होली की पार्टी या कमलनाथ का खौफ? बीजेपी ने अपने विधायकों को भोपाल से दूसरी जगह किया शिफ्ट

नई दिल्ली। होली के मौके पर मध्य प्रदेश की सरकार का रंग उड़ाने वाले कांग्रेस के पूर्व नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस्तीफा देकर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ कमलनाथ सरकार को अपने विधायकों और सरकार जाने की चिंता है जो वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी को भी अपने विधायकों के बागी होने का डर सताने लगा है। मंगलवार की शाम बीजेपी ने अपने सभी विधायकों को बस में बिठाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है। इस दौरान बीजेपी नेता बस में होली के मौके पर 'रंग बरसे' गाना गाते सुनाई दिए।

BJP ने अपने विधायकों को किया शिफ्ट

BJP ने अपने विधायकों को किया शिफ्ट

पिछले 24 घंटे में मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ी सियासी घटना घटी, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ सरकार पर संटक के बादल मंडराने लगे हैं। इसी बीच इसे मौका देखते हुए बीजेपी राज्य में सरकार बनाने के लिए कदम आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है। लेकिन इसी बीच बीजेपी ने अपने विधायकों को भी सेफ हाउस में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।

होली के त्योहार में शामिल होने जा रहे हैं: BJP

मंगलवार की शाम करीब पांच बसों में विधायकों को भरकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। मीडिया से पूछे जाने पर मध्य प्रदेश के बीजेपी विधायक विजय शाह ने कहा, हम सब होली और रंगपंचमी का त्योहार मनाने जा रहे हैं। कमलनाथ सरकार का पाप का घड़ा अब भर चुका है और 16 तारीख को जिस दिन फुटेगा उस दिन फिर मक्खन खाने आएंगे। यहां से बेंगलुरू या दिल्ली जाएंगे। भोपाल भाजपा नेता गोपाल भार्गव ने मीडिया को बताया कि सभी विधायकों के साथ मैं दिल्ली जा रहा हूं। भाजपा के 107विधायक एकजुट हैं। इसके अलावा हमारे पास सपा, बसपा और कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन है। कांग्रेस के 22 और दूसरे विधायकों ने भी इस्तीफे दे दिए हैं। वर्तमान में हमारे पक्ष में 20 विधायक ज्यादा हैं।

बीजेपी में शामिल हो सकते हैं सिंधिया

सोमवार रात से चले सियासी ड्रामे के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस में अपनी 18 साल लंबी पारी को मास्टर स्ट्रोक से खत्म कर दिया। सिंधिया पर भाजपा की नजर आज से नहीं पिछले करीब दो सालों से थी। पू्र्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने एक कार्यक्रम में सिंधिया को पीएम मोदी से मिलाया था और उन्हें आज के दौर का एक करिश्माई नेता बताया था। भाजपा केवल इस वजह से असमंजस में थी कि सिंधिया को राहुल गांधी का सबसे करीबी नेता बताया जाता था। कुछ भाजपाई नेताओं को इस बात का भी अंदेशा था कि कहीं अजित पवार की तरह फजीहत ना हो। प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात में पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद इस डील को हरी झंडी दी गई।

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