblock the Notifications