दोस्त को कुलपति बनवाने के लिए विंग कमांडर ने अमित शाह बनकर किया राज्यपाल को फोन
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने शुक्रवार को भारतीय वायु सेना के एक विंग कमांडर और उसके एक डॉक्टर मित्र को गिरफ्तार किया है। विंग कमांडर ने अपने डॉक्टर मित्र को प्रदेश के चिकित्सा विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्त कराने के लिये राज्यपाल को कथित तौर पर गृहमंत्री अमित शाह बनकर फोन किया था। राज्यपाल और उनके स्टाफ को फोन कॉल में गड़बड़ लगी तथा दिल्ली में गृह मंत्री शाह के बंगले पर इस तरह के कॉल का सत्यापन कराया। फोन कॉल मंत्री के यहां से नहीं किए जाने पर मामला एसटीएफ को सौंपा गया जिसने विंग कमांडर व डॉ. चंद्रेश कुमार शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया।
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एसटीएफ एडीजी अशोक अवस्थी ने बताया कि जबलपुर के मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कुलपति चयन होना था जिसके लिए कई लोगों ने बायोडाटा दिए थे। कुलपति चयन के लिए सर्च कमेटी ने साक्षात्कार भी लिए थे। इसमें भोपाल के साकेतनगर में रहने वाले डेंटल सर्जन डॉ. चंद्रेश कुमार शुक्ला भी शामिल थे। चयन प्रक्रिया के बीच में डॉ. शुक्ला ने अपने मित्र एयरफोर्स में विंग कमांडर कुलदीप वाघेला से चर्चा की। शुक्ला ने मित्र वाघेला को कहा कि कुलपति बनने के लिए किसी बड़े व्यक्ति से फोन कराना पड़ेगा तो दोनों के बीच चर्चा में भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राज्यपाल की बात कराना तय हुआ। मगर अमित शाह का लिंक नहीं मिलने पर दोनों ने खुद ही शाह बनकर राज्यपाल से बात करने की योजना बनाई।
जब राज्यपाल को आवाज और बात करने के लहजे पर संदेह हुआ तो उन्होंने इसकी जानकारी स्टाफ को दी। इसके बाद राज्यपाल के स्टाफ ने गृह मंत्री के दिल्ली स्थित दफ्तर और निवास से ऐसी किसी फोन कॉल की जानकारी ली तो पता चला कि गृह मंत्री ने ऐसा कोई फोन कॉल किया ही नहीं। इसके बाद एक लिखित शिकायत मध्य प्रदेश एसटीएफ को दी गई। एसटीएफ ने इस मामले में धारा 419 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में एयरफोर्स के विंग कमांडर कुलदीप वाघेला और डॉक्टर चंद्रेश कुमार शुक्ला की संलिप्तता पाई गई, जिसके बाद विंग कमांडर कुलदीप को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं डॉक्टर चंद्रेश शुक्ला को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ एडीजी के मुताबिक विंग कमांडर कुलदीप वाघेला पूर्व में मध्य प्रदेश के राज्यपाल के निवास पर तैनात रह चुका है, इसलिए उसे जानकारी थी कि फोन पर राज्यपाल से बात कैसे हो पाएगी और इसी का उसने फायदा उठाने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सका।












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