Madhya Pradesh: कुपोषित बच्चों के लिए 8 रुपए, गाय पर 40 रुपए खर्च कर रही मोहन यादव की सरकार, देखिए रिपोर्ट
Madhya Pradesh: आज से 20 साल पहले पारले जी बिस्किट का पैकेट सिर्फ चार रुपए का था जो कि अब पारले जी का 10 रुपए का मिलता है। लेकिन, सवाल ये है कि क्या 8 रुपए में किसी भूखे बच्चे की भूख मिट सकती है? क्या कोई बच्चा जो भूख से मरने की कगार पर हो उसके लिए 12 रुपए में इतना आहार आ सकता है कि वह अति कुपोषित की श्रेणी से बाहर आ सके? जवाब एक दम साफ है नहीं। लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार ये कर रही है। मध्य प्रदेश सरकार का ताजा डेटा सामने आया है।
दरअसल राज्य के बच्चों में, खासकर कि शिशुओं में कुपोषण की स्थिति गंभीर है, आज से नहीं सालों से यही स्थिति है। इसे लेकर जब सवाल पूछे गए तो मोहन यादव की सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विधानसभा में आंकड़े पेश किए। जिसके मुताबिक राज्य में हर एक कुपोषित बच्चे के पोषण पर सरकार रोजाना 8 रुपए और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों पर 12 रुपए खर्च कर रही है।

अधिकारी खा रहे ड्राई फ्रूट्स
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दिए गए जवाब के बाद, कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने फिर से सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब दूध ₹70 प्रति लीटर बिक रहा है, तो बच्चों को इस नाममात्र की राशि में उचित पोषण कैसे मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों की बैठकों में होने वाले हजारों रुपये के नाश्ते और सूखे मेवों के खर्च की तुलना कुपोषित बच्चों के लिए दी जा रही राशि से की।
मध्य प्रदेश में कुपोषण की गंभीर स्थिति
राज्य में कुपोषण एक गंभीर और हर पल बढ़ने वाली एक बड़ी समस्या है। खासकर आदिवासी इलाकों में। श्योपुर, धार, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा और बालाघाट जैसे आदिवासी बहुल जिलों में हालात ज्यादा खराब है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई जिलों में हर चार में से एक बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित है। यानी कि करीब 25 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की जद में हैं।
डेढ़ लाख बच्चें कुपोषण के शिकार
सरकारी डेटा को ही सही मान लें तब भी राज्य में कुल 1.36 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, जिनमें से 29,830 की हालत इतनी खराब है कि आप अंदाजा नहीं लगा सकते। जबकि 1 लाख 6 हजार बच्चे मध्यम रूप से कुपोषित हैं। साथ ही मध्य प्रदेश की कुपोषण दर 7.79 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 5.40 प्रतिशत से काफी अधिक है।
आंगनवाड़ी केंद्र के हाल
राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। कैसे काम कर रहे हैं कुछ नहीं पता। लेकिन आंकड़ा कहता है कि यही आंगनवाड़ी केंद्र कुपोषित बच्चों को ₹8 प्रतिदिन और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को ₹12 प्रतिदिन पूरक पोषण आहार देते हैं। कभी किसी आंगनवाड़ी केंद्र में दो तरह का खाना देखा है आपने? आंगनवाड़ी केंद्रों में या तो दलिया आता है या पोहा आता है जो सबको दे दिया जाता है। जिसकी क्वालिटी भी कई बार दुनिया के सामने आ चुकी है।
क्या बोलीं जिम्मेदार मंत्री निर्मला भूरिया?
सदन में बता हुई तो महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री निर्मला भूरिया ने भी स्वीकार किया है कि यह राशि कम है और उन्होंने केंद्र सरकार से अधिक फंड की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि कई अन्य राज्यों ने भी पोषण आहार भत्ता बढ़ाने के लिए केंद्र से अनुरोध किया है।
प्रत्येक गाय पर खर्च 40 रुपए
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक इसी साल मार्च में मध्य प्रदेश सरकार ने गौशालाओं में प्रत्येक गाय पर प्रतिदिन खर्च होने वाली राशि को ₹20 से बढ़ाकर ₹40 कर दिया है। उस रिपोर्ट में यह कहा गया कि गाय का पेट भरने के लिए 20 रुपए प्रतिदिन कम हैं इसलिए इसे 40 रुपए प्रतिदिन कर देते हैं। मतलब गाय पर 40 रुपए खर्च करने के लिए सरकार तैयार है, लेकिन कुपोषित बच्चों के लिए मात्र 8 और 12 रुपए।
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