मध्य प्रदेश राजनीतिक संकट: जयपुर से भोपाल पहुंचे कांग्रेस विधायक, एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
भोपाल। मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी संग्राम में शनिवार को निर्णायक मोड़ आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत प्रदेश भाजपा नेताओं के एक दल द्वारा राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने के सात घंटे बाद राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार को सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश दे दिया। मध्यरात्रि को जारी पत्र में राज्यपाल ने निर्देश दिया कि अभिभाषण के ठीक बाद सरकार बहुमत साबित करे। विश्वास मत पर वोटिंग बटन दबाकर होगी। वहीं कांग्रेस विधायक, जो जयपुर के रिजॉर्ट में थे, भोपाल पहुंच गए हैं। इसके मद्देनजर भोपाल एयरपोर्ट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट के आसपास धारा 144 लागू कर दिया गया है।

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रविवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इसमें सभी विधायकों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। इस बैठक में सरकार बचाने की रणनीति पर चर्चा होगी। आपको बता दें कि इससे पहले विधानसभा स्पीकर ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि फ्लोर टेस्ट का आदेश देते हुए राज्यपाल ने कहा है कि अब इस कार्रवाई को स्थगित नहीं किया जा सकता है। वहीं कांग्रेस के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के बाद 230 सीटों वाली विधानसभा में 222 सदस्य रह गए हैं। दो सीटों दो विधायकों की मौत के बाद से खाली चल रही हैं। ऐसे में बहुमत के लिए 112 विधायकों की जरूरत है।
विश्वास मत की संपूर्ण प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी
इसकी संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाए। यह कार्यवाही हर हाल में 16 मार्च को प्रारंभ होगी और इस दौरान सदन की कार्यवाही स्थगित, विलंबित या निलंबित नहीं की जाएगी। राज्यपाल के इस फरमान के साथ जोड़-तोड़ की सियासत करने वालों को तगड़ा झटका लगा है।
बेंगलुरु गए विधायक दबाव में, वे इस्तीफा नहीं देंगे: कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं ने शनिवार को दावा किया कि बेंगलुरु ले जाए गए विधायक दबाव में हैं। भोपाल आने के बाद उनमें से कई विधायक इस्तीफा नहीं देंगे। सिंधिया के करीबी रामनिवास रावत ने कहा, ''मैं कांग्रेसी था और कांग्रेसी रहूंगा। विधायकों को बेंगलुरु में बंधक बनाया गया है। जब वे भोपाल पहुंचेंगे, तो इस्तीफा नहीं देंगे।'' रावत ने कहा- हमने सिंधियाजी को नहीं छोड़ा है, सिंधियाजी हमें छोड़कर गए हैं। भाजपा ने भोपाल में उनके स्वागत में उन्हें विभीषण की उपाधि दे दी। अब ये सही संदर्भ में है या गलत, लेकिन हमारे देश में कोई माता-पिता अपने बच्चों का नाम विभीषण नहीं रखते।












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