भाजपा में शामिल होते ही सिंधिया की बढ़ी मुश्किलें, कमलनाथ सरकार ने शुरू की कथित जमीन घोटाले की दोबारा जांच

भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के 24 घंटे बाद ही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने उनके खिलाफ एक पुराने मामले की फिर से जांच करने का फैसला किया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ इस कथित जमीन घोटाला मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने दोबारा जांच शुरू कर दी है। इसमें एक ही जमीन को बार-बार बेचने का आरोप है। साथ ही सरकारी जमीन को भी बेचने का आरोप है।

कथित जमीन घोटाले का मामला फिर खुला

कथित जमीन घोटाले का मामला फिर खुला

इस मामले की पहले जांच हो चुकी है, लेकिन अब आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शिकायत के तथ्यों का फिर से सत्यापन करने का फैसला लिया है। ईओडब्ल्यू के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सुरेंद्र श्रीवास्तव द्वारा दायर शिकायत में तथ्यों के पुन: सत्यापन का आदेश दिया गया है। ईओडब्ल्यू की प्रेस रिलीज में कहा गया है कि सुरेंद्र श्रीवास्तव ने सिंधिया और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने एक रजिस्ट्री दस्तावेज में हेरफेर कर साल 2009 में ग्वालियर के महलगांव में 6000 फुट जमीन उसे बेची थी।

2018 में बंद कर दिया गया था केस

2018 में बंद कर दिया गया था केस

इस मामले में अधिकारी ने बताया कि पहली बार ये शिकायत 26 मार्च 2014 में की गई थी जिसकी जांच के बाद हमने इसे 2018 में बंद कर दिया था। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने 12, मार्च 2020 को फिर से इस मामले में आवेदन दिया है, जिसके आधार पर शिकायत के तथ्यों को फिर से सत्यापित करेंगे। वहीं, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता और सिंधिया के करीबी माने जाने वाले पंकज चतुर्वेदी ने इस मामले पर कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बदले की भावना से ये सब किया जा रहा है।

सिंधिया के करीबी ने कहा- बदले की भावना से हो रहा ये सब

सिंधिया के करीबी ने कहा- बदले की भावना से हो रहा ये सब

पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि लेकिन इससे कुछ होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ये मामला सबूतों के अभाव में खत्म हो चुका है लेकिन फिर भी बदले की भावना से ये सब किया जा रहा है। हमें कानून पर पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा और बदला लेने वाली कमलनाथ सरकार को करारा जवाब मिलेगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने होली के दिन (10 मार्च) को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 22 विधायकों ने भी अपना इस्तीफा देकर कमलनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विधानसभा स्पीकर अगर इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

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