VIDEO: बिल्कुल अटल के अंदाज में इस्तीफा देने गए शिवराज
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर के बाद आखिरकार कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। 15 साल से प्रदेश की सत्ता से बाहर रही कांग्रेस पार्टी अब सरकार बनाने जा रही है। दूसरी ओर चुनाव नतीजों में कांग्रेस से पिछड़ने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने इस्तीफा दे दिया है। चुनाव के फाइनल नतीजे आने के बाद उन्होंने इस्तीफे का फैसला लिया। हालांकि इस्तीफे से पहले शिवराज सिंह चौहान जिस अंदाज में सामने आए और अपनी बातें रखीं उसने 1996 के उस पल को याद दिला दिया, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने पीएम पद से इस्तीफा देते समय खास भाषण दिया था। आखिर शिवराज सिंह चौहान ने कैसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंदाज में जनादेश स्वीकार करने की बात कही, बताते हैं आगे....

विधानसभा चुनाव के फाइनल नतीजों के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा भारतीय जनता पार्टी ने यद्यपि वोट ज्यादा प्राप्त किए हैं लेकिन मैं संख्या बल के सामने शीश झुकाता हूं और मैंने फैसला किया है कि स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण हम सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि मैं राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जा रहा हूं। इतना ही नहीं शिवराज सिंह चौहान ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि पराजय की जिम्मेदारी मेरी, मेरी और सिर्फ मेरी है। अब मैं पूरी तरह स्वतंत्र हूं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अत्यधिक प्रयास किया, हमको वोट भी ज्यादा मिले, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध पंक्तियों का भी जिक्र किया, ''ना हार में, ना जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, कर्तव्य पथ पर जो भी मिले, ये भी सही वो भी सही।''
शिवराज सिंह चौहान ने जिस अंदाज में ये बात कही उससे 1996 में वह अटल बिहारी वाजपेयी का वह भाषण याद आ गया जब उनकी 13 दिन पुरानी सरकार बहुमत नहीं मिल पाने की वजह से गिर गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996 में लोकसभा में भाषण देते हुए कहा था कि जनता ने विपक्ष को जनादेश नहीं दिया था लेकिन लोकतंत्र में बहुमत का खेल होता है। ऐसे में हम संख्याबल के सामने शीश झुकाते हैं। मैं इसके साथ ही राष्ट्रपति के पास अपना इस्तीफा देने जा रहा हूं। बता दें कि 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पहली बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। हालांकि विपक्षी पार्टियों के एकजुट होने की वजह से अटल बिहारी वाजपेयी बहुमत साबित करने में असफल रह गए थे।












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